काले कानून की वसुंधरा राजे को जरूरत क्यों पड़ी ?

महेन्द्र सिंह भेरूंदा

महेन्द्र सिंह भेरूंदा

आखिर इस काले कानून की वसुंधरा राजे को जरूरत क्यों पड़ी ? यह बहुत ही महत्वपूर्ण विषय है यह बात तब से प्रारम्भ हुई जब आनन्दपाल एनकाउंटर की जांच और आनन्दपाल की हत्या का मुकदमा दर्ज कर के जांच सीबीआई से करवाने की उठी मगर सरकार अड़ी रही क्योकि इस पूरे प्रकरण में मुख्यमंत्री खुद सीधी इस फर्जी एनकाउंटर से जुड़ी हुई थी मगर सरकार को तब झुकना पड़ा जब आनन्दपाल की हत्या के एक चश्मदीठ गवाह को सांवराद आंदोलन की आड़ में गोली मार कर उसकी शनाख्त को पुलिस छुपाती रही मगर उस लाश से पर्दा उठते ही सरकार बैकफुट पर आ गई और सीबीआई जांच अनुशंसा के आदेश कर दिए मगर समझौते के बाउजूद पुलिस ने हत्या का मुकदमा दर्ज नही किया परन्तु सीबीआई की जांच से मामला शांत पड़ गया था परन्तु पीड़ित परिवार ने पुलिस की मनमानी के विरुद्ध हाईकोर्ट में आनन्दपाल के हत्या वाले मुकदमे को दर्ज करने की अर्जी लगाई और कोर्ट ने सरकार से स्पष्टीकरण मांगा तब सरकार और अधिकारियों के पेट मे अंदर ही अंदर दर्द होने लगा और उपाय ढूंढे जाने लगे इसी समय के दौरान सरकार ने एक कांग्रेस समर्थित अधिकारी के यहां छापा मारा तो अशोक गहलोत ने धमकी दी कि यदि सरकार रंजिश के आधार पर छापे पटकती है तो समय आने पर खुद भी जेल जाने की तैयार रहे ।
इस अध्यादेश का गर्भधारण तो आनन्दपाल की हत्या की सीबीआई जांच का वक्त है और प्रशवकाल गहलोत की धमकी है क्योकि सरकार और उसके अपने अधिकारियों में गहलोत के बयान से स्वप्न में जेल की सलाखें नजर आने लगी और आननफानन में इस काले कानून ने आखिर जन्म ले ही लिया ।
राजस्थान में वसुंधरा को वर्ष 2018 के लिए अपने कार्यकाल में भृष्टाचार की अपनी इमेज को सुधारने की जरूरत थी मगर यह कानून संसोधन सरकार द्वारा भृष्टाचार को पोषित करने के संकेत दे रहा है ।
जबकि सरकार की साख पहले से ही मलाईदार पोस्टों पर पोस्टिंग महंगी किमत पर बेची जाने वाली है इस कदम से अधिकारियों को निश्चिंत होकर जनता को लूटने में सभी व्यवधानो के रास्ते बन्द करने से इस पोस्टिंग उद्योग में काफी उछाल आने की संभावना है ।
इस कदम में मौत तो बेचारी जनता की है जिन सरकारों को जनता अपने हितार्थ चुनती है वह सरकारे जन-हितार्थ न होकर स्व-हितार्थ कार्य करे यह सबसे बड़ा अपराध है मगर क्या करे इस के बारे में कहना भी अब जुर्म हो गया है ।
महेंद्र सिंह भेरून्दा

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