रैंप पर भी गूंजेंगी गधों की ढेंचू-ढेंचू

1 अक्टूबर से शुरू होगा खलखाणी माता का गधा मेला, एशिया के एकमात्र गधे
मेले में हर नस्ल के गधे-घोड़े होंगे उपलब्ध, सबसे ज्यादा गधे लाना वाला
गधापालक करेगा उद्घाटन
gadharbh mela photoजयपुर। धोरों की धरती राजस्थान की राजधानी जयपुर के निकट स्थित गांव
भावगढ़ बंध्या में लगने वाले खलखाणी माता के गधे मेले की अपनी अनूठी ही
विशेषता है। गदर्भ मेला अथवा गधा मेला के नाम से पहचाना जाने वाला यह
मेला देश ही नहीं, बल्कि एशिया में भी लगने वाला पहला ऐसा मेला है, जो
केवल गधों के लिए ही आयोजित किया जाता है।
सोमवार को प्रेस क्लब में आयोजित पत्रकार वार्ता में समिति अध्यक्ष
भगवत सिंह राजावत और प्रवक्ता अमित बैजनाथ गर्ग ने बताया कि जयपुर नगर
निगम, अखिल भारतीय गदर्भ मेला विकास समिति और खलखाणी माता मानव सेवा
संस्थान के सामूहिक सहयोग से प्रतिवर्ष आयोजित किए जाने वाले इस ऐतिहासिक
मेले का आगाज इस बार 1 अक्टूबर को सुबह 11 बजे मेला स्थल, भावगढ़ बंध्या
में होगा, 2 अक्टूबर को शाम 5 बजे से रात्रि 8 बजे तक पर्यटन विभाग की ओर
से सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होगा, वहीं 3 अक्टूबर को शाम 7 बजे
रावण दहन के साथ समापन होगा। मेले में सबसे ज्यादा गधे लाना वाला गधापालक
इसका उद्घाटन करेगा। मेले में दूर-दराज के गांवों सहित प्रदेशभर से लोग
भाग लेने के लिए आते हैं। कार्यक्रम के समापन पर समापन समारोह, रावण दहन
और पारितोषिक वितरण कार्यक्रम होगा। इसके तहत श्रेष्ठ नस्ल के पशु लाने
वाले, सर्वाधिक पशु लाने वाले और विभिन्न प्रतियोगिताओं में विजयी रहे
पशुओं के पशुपालकों को पुरस्कृत किया जाएगा।
रैंप पर गधे-घोड़ों की कैटवॉक
मेले के तहत सांस्कृतिक प्रस्तुतियां होंगी, जिसमें पर्यटन विभाग की ओर
से भी कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। मेले का खास आकर्षण गधों और घोड़ों की
सौंदर्य प्रतियोगिता (फैशन शो) रहेगी, जिसमें फैंसी परिधानों में सजे
गधे-घोड़े रैंप पर कैटवॉक करते नजर आएंगे। इसके अलावा गधा दौड़, घुड़ दौड़ और
घोड़ियों की नृत्य प्रतियोगिता सहित कई विभिन्न रंगारंग कार्यक्रम भी
आयोजित होंगे। इनमें पशुपालकों के संग प्रदेश के अन्य स्थानों के
कलाकारों के साथ स्थानीय कलाकार भी भाग लेंगे।
हाट बाजार में सजेंगे कई उत्पाद
मेले में इस बार करीब पांच सौ गधों और दो हजार से अधिक घोड़ों के आने की
संभावना है। मेले के दौरान हाट बाजार भी लगेगा, जिसमें करीब बीस से भी
अधिक स्टॉल्स सजाई जाएंगी। स्टॉल्स पर जहां गधों और घोड़ों से संबंधित
विभिन्न उत्पाद प्रदर्शित होंगे, वहीं महिलाओं और बच्चों के रोजमर्रा में
काम आने वाले तथा सजावटी उत्पाद भी प्रदर्शित होंगे। यह एशिया का एकमात्र
ऐसा मेला है, जिसमें केवल गधों, घोड़ों व खच्चरों का ही व्यापार होता है।
इस मेले का आकर्षण का मुख्य केंद्र गधा ही होता है। इसी कारण मेले में
सबसे दिलचस्प मेले का उद्घाटन व समापन समारोह होगा।
नहीं आते नेता-अधिकारी
मेले के उद्घाटन समारोह में बतौर अतिथि शिरकत करने के लिए कोई भी मंत्री,
विधायक या अधिकारी सहजता से तैयार नहीं होते हैं। ऐसा माना जाता है कि जो
नेता मेले के उद्घाटन समारोह में शामिल होता है, वह दोबारा चुनाव नहीं
जीत पाता है। मेले के इतिहास को लेकर इतिहासकारों का भी कहना है कि इस
मेले का जिक्र पौराणिक काल में होता है। माना जाता है कि यह मेला करीब
पांच सौ वषोZ से भी अधिक समय से लगातार आयोजित हो रहा है।

अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें :
भगवत सिंह राजावत, अध्यक्ष
अखिल भारतीय गदर्भ मेला विकास समिति
मो.: 9460144382, 8384947481

अमित बैजनाथ गर्ग, प्रवक्ता
अखिल भारतीय गदर्भ मेला विकास समिति
मो.: 9680871446, 7877070861
ई-मेल: [email protected]
[email protected]

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