
बुढ़ापा कोई समस्या नहीं है वरन यह तो जीवन यात्रा की एक नैसगिर्क प्रकिर्या है | बुढ़ापें में इंसान की 80% से अधिक समस्याओं का समाधान अपने आप ही हो जाता है | अगर हम यह स्वीकार कर लें की व्रद्धावस्था हमें भगवान् एवं प्रक्रति के द्वारा दिया हुआ गिफ्ट है | बुढ़ापे को मुस्करा कर जीने से म्रत्यु 10-15 वर्ष दूर रहेगी वहीं बुढ़ापे को कोसते हुए एवं रोते हुए गुजारने से मोत समय से 10-15 साल पहिले आ ही जायेगी |मानव की अधिकतम परेशानियाँ और समस्याओं का मुख्य कारण प्रक्रति की उपेक्षा एवं अवेलहना की वजह से होती है | जीवन को सहजता से जीने की कला ही बुढ़ापे को सार्थक बनाने का अचूक मन्त्र है | व्रद्धावस्था आदमी की शारीरिक अवस्था के बजाय आदमी की मानसिकता पर ज्यादा निर्भर करती है | सच्चाई तो यही है कि मन-आत्मा कभी भी बुढी नहीं होती है, इसलिए यह विचार कभी भी अपने मन में नहीं लाये की आप बूढ़े- वृद्ध हो गए हैं | मन में याद रखें कि आप सब कुछ कर सकते हैं |
डा. जे.के. गर्ग, सन्दर्भ—मेरी डायरी के पन्ने, विभिन्न संतों के सत्संग, मेंडी ओकलेंडर आदि |
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