मार्बल क्षेत्र में स्वच्छता अभियान का प्रथम चरण सफलतापूर्ण सम्पन्न

अभियान रहेगा अनवरत जारी, पूरे क्षेत्र की होगी सफाई
1मदनगंज-किशनगढ़। किशनगढ मार्बल एसोसियेशन द्वारा गत माह 13 अक्टूम्बर को शुरू किया गया स्वछता अभियान का प्रथम चरण गुरूवार को सफलतापूर्ण पूरा कर लिया गया इस दौरान मार्बल मंडी, लिंक रोड, तृतीय चरण की व्यापक सफाई करने के साथ ही लिंक रोड पर रंग रोशन का कार्य भी किया गया। गौरतलब है कि लिंक रोड ही शहर से मार्बल क्षेत्र में जाने का प्रमुख मार्ग है जिसकी सफाई व रंग रोशन का काम हो जाने से बाहर से आने वाले व्यापारियों को किशनगढ शहर में प्रवेश करना भी बेहतर लगेगा। इस अभियान को प्रमुखता से आगे बढाने वाले किशनगढ मार्बल एसोसियेशन के अध्यक्ष सुरेश टांक ने बताया कि हमारे देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सोच स्वच्छ भारत स्वस्थ्य भारत की परिकल्पना को साकार करने के लिये ही किशनगढ मार्बल एसोसियेशन द्वारा पूरे औद्योगिक क्षेत्र में स्वछता अभियान शुरू किया गया है जो अनवरत जारी रहेगा जब तक कि पूरा औद्योगिक क्षेत्र साफ सुथरा नहीं हो जाता। गुरूवार को सफाई अभियान के दौरान अध्यक्ष सुरेश टांक, उपाध्यक्ष रमेश चांडक, कोषाध्यक्ष विनोद बांगड, प्रकाश जाजू, गोविन्द सिंह राठोड, आशीष अग्रवाल, अखिलेश मालपानी, रवि छाबडा, सम्पराय शर्मा आदि उपस्थित थे।

वन में बसंत, टाऊन में संत, मन में भगवन्त तो क्यो नही होगा भव का अंत
़मदनगंज-किशनगढ़। वात्सय वारिधि आचार्य वर्धमान सागर महाराज ससंघ सा्िन्नध्य में जैन भवन अनेक धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। प्रात: 7 बजे श्रीजी का अभिषेक, शांतिधारा, नित्य नियम पूजन किया गया । वन में बसंत, टाऊन में संत, मन में भगवन्त तो क्यो नही होगा भव का अंत। उक्त उदगार मुनि अपूर्व सागर महाराज ने धर्म सभा के दौरान कहे। उन्होनें धर्मसभा में कहा कि मन में भगवान विराजमान होने पर भव पार हो जाता है। मंदिर में भगवान को देखते हुए स्वयं के अंदर के भगवान को देखना जीवन का लक्ष्य होना चाहिए। अपना स्वयं का सही पता तो अपनी आत्मा है। घर में तो सुख ओर बार दुख होता है। उन्होनें कहा कि ज्ञान जल से पतला भूमि से भारी, क्रोध अग्रि से तेज और कलंक काजल से काला होता है। वैचारिक क्रांति के बिना परिवर्तन नहीं आएगा। इसलिए सकारात्मक सोच को अपनाते हुए जीवन को सुखमय बनाना चाहिए। आर्यिका प्रशांतमति माताजी ने कहा कि जीवन में कोई सत्रू और आत्मा का कोई रिस्ता नहीं होता है। शरीर पर्याय में समय मूल्यवान है। आत्म कयाण के लिए लगाया गया समय मेरा है। अश्रव के कारण संसार है। पाप कर्मो का अश्रव नही होना चाहिए। कषायों का समन व इन्द्रियों का दमन करना चाहिए। सम्यक दृष्टि जीवों की आशक्ति एवं साधुओं की आवश्यकता छुट जाती है। मन, वचन, काय से कर्माे का आना रूकता है। आत्म सम्पति कभी नष्ट नहीं होती है। हमें देव शास्त्र गुरू के सान्निध्य में मन वचन काय का विरोध करना चाहिए। दोपहर में आचार्यश्री ससंघ ने सामयिक, स्वाध्याय, प्रतिक्रमण किया गया। सायं आचार्यश्री की आरती एवं गुरूवंदना की गई। इस अवसर पर अनेक श्रावक श्राविकाएं उपस्थित थे।
-राजकुमार शर्मा

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