बारिश नहीं होने से किसानों के चेहरे पर छाई मायुसी

falsund newsगोपालसिंह रावतपुरा
अजमेरनामा फलसूण्ड क्षेत्र में पिछले साल भी अकाल की स्थिति थी। किसानों को इस वर्ष भी अकाल का सामना करना पड़ सकता है। किसानों ने अगस्त माह के शुरुआती दिनों से बारिश होने पर खरीफ की फसल की बुवाई तो कर दी लेकिन बुवाई के बाद एक माह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी बारिश नहीं होने पर किसानों को अकाल की चिंता सता रही हैं। किसानों ने बताया कि क्षेत्र में बारिश नहीं होने खरीफ की फसल जलने लगी है।

चारे का हो सकता है मुख्य संकट : क्षेत्र में बरसात नहीं होने पर चारा मुख्य संकट बन सकता है। पिछले वर्ष भी क्षेत्र में फसल नहीं होने पर किसान चारा गुजरात, हरियाणा सहित बाहर के राज्यों से 15 रूपये किलो में खरीद रहे थें। वहीं इसी वर्ष भी अकाल की स्थिति होने के कारण पशुओं के लिए चारे का संकट खड़ा हो सकता है। इस क्षेत्र में अधिकांश किसानों के पास में पशु है। इस बार अच्छी पैदावार नहीं होती है तो किसानों के सामने चारे की समस्या खड़ी हो सकती है।

बुवाई को एक माह से अधिक समय बीता : उपखंडक्षेत्र में किसानों ने बुवाई अगस्त माह के शुरुआत दिनों में थी, जो एक माह बीत चुका है। इस एक माह में एक बार भी बारिश नहीं होने के कारण अधिकांश क्षेत्र में आधी से ज्यादा फसल जल चुकी है। किसानों ने बताया कि चार- पांच दिनों से अगर बारिश नहीं हुई तो क्षेत्र में पूरी फसल जल जाएगी।

पिछलेवर्ष भी किसानों ने किया था अकाल का सामना : फलसूण्ड़ं क्षेत्र के किसानों को पिछले साल भी अकाल का सामना करना पड़ा था।

वहीं इस वर्ष जुलाई माह में अत्याधिक बारिश हो गई थी, जिस पर किसानों ने फसल बोई तो दूसरी बरसात हुई ही नहीं थी तो किसानों को अकाल का सामना करना पड़ा था।

किसानों की आर्थिक स्थिति खराब : किसानोंने खरीफ की फसल बुवाई एवं खरपतवार पर हजारों रूपये खर्च कर दिए। किसानो ने शुरूआत में खेतों की निराई गुड़ाई, बीज, बिजाई खरपतवार पर हजारों रूपये खर्च हुए हैं। ऐसे में बारिश नहीं हुई तो किसानों की आर्थिक स्थिति खराब हो जाएगी।

यह फसल बोई हुई है

शुरुआतमें बारिश समय पर नहीं हुई थी। जिसके कारण किसानों ने बाजरा, ग्वार, मोठ, मूंग, तिल सहित फसलों की बड़ी मात्रा में बुवाई कर दी। अब यह फसल बारिश के इंतजार में जल रही है। जिस प्रकार से फसलें उगी थी तो किसानों के चेहरे पर खुशी नजर आ रही थी पर अब बारिश नहीं होने से फसलें जल कर नष्ट हो रही है जिससे किसानों के चेहरे पर मायूसी छाई हुई है

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