निष्पक्ष नही हो रहा अनुसंधान

माननीय न्यायालय के आदेषों की पुलिस कर रही है अवहेलना

sonu goyal14 जुलाई। कांग्रेस नेता सोनू गोयल हत्याकाण्ड प्रकरण में माननीय न्यायालय के आदेष की अनुपालना पुलिस द्वारा नहीं किए जाने पर आईजी पुलिस रेंज कोटा को 15 जुलाई को न्यायालय अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्टेªट, शाहबाद श्री अजय शर्मा ने तलब किए जाने हेतु नोटिस जारी किया है।
कांग्रेस जिलाध्यक्ष पानाचंद मेघवाल ने जानकारी देते हुए बताया कि गत 26 जून को घटित बहुचर्चित सोनू गोयल हत्याकाण्ड में दिवंगत सोनू गोयल के बड़े भाई फरियादी रामावतार गोयल द्वारा एसीजेएम, शाहबाद में जिला पुलिस अधीक्षक बारां तथा कस्बाथाना पुलिस पर प्रकरण में नामजद आरोपियों को पक्षपात करते हुए व राज्य सरकार के दबाव में उन्हें गिरफ्तार करने के बजाय बचाए जाने को लेकर निष्पक्ष जांच हेतु एक प्रार्थना पत्र पेष किया था, जिस पर माननीय न्यायालय द्वारा अपने आदेश 06.07.2016 में अनुसंधान अधिकारी पुलिस कस्बाथाना तथा जिला पुलिस अधीक्षक बारां की भूमिका को संदेहास्पद मानकर स्पष्ट तौर पर प्रकरण का अनुसंधान पक्षपातपूर्ण एवं विधि के प्रावधानों का खुला उल्लघंन बताकर प्रकरण का अग्रिम अनुसंधान सीआईडी, सीबी से करवाए जाने हेतु पुलिस महानिरीक्षक, जयपुर को निर्देषित किया था।
मेघवाल ने बताया कि इस आदेष के 6 दिन बाद तक भी पुलिस द्वारा अनुसंधान सीआईडी, सीबी को नहीं सौंपा गया। फरियादी रामावतार गोयल द्वारा माननीय न्यायालय के आदेष की अवज्ञा किए जाने का एक प्रार्थना पत्र 12 जुलाई 2016 को पुनः न्यायालय शाहबाद में पेष किया गया, जिस पर माननीय न्यायालय द्वारा थानाधिकारी पुलिस थाना कस्बाथाना को सुनवाई हेतु 13 जुलाई को तलब किया। इस पर थानाधिकारी कस्बाथाना द्वारा जवाब में पत्र क्रमांकः रा-9(1)अप/अन्वे/बारां/16/431-33 दिनांक 12 जुलाई 2016 अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, सीआईडी, सीबी राजस्थान जयपुर श्री दिनेष अग्रवाल का प्रस्तुत किया जिसमें अग्रिम अनुसंधान अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (अपराध एवं सतर्कता) महानिरीक्षक कोटा रेंज, कोटा कार्यालय से करवाने का हवाला दिया।
मेघवाल ने बताया कि इस पर माननीय न्यायालय द्वारा तल्ख टिप्पणी करते हुए यह जाहिर किया कि न्यायालय के स्पष्ट आदेष के बावजूद भी इस प्रकरण का अनुसंधान कस्बाथाना पुलिस द्वारा जारी है, इससे ऐसा प्रतीत होता है कि न्यायालय के आदेष की पालना निष्चित रूप से नहीं की जा रही है और न ही उक्त अधिकारियों द्वारा अनुसंधान अधिकारी को निर्देष दिए जा रहे है। अतः मामला न्यायालय अवक्षा का स्पष्ट प्रतीत हो रहा है। थानाधिकारी द्वारा प्रस्तुत पत्र से तो अनुसंधान ही किसी अन्य विभाग से करवाए जाने के आदेष दिए गए है जो उनके क्षेत्राधिकार में नहीं है।
इस पर जवाब प्रस्तुत करने हेतु माननीय न्यायालय ने आईजी पुलिस रेंज कोटा को न्यायालय में 15 जुलाई 2016 को स्वयं उपस्थित होने के लिए पाबंद किया है।
मेघवाल ने कहा कि पुलिस द्वारा इस जघन्य हत्याकाण्ड में शामिल नामजद अपराधियों को बचाने को लेकर माननीय न्यायालय के आदेषों की भी अवज्ञा की जा रही है। पुलिस राजनैतिक दबाव के कारण नामजद अपराधियों को बचाने का प्रयास कर रही है। इससे यह स्पष्ट होता है कि भाजपा सरकार के मुखियाओं में ना कोई मानवीय दृष्टिकोण है और ना ही न्यायिक सोच है। इसकी हम कटु शब्दों में निंदा करते है। हमें माननीय न्यायालय पर पूर्ण भरोसा है।

संलग्न:- माननीय न्यायालय अतिरिक्त मुख्य न्यायिक
मजिस्टेªट शाहबाद के आदेष 13.07.2017 एवं अन्य
दस्तावेजों की प्रतियां।
फ़िरोज़ खान बारां राजस्थान

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