जयपुर/अजमेर, 4 मार्च। पंचायती राज मंत्राी श्री राजेंद्र राठौड़ और महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री श्री मंत्राी अनिता भदेल ने आव्हान करते हुए कहा कि प्रदेश में महिला सशक्तिकरण सही मायने में मजबूत तब ही होगा जब समाज और खास तौर पर पुरुषों की मानसिकता में परिवर्तन आए। उन्होंने कहा कि समाज और राष्ट्र में परिवर्तन की शुरुआत हमें अपने घर से ही करनी होगी।
शनिवार को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के दो दिवसीय समारोह में बोलते हुए श्री राजेन्द्र राठौड़ ने कहा कि राज्य दिनोंदिन महिला सशक्तिकरण और लिंगानुपात सुधार के मामले में नए आयाम गढ़ता जा रहा है। उन्होंने कहा कि शिशु लिंगानुपात में सुधार के लिए सभी विभाग मिलजुल कर राज्य में काम कर रहे हैं, जिसकी वजह से लिंगानुपात में जबरदस्त सुधार हुआ है। जहां प्रदेष में 2011 में लिंगानुपात 888 था, वहीं यह अब बढ़कर 939 हो गया है, जो कि बेहद उत्साह बढ़ाने वाला होगा। उन्होंने ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ‘ योजना में बेहतरीन काम के लिए राजस्थान राज्य को भारत सरकार द्वारा ‘नारी शक्ति’ पुरस्कार से सम्मानित किए जाने के लिए भी महिला एवं बाल विकास विभाग को बधाई दी।
महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्राी श्रीमती अनिता भदेल ने कहा कि देश में परिवर्तन लाने के लिए सबसे पहले परिवार और समाज में महिलाओं को सशक्त करना होगा। उन्होंने कहा कि आज इस सेमीनार के आयोजन का उद्देश्य यही था कि जनप्रतिनिधि, सरकारी विभागों और आमजन में एक समन्वय स्थापित हो ताकि योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक महिलाओं तक पहुंच सके।
श्रीमती भदेल ने कहा कि प्रदेष में जिस तरह 28 हजार 100 स्वयं सहायता समूहों को 146 करोड़ रुपए के ऋण देकर महिलाओं को आत्मनिर्भर और स्वावलंबी बनाने की कोशिश की है, वह बेहतरीन प्रयास है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक बेटी के जन्म पर बधाई संदेश देना हो, राजश्री योजना का आगाज करना हो या फिर भामाशाह योजना के तहत महिलाओं को पहचान दिलाना हो सरकार ने हर स्तर पर महिलाओं को पहचान दिलाने का काम किया है।
कंेद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की संयुक्त सचिव श्रीमती रश्मि सक्सेना साहनी ने कहा कि ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ‘ के नारे को समाज के हर तबके को आत्मसात करना होगा। उन्होंने कहा कि भारत सरकार और राज्य सरकार की कई योजनाएं महिलाओं के स्वावलंबन के लिए बनी हैं, उन्हें इन्हें ज्यादा से ज्यादा लाभ उठाना चाहिए। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने महिलाओं के लिए महिला ई हाट के नाम से वेबसाइट शुरू की है, जिसमें 22 राज्यों के दो हजार से ज्यादा उत्पाद प्रदर्शित हो गए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य की महिला उद्यमी इस वेबसाइट पर अपने उत्पाद प्रदर्शित कर मुनाफा कमा सकती हैं।
इस अवसर पर महिला एवं बाल विकास विभाग के शासन सचिव श्री कुलदीप रांका ने विभाग द्वारा प्रदेश में चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं के बारे में विस्तृत जानकारी दी। समेकित बाल विकास सेवाएं के निदेशक श्री समित शर्मा ने सुभद्रा कुमारी चैहान की कविता को कोट करते हुए कहा कि समाज को नारी के सम्मान, अधिकार और सशक्तिकरण में भागीदार बनना होगा।
कार्यक्रम में चार सत्रा भी आयोजित किए गए, जिसमें विशेषज्ञों ने आपसी संवाद और प्रश्न-जवाब शैली में चर्चा की। पहले सत्रा में राजस्थान में महिला सशक्तिकरणः पहल एवं उपलब्धियां‘ में विधायक श्रीमती मंजू वाघमार ने शिरकत की, तो दूसरे सत्रा ‘लिंग समानता एवं बालिकाओं एवं महिलाओं की सुरक्षाः पहल एवं उपलब्धियां‘ में विधायक श्रीमती अल्का गुर्जर ने अपने विचार रखे। तीसरा सत्रा ‘किशोरी बालिकाओं का सषक्तिकरणः शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं आत्मरक्षा‘ और ‘महिलाओं का आर्थिक सशक्तिकरणः पहल एवं उपलब्धियां’ के विषय पर भी विशेषज्ञों ने अपनी बात रखी।
इस अवसर पर अतिरक्त मुख्य सचिव सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग श्री अशोक जैन, बाल अधिकारिता आयुक्त श्री एनएल मीना, निदेशक सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग श्री, रवि जैन, एडीजी श्री भूपेन्द्र सिंह आदि ने अपने-अपने विभागों की महिलाओं से जुुड़ी योजनाओं के बारे में जानकारी दी। राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के सदस्य सचिव श्री एस के जैन ने बताया कि प्राधिकरण के द्वारा फ्री लीगल एड के तहत महिलाओं के लिए निशुल्क विधिक सहायता उपलब्ध करवाई जाती है। उन्होंने सरकार से आव्हान किया कि महिलाओं से संबंधित प्रकरणों के शीघ्र निपटान के लिए महिला मजिस्टेªट न्यायालय खोले जाएं।
इस अवसर पर महिला विधायक, जिला प्रमुख, उप जिला प्रमुख, नगर पालिका अध्यक्ष, प्रधान, उप प्रधान, जिला परिषद सदस्य सहित अनेक महिलाओं और छात्राआंे ने भाग लिया।