दूसरे दिन भी वक्ताओं ने बांधे रखा लोगों को

साहित्य, राजनीति, स्त्री और कविता पर हुई चर्चा
आज होगा साहित्य के कुंभ का समापन
वेद प्रताप वैदिक होंगे मुख्य आकर्षण
literature festivalअजमेर । बिरला सिटी वाटर पार्क में चल रहे अजमेर लिटरेचर फेस्टिवल के दूसरे दिन विभिन्न क्षे़त्रों से आए विषय विशेषज्ञों ने चर्चा के दौरान लोगों को विषयों से बांधे रखा। फेस्टिवल के दूसरे दिन जाने माने कवि अशोक वाजपेई, लोकप्रिय कथाकार मदुला गर्ग, संतोष भारतीय, अरूणा राॅय, उर्मिलेश, पुरूषोत्तम अग्रवाल और पीके दशोरा छाए रहे। बडी संख्या में आए शहरवासियों ने सभी स़त्रों में भाग लेकर अपनी सहभागिता दर्ज कराई। वक्ताओं से सवाल जवाब के दौर भी रोचक रहे।
प्रथम सत्र
संवेदना नामक इस सत्र में  कवि एवं साहित्यकार अशोक वाजपेईए शायर शीन काफ निज़ाम और आलोक श्रीवास्तव ने साहित्य में संप्रेषण विषय पर चर्चा की। वाजपेई ने  कहा कि साहित्य का सच तब पूरा होता है जब कहने वाला और सुनने वाला दोनों उसमे खुद को मिला दें । अपना सच पहचानने के लिए तैयारी की जरुरत होती है। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा क़ि लेखक  जिस भाषा में सपने देखता है उसी भाषा में लिखे तो ही सम्पूर्णता आ सकती है। श्रीवास्तव ने युवा पीढ़ी में साहित्य और सम्प्रेषण की जरुरत पर जोर दिया। सत्र का समन्वयन रास बिहारी गौड़ ने किया।
तीसरा सत्र
शिक्षक दिवस के मौके पर शिक्षा पद्धति, जूझते सवाल विषय पर शिक्षाविद् पुरूषोत्तम अग्रवाल और राज्य सभा टीवी के प्रधान संपादक उर्मिलेश ने शिक्षा पद्धति और जूझते सवाल पर चर्चा की। अग्रवाल ने उपदेशात्मक शिक्षा पद्धति की आलोचना करते हुए कहा कि नैतिकता और आचरण शिक्षा पद्धति के महत्वपूर्ण पक्ष हैं। विद्यार्थी को चाहिए कि वो शिक्षकों से कक्षा सहित अन्य स्थानों पर भी संवाद कायम रखे। उन्होंने साहित्य को नैतिक शिक्षा का प्रमुख स्त्रोत बताया क्योंकि साहित्य ही मनुष्य को इंसान बनाता है। उर्मिलेश ने साहित्य की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि शिक्षा के वर्तमान स्वरूप ने इंसान को मशीन बना दिया है जिससे वो संवेदनहीन होता जा रहा है। सत्र के समन्वयक सुधीर भार्गव थे।
चौथा सत्र
अच्छे दिनों की राजनीतिए राजनीति के अच्छे दिन विषय पर खोजी पत्रकार संतोष भारतीय ए चिन्तक पी के  दशोरा और आलोक श्रीवास्तव ने शिरकत की । संतोष भारतीय ने कहा ये बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है कि राजनीति अच्छे दिन कभी ला ही नहीं सकती है। उन्होंने देश की विभिन्न सरकारों का उदाहरण देते हुए कहा कि हमेशा इस देश को राजनेताओं ने झूठे सपने दिखाकर छलावे में रखा है। चाहे कांग्रेस का गरीबी मिटाने का नारा रहा हो या वी.पी. सिंह का भ्रष्टाचार मिटाने का नारा, दोनों ही झूठे साबित हुए और अब अच्छे दिन की बात भी बेमानी साबित हो रही है। चिन्तक पी. के. दशोरा ने कहा कि अच्छे दिनों की बात करना ही व्यर्थ है। राजनीति से न कभी अच्छे दिन आये हैं न आयेंगे। असल में जब तक देश के लोग अपने आप में परिवर्तन नहीं लाएंगे तब तक कुछ भी संभव नहीं है। पत्रकार आलोक श्रीवास्तव ने कहा कि अच्छे दिन समाज ही ला सकता है। जब तक भारतीय समाज जातिवाद और गुलामी की मानसिकता से नहीं निकलेगा तब तक अच्छे दिन नहीं आऐंगे। उन्होंने मोदी सरकार का जिक्र करते हुए कहा कि यह सरकार राज राम मोहन राय, महर्षि अरविन्द और गांधी के विचारों से हटकर काम कर रही है। यह हमारा दुर्भाग्य रहा है कि आजादी के बाद की सम्पूर्ण राजनीतिक प्रक्रिया विफल रही और लोगों का उस पर से विश्वास उठ गया। वेद प्रकाश माथुर ने राजनेताओं और पत्रकारों पर खूब चुटकियां लीं। उन्होंने इस ज्वलंत मुद्दे को रोचकता के साथ पेश किया।
पाँचवा सत्र
कविता एक परम्परा विषय पर हुए सत्र में कवि अशोक वाजपेई, शायर शीन काफ निज़ाम और चिन्तक मनोज शर्मा ने कविता की बारीकियों पर बात की। वाजपेई ने भाषा की सरलता पर जोर दिया और कविता मानवीय संवेदनाओं को छोटे शब्दों से बड़े पैमाने पर लोगों के मानसिकता को प्रभावित करती है। तुलसीदास के नारी पक्ष पर लिखी चर्चित पंक्ति को परम्परा न मानते हुए साहित्य की गहनता को समझने का संदेश दिया। शर्मा ने कवितस में नारी जाति के सम्मान के संदर्भ में चर्चा करते हुए कहा कि समाज में नारी का बडा स्थान होना चाहिए। निजाम ने उूर्द और हिंदी कविता की परंपरा को गंगा जमुना तहजीबी बताया।
आखिरी सत्र – मिलिए अपने कथाकार से सत्र गुफत्गूं में लोकप्रिय कथाकार मृदुला गर्ग ने लोगों से सीधी बात की। उन्होंने अपनी कहानी के नायक के मन की व्यथा को खुलकर सामने रखा। उन्होंने कहा कि समाज व्यक्ति से बनता है न कि स्त्री या पुरूष से। अपनी कथा मिलजुल मन का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि गुलामी और आजादी के संक्रमण काल में व्यक्ति दोहरी जिन्दगी जी रहा है। मृदुला ने कहानी की बारीकियों पर चर्चा की। लोगों ने कई अंतरंग सवाल किए जिनका मृदुला ने बेबाक उत्तर दिया। सत्र समन्वयक कुसुम माथुर थीं।
शनिवार को फेस्टिवल के अंतिम दिन समापन से पहले तीन सत्र होंगे। पहला सत्र आभासी दुनिया सुबह दस बजे से  सोशल मीडिया की सामाजिकता विषय पर होगा प्  जिसमें लेखक प्रांजल धरए शिक्षाविद दुर्गा प्रसाद अग्रवाल चर्चा करेंगे । इसी समय दूसरा सत्र सत्यमेव जयते भी शुरू होगा। इस सत्र में पाकिस्तान यात्रा के बाद चर्चा में आए पत्रकार वेद प्रताप वैदिक और टीवी एंकर उर्मिलेश भाग लेंगे। अहिंसक आन्दोलन के नैतिक मूल्य विषय पर साढ़े दस बजे  अरुणा राय और  पुरुषोत्तम अग्रवाल चर्चा करेंगे । फेस्टिवल का समापन सत्र दोपहर साढ़े बारह बजे शुरू होगा । इसमें कथाकार मृदुला गर्ग और अशोक वाजपेई अजमेरवासियों से रूबरू होंगे।
दिलीप पारीक – 9414258895
error: Content is protected !!