बाबा साहब का पुण्य स्मरण : श्रद्वांजलि सभा आयोजित
मदनगंज-किशनगढ़। मार्बल सिटी हास्पिटल में स्व. रतनलालजी पाटनी बाबा साहब की नवम् पुण्यतिथि के अवसर पर श्रद्वांजलि सभा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का प्रारम्भ आर के मार्बल परिवार के वयोवृद्व सदस्य दीपचंद चौधरी ने बाबा साहब को पुष्पांजलि अर्पिम कर उनके व्यक्तित्व की चर्चा करते हुए कहा कि बाबा साहब जैन धर्म के निसमों की ढृढ़तापूर्वक पालन करते थे। वे एक कर्मवीर पुरूष थे। कर्म में उनका प्रगाढ विश्वास था। दानधर्म करने में सदैव अग्रणी रहा करते थे। उन्होने कहा कि बाबा साहब ने छोटी सी पूंजी से व्यवसाय प्रारम्भ किय था तथा वे खंडाच से किशनगढ तक पैदल चलकर कारोबार करते थे। उनकी निष्ठा लगन और समर्पण के भाव से जो बीज लगाया था आज वह वट वृक्ष हो गया है वे समाज और परिवार के मार्गदर्शक थे। उन्होने कहा कि बाबा साहब सभी की खुले दिल से सहायता करते थे किसी को निराश नहीं करते थे।
देव दर्शन के प्रेरक रहे बाबा-आर के मार्बल्स के युवा सदस्य विनित पाटनी ने अपने बाल्यकाल में बाबा साहब के साथ बिताये गये दिनों का स्मरण करते हुए कहा कि वे हमेशा देव दर्शन करने के लिये प्रेरित करते थे और रात्रि भोजन का सदैव विरोध करते थे। उन्होने एक घटना का जिक्र करते हये कहा कि जब वे 95 वर्ष की आयु के थे तब भी वे अपने हाथ में दूध की बाल्टी लेकर महाराज साहब जहां विराजते थे प्रतिदिन जाया करते थे। उनका व्यक्तित्व एक महामानव की तरह का था जिनकी प्रेरणा और आर्शीवाद से हमारा परिवार उनके बताये गये मार्ग पर अग्रसर हो रहा है।
निष्ठावान समर्पित व्यक्तिव-भारत विकास परिषद की ओर से श्रद्वांजलि देते हुए रामप्रसाद शर्मा ने क हा कि बाबा साहब का व्यक्तित्व असाधारण था वे एक निष्ठावान समर्पित व्यक्तिव के धनी थे। उन्होने अपने परिवार सहित समाज और अपने जन्म स्थान के साथ ही अपनी कर्मभूमि के लिये बहुत ही कार्य किया है। उनकी कर्मशीलता के दर्शन हमें आर के मार्बल समूह में परिलक्षित हाती है। उन्होने कहा कि बाबा साहब ने आज की तरह किसी विश्वविद्यालय की डिग्री तो प्राप्त नहीं की किन्त उनकी दूरदृष्टि उनका अनुभव इन सबसे बहुत ऊपर है। उनके मार्गदर्शन में समाज ने बहुत उन्नति की है।
कर्मयोगी तपस्वी गृहस्थ थे बाबा-महावीर कोठारी ने इस अवसर पर उपस्थितजनों को धन्यावाद देते हुये बाबा साहब के अनुभवों और उनके व्यक्तित्व के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला। उन्होने कहा कि उनका मानना था कि धन को छोडने से ही लाभ प्राप्त होता है कहने का अभिप्राय यह है कि बाबा साहब किसी भी प्रकार की मोह माया से बंधे नहीं रहे वे एक कर्मयोगी तपस्वी गृहस्थ थे। उन्होने कहा कि उनकी धर्म के प्रति ढृढ़ता के सभी कायल थे उनका विश्वास सभी को साथ लेकर चलने का था। वे इतने दयालु थे कि किसी का कष्ट उनसे देखा नहीं जाता था और वे उसकी तत्काल सहायता कर उनके कष्ट को दूर करने का प्रयत्न करते थे।
मार्बल सिटी हास्पिटल के निदेशक प्रदीप पापडीवाल ने कार्यक्रम का संचालन करते हुये अपनी भावान्जलि देते हुये कहा कि बाबा साहब का व्यक्तित्व बहुत ही उदात्त था वे समाज में उच्चस्तरीय आचरण के कारण सम्माननीय थे। वे इतने विशाल औद्योगिक घराने के मुखिया थे किन्तु अंहकार उनसे कोसों दूर था। कार्यक्रम में सज्जन कटारिया, पदम कोठारी, सुधीर जैन, ओमप्रकाश मैनावत, नीरज अजमेरा, भारत विकास परिषद के श्यामसुन्दर दरगड, विजय शर्मा, जिनेश जैन, मुकुट बिहारी मालपानी, जुगल राठी, लाल चंद पाटनी, विनोद दीक्षित, रामवतार अग्रवाल, अनिल अग्रवाल, सुनील व्यास, सहित मार्बल सिटी हास्पिटल परिवार के सदस्य उपस्थित थे।
-राजकुमार शर्मा