अल्ट्राटेक की याचिका पर बिल्डर एसोसिएशन को नोटिस

india supreem courtनई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने जुर्माने की 10 फीसद रकम जमा कराए जाने के प्रतिस्पर्धा अपीलीय न्यायाधिकरण (कॉम्पैट) के फैसले को चुनौती देने वाली अल्ट्राटेक सीमेंट की याचिका पर बिल्डर एसोसिएशन ऑफ इंडिया (बीएआइ) को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। मालूम हो कि प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआइ) ने गुटबंदी कर सीमेंट की कीमतें बढ़ाने पर दस सीमेंट कंपनियों पर 6,300 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। आयोग ने यह फैसला बीएआइ की शिकायत पर सुनवाई करते हुए दिया था।

सीमेंट कंपनियों ने आयोग के फैसले को कॉम्पैट में चुनौती दे रखी है। कॉम्पैट ने सीमेंट कंपनियों की याचिका पर 17 मई को अपने अंतरिम आदेश में कंपनियों को जुर्माने की रकम का 10 फीसद हिस्सा जमा कराने को कहा था। न्यायाधिकरण ने अपने आदेश में यह भी कहा था कि अगर 16 जून तक यह राशि जमा नई कराई गई तो 17 जून को सीमेंट कंपनियों की अपील खारिज कर दी जाएगी।

अल्ट्राटेक व अन्य सीमेंट कंपनियों ने कॉम्पैट के इस अंतरिम आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। सोमवार को अल्ट्राटेक की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी व अमित भंडारी ने कॉम्पैट के अंतरिम आदेश का विरोध करते हुए कहा कि न्यायाधिकरण अपील सुनने से पहले पेनाल्टी की दस फीसद रकम जमा करने का आदेश नहीं दे सकता। कानून में ऐसा प्रावधान नहीं है।

उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से इस आदेश पर अंतरिम रोक लगाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि अगर आदेश पर रोक नहीं लगाई गई तो कॉम्पैट 17 जून को कंपनी की अपील खारिज कर देगा। न्यायमूर्ति सुधा मिश्र व न्यायमूर्ति सुधांशु ज्योति मुखोपाध्याय की पीठ ने कहा कि दूसरे पक्ष को सुने बगैर रोक का एकतरफा आदेश जारी नहीं किया जाएगा। पीठ ने याचिका पर बीएआइ को नोटिस जारी करते हुए 12 जून तक जवाब देने को कहा है।

इसी दिन इस याचिका पर सुनवाई भी होगी। सीमेंट कंपनियों पर जुर्माना लगाने वाला वाला सीसीआइ भी अदालत में कैविएटर के तौर पर मौजूद था। कैविएटर का मतलब होता है कि उसका पक्ष सुने बगैर कोई आदेश न पारित किया जाए। अल्ट्राटेक ने सीसीआइ की मौजूदगी का विरोध करते हुए कि यह तो फैसला देने वाली संस्था है। यह पक्षकार कैसे बन सकती है। पीठ का भी यही मानना था लेकिन फिर भी पीठ ने कैविएटर को भी जवाब देने का मौका दिया है।

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