मदारी का खेल

महेन्द्र सिंह भेरूंदा

महेन्द्र सिंह भेरूंदा

मदारी का खेल पूरी रात चला था खेल में जीत और वसूली के लिए मदारी ने अपने पूरे कुनबे को मैदान में झोंक दिया था । खेल काफी मनोरंजक दौर से गुजर रहा था उसके बाउजूद थकावट ने मुझे नींद की तरफ धकेल दिया शुबहा उठकर परिणाम का पता लगाने का प्रयास किया तो पता लगा की खेल रोमांचक दौर से गुजरते हुए अर्धरात्रि के बाद अहमद पटेल ने मदारी को चकमा देकर उसका डमरु हाथ से छीनकर भाग गया और डमरू खोने से चारो और सन्नाटा छा गया मदारी अपने को ठगा सा महसूस करने लगा ।
मुझे भी दुख है कि नींद की वजह से मैं इस नाटक के रोमांचक अंतिम भाग को देख नही पाया ।
परन्तु यह मदारी भी क्यो हर बार अपने नाटक के क्लाइमेक्स को अर्धरात्रि तक खेच कर ले जाता है । पिछली बार बिहार वाले नाटक में भी इसने पूरी रात बिहार की जनता को सोने नही दिया और आज सम्पूर्ण देश की नींद हराम करदी ।
मगर इस बार मदारी को सबक जरूर मिला है कि अपने ही प्रदेश में , अपने ही गांव में और अपने ही मोहल्ले में अति-लालच के कारण खेल के महत्वपूर्ण वाद्धय यन्त्र डमरू से मदारी को हाथ धोना पड़ा और अपने को अजय समझने वाले मदारी ने अपने सभी प्रयास करने के बाउजूद खेल के परिणाम को बदल नही सका तथा अपने को संसार में सबसे बड़ा सफल खिलाड़ी समझने वाले मदारी को आज अपने ही मोहल्ले में अपनी ही नाक कटानी पड़ी है ।
महेंद्र सिंह भेरुन्दा
face book

Print Friendly

Choose your typing language Ajmer Hindi

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may use these HTML tags and attributes: <a href="" title=""> <abbr title=""> <acronym title=""> <b> <blockquote cite=""> <cite> <code> <del datetime=""> <em> <i> <q cite=""> <s> <strike> <strong>