अजमेर को बहुत कुछ और देने की इच्छा अधूरी रह गई

भाजपा व संघ के वरिष्ठतम नेता स्वर्गीय श्री धर्मेश जैन ने अजमेर को बहुत कुछ दिया और जीवन के अंतिम पडाव पर भी अजमेर के लिए कुछ करना चाहते थे। वे एक अनूठे व्यक्तित्व थे। अपनी कर्म भूमि के लिए सतत चिंतनशील। हर बदइंतजामी और लापरवाही से उनका दिल कराह उठता था। ज्वलंत विषयों पर खुल कर बोलते रहे। अजमेर हित के लिए कई बार पार्टी लाइन को भी नजरअंदाज किया। अजमेर को इसका ऐतिहासिक गौरव दिलाने की टीस कई बार उजागर की। नगर सुधार न्यास के अध्यक्ष के नाते उनके योगदान को सदैव याद किया जाता रहेगा। अगर उन्हें अजमेर रत्न की उपाधि दी जाए, तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी।
फर्जी सीडी कांड के चलते नगर सुधार न्यास का अध्यक्षीय कार्यकाल पूरा न कर पाने का उन्हें गहरा मलाल था। वे चाहते थे कि उन्हें अगर एक मौका और दिया जाए तो अपने अधूरे सपने पूरे कर सकेंगे। आखिरी चंद सालों में प्रयास था कि पुत्र श्री अमित जैन को एडीए अध्यक्ष बनवा कर उसके जरिए अजमेर में और विकास कार्य करवाए जाएं। इसके लिए उन्होंने पूरी जुगत कर ली थी, मगर नियुक्ति में लगातार विलम्ब होता गया। फिर अस्वस्थ हो गए तो सार्वजनिक जीवन में सक्रियता कम हो गई। अंततः प्रकृति ने उनको हमसे हठात छीन लिया। और कई सपने दिल में ही लिए अलविदा कह गए।

काश तब धर्मेश जैन की हुंकार सुन ली गई होती
अजमेर के प्रति उनका गहरा दर्द था। अजमेर में बाढ़ के जो हालात उत्पन्न हुए, उस पर वे बहुत व्यथित थे। स्वर्गीय श्री जैन चिल्ला-चिल्ला कर थक गए। औरों ने भी खूब हल्ला किया। मगर सुनने वाला कोई नहीं था। यहां तक कि उनकी ही पार्टी के नेताओं ने चुप्पी साध रखी थी। एलिवेटेड रोड को मार्टिंडल ब्रिज से जोडने और उसे नसियां तक न उतारने की मांग भी हवा में उडा दी गई। आंदोलन भी किया, मगर किसी के कान पर जूं तक नहीं रेंगी। स्वर्गीय श्री जैन अनेक बार चेताते रहे कि निर्माणाधीन एलिवेटेड रोड की नसियां के पास उतारी जा रही भुजा गलत है। उनका कहना था कि आगरा गेट से नसियां तक का रोड संकडा है। वहां एलिवेटेड रोड की भुजा उतारी गई तो यातायात बहुत अधिक प्रभावित होगा। भुजा की वजह से जो लाभ मिलने की उम्मीद की जा रही है, उसके विपरीत नुकसान होगा। बार बार जाम लगा करेंगे। अव्वल तो इस भुजा की जरूरत ही नहीं है, क्योंकि मात्र तीन सौ मीटर दूर आगरा गेट चौराहा है। एलिवेटेड रोड को आगरा गेट चौराहे पर ही समाप्त किया जा सकता है। वहां काफी खुला स्थान है, जहां से चढने व उतरने में अधिक सुविधा होगी। बावजूद इसके अनावश्यक रूप से संकडे मार्ग पर एक भुजा उतारी जा रही है, जहां से सिर्फ चढा जा सकता है। जिसे एलिवेटेड रोड पर चढना है, वह तीन सौ मीटर दूर आगरा गेट चौराहे से भी चढ सकता है। वे दावे के साथ कहते रहे कि जब यह भुजा बन जाएगी तो लोगों को बहुत अधिक परेषानी होगी। जिला प्रशासन के अधिकारी और स्मार्ट सिटी के इंजीनियर तो अजमेर से चले जाएंगे, लेकिन इस दोषपूर्ण एलिवेटेड रोड की भुजा का खामियाजा अजमेर शहर के लोगों को उठाना पड़ेगा। एक महत्वपूर्ण बात ये है कि आगरा गेट से नसियां तक के मार्ग से धार्मिक व सामाजिक जुलूसों के अतिरिक्त बारात निकलने के दौरान हालत बहुत खराब हो जाएगी।
उन्होने मांग की थी कि स्मार्ट सिटी के कार्यों की सीबीआई जांच कराई जाए। उन्होंने अफसोस जाहिर किया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अजमेर को स्मार्ट सिटी बनाने की महत्वाकांक्षी योजना पर पूरी तरह से पानी फिर गया। उन्होंने कहा था कि आनासागर में अवैध निर्माण होते रहे, मगर जिम्मेदार राजनेताओं व अधिकारियों की लापरवाही के कारण आज यह स्थिति उत्पन्न हुई है। इसके अतिरिक्त भूमाफियाओं को लाभ पहुंचाने के लिए पाथ वे बनाने का निर्णय किया गया और उसके लिए लाखों टन मिट्टी से आनासागर के किनारों को पाट दिया गया। परिणामस्वरूप आनासागर की भराव क्षमता कम हो गई। जैसे ही तेज बारिश आई, आनासागर छलक गया। और करीब पचास कॉलोनियों में पानी भर गया है। जनजीवन ठप हो गया। यह सब राजनेताओं व अधिकारियों के गठजोड के चलते हुआ। अजमेर स्मार्ट सिटी की बजाय नर्क सिटी बन गया। आनासागर के भराव क्षेत्र में बने सेवन वंडर को तोड़ने के लिए एनजीटी की ओर से आदेश दिए जाने पर भी नगर निगम और जिला प्रशासन की ओर से आदेशों की पालना नहीं करने पर उन्होंने गहरा रोश व्यक्त किया था। वे आनासागर की दुर्गति को लेकर लगातार आवाज बुलंद करते रहे हैं, लेकिन प्रशासन ने उस पर कभी गौर नहीं किया। उलटे प्रशासन ने उन्हें परेशान करने तक की कोशिश की, ताकि उनका मुंह बंद किया जा सके। बावजूद इसके जैन जनहित के मुद्दे उठाते रहे, लेकिन पार्टी नेताओं का अपेक्षित सहयोग न मिलने व प्रशासन की हठधर्मिता के चलते अजमेर नर्क भोगने को मजबूर रहा।
सिटी सेंट्रल मॉल की सौगात
उन्होंने अजमेर को विशाल कमर्शियल कॉम्पलैक्स- सिटी सेंट्रल मॉल की सौगात देने की दिशा में महत्वाकांक्षी कदम रखा। कचहरी रोड पर शहर के पहले कमर्शियल कॉम्पलैक्स स्वामी कॉम्पलैक्स के सामने रेलव बिसिट की भूमि पर उसका शिलान्यास 31 जनवरी, 2025 को युग निर्माण योजना, गायत्री तपोभूमि, मथुरा के श्री मृत्युंजय शर्मा के मुख्य आतिथ्य में किया गया। कॉम्पलैक्स के लिए 1800 वर्ग गज भूमि रेलवे से खुली नीलामी में साठ साल की लीज पर ली गई। बेशक यह एक कॉमर्शियल प्रोजेक्ट है, लेकिन महानगरीय संस्कृति की ओर बढ़ रहे स्मार्ट सिटी अजमेर के लिए चार चांद लगाने जैसा है। उनके पुत्र और युवा भाजपा नेता अमित जैन, जो कि इस प्रोजेक्ट के डायरेक्टर हैं, ने बताया कि सिटी सेंट्रल मॉल पहला कॉम्पलैक्स है, जिसका रजिस्ट्रेशन राजस्थान रियल एस्टेट रेग्युलेटिरी ऑथोरिटी (रेरा) से करवाया गया। इसके निर्माणाधीन पांच मंजिला विशाल मॉल में लिफ्ट, एक्सिलेटर सहित सभी अत्याधुनिक सुविधाएं होंगी।
प्रसंगवश बताना उचित होगा कि उन्होंने कोई 48 साल पहले 1974 में देवगढ़ मदारिया से अजमेर आने पर सबसे पहले पृथ्वीराज मार्ग स्थित बिजली के पंखों और सिलाई मशीन का कारोबार शुरू किया। यहां से आरंभ हुआ व्यावसायिक सफर कडी मेहनत और व्यवसायगत चातुर्य के दम पर आज ऐसे मुकाम पर पहुंच चुका हैं, जहां उनका परिवार होटल, कपडा व रियल एस्टेट के क्षेत्र में प्रतिष्ठा अर्जित कर चुका है।
स्काई ग्रिल रेस्टोरेंट का शुभारंभ
कुछ साल पहले स्वर्गीय श्री जैन ने अजमेर को एक लाजवाब सौगात दी थी। उन्होंने शहर के हृदय स्थल गांधी भवन के पास रेलवे परिसर में तालेड़ा बिल्डिंग के सबसे ऊपर आठवीं मंजिल अर्थात रूफ टॉप पर स्काई ग्रिल रेस्टोरेंट का शुभारंभ किया। इसकी लोकेशन वाकई सुप्रीम है, जहां से पूरे शहर का विहंगम दृश्य नजर आता है। पूरा शहर, माने पूरा शहर, 360 डिग्री। यह तो हुई उनकी निजी उपलब्धि, जब वे यूआईटी के अध्यक्ष थे, तब भी सार्वजनिक जीवन में उन्होंने कितनी ही ऐतिहासिक सौगातें अजमेर को दीं। वे वास्तव में स्वप्नदृष्टा थे, जो अजमेर की बहबूदी के लिए अनेक ख्याल अपने जेहन में समेटे हुए थे।

महाराणा प्रताप स्मारक की स्थापना का श्रेय
राजनीति में किए गए काम की क्रेडिट मिले या मिले, कुछ कहा नहीं जा सकता। स्वर्गीय श्री जैन के साथ ऐसा ही हुआ है। उन्होंने पुष्कर घाटी पर नौसर माता मंदिर के पास महाराणा प्रताप स्मारक बनाने का सपना देखा, शिलान्यास करवाया और मूर्ति बनवाने का आदेश भी दिया, मगर कार्यकाल बीच में ही छूट गया। बाद में अजमेर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष शिव शंकर हेडा बने और उनके कार्यकाल में मूर्ति स्थापना हुई। बाद में स्वर्गीय श्री जैन को महाराणा प्रताप स्मारक न्यास का सदर बनाया गया। हालांकि उन्हें उम्मीद तो ये थी कि उन्हें अजमेर विकास प्राधिकरण का अध्यक्ष बनाया जाएगा, क्योंकि उनका पिछला कार्यकाल जिस आरोप की वजह अधूरा छूट गया था, वह झूठा निकला और उनको क्लीन चिट मिल गई। मगर ऐसा हो न सका।

फर्जी सीडी की वजह से कार्यकाल अधूरा रह गया
ज्ञातव्य है कि एक फर्जी सीडी के चक्कर में बिना मामले की पूरी तहकीकात किए तत्कालीन मुख्यमंत्री श्रीमती वसुंधरा राजे ने खुद को साफ सुथरा जताने के लिए उनका इस्तीफा ले लिया और जैन का कार्यकाल पूरा नहीं हो पाया। बाद में कांग्रेस सरकार के दौरान उनका क्लीन चिट भी मिल गई, इस कारण उन्हें उम्मीद थी कि भाजपा सरकार उन्हें फिर मौका देगी, मगर इस बार समीकरण कुछ और थे और शिवशंकर हेडा अजमेर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष बन गए।
जो कुछ भी हो, महाराणा प्रताप की धरती से अजमेर आए इस नेता ने अपने आप को अमर कर लिया है। स्वर्गीय श्री जैन के कार्यकाल में सिंधुपति महाराजा दाहरसेन और वीरांगना झलकारी की प्रतिमा भी स्थापित हुई। उल्लेखनीय है कि नगर सुधार न्यास के अध्यक्ष रहते उन्होंने अनेक विकास कार्य करवाए, जिनमें महाराणा प्रताप स्मारक व सांझी छत प्रमुख हैं। उनके कार्यकाल में ही गौरव पथ बना।

जब मोदी जी ने फोन कर कुशलक्षेम पूछी
अजमेर वासियों के लिए यह अत्यंत ही सुखद बात रही कि देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अजमेर नगर सुधार न्यास के पूर्व अध्यक्ष धर्मेश जैन के पुराने परिचित थे। इसी कारण मोदी ने चला कर उनको फोन किया। यह कोई छोटी मोदी बात नहीं कि मोदी ने फोन करके जैन से कुशलक्षेम पूछी, लॉक डाउन के तहत किए गए इंतजामात का पता किया व अजमेर वासियों के हाल-चाल जाने।

एक निजी इच्छा भी अधूरी ही रह गई
स्वर्गीय श्री जैन की निजी इच्छा भी अधूरी रह गई। वे चाहते थे कि अपनी बायोग्राफी लिखें, जिसमें उनके जीवन भर की यात्रा का विस्तृत विवरण हो। बाकायदा सारे फोटो एलबम भी खंगाले, मगर मगर अत्यधिक श्रमसाध्य होने के कारण वह सपना अधूरा रह गया।

संक्षिप्त जीवन परिचय
आपको बता दें कि स्वर्गीय श्री जैन का जन्म स्वर्गीय श्री मांगीलाल जैन के घर 19 जून 1943 को हुआ। उन्होंने स्नातक तक की शिक्षा अर्जित की। उनका विवाह 1960 में मात्र चौदह साल की उम्र में हुआ। 1962 में अध्यापन षुरू किया। पहली पोस्टिंग कामलीघाट हुई। कांग्रेस सरकार के दौरान तबादले की प्रताडना सहन की। ऐसी जगहों पर पोस्टिंग हुई, जहां साइकिल से भी जाना संभव नहीं था। 1973 में अजमेर आए। यहां बिजली की दुकान खोली। उन्हें एक सफल व्यवसायी के रूप में जाना जाता था। भाजपा में भी विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर रहें। न्यास अध्यक्ष पद रहते हुए पुष्कर घाटी पर सांझी छत और गौरव पथ उनकी प्रमुख उपलब्धियों में शामिल हैं। इसी प्रकार जैन समाज की संस्थाओं में भी अनेक महत्वपूर्ण पदों पर रहे। श्री वर्धमान स्थाकवासी जैन श्रावक संघ के संघपति, होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष, ओसवाल जैन औषधालय के उपाध्यक्ष व इलैक्ट्रॉनिक एसोसिएशन के उपाध्यक्ष थे। वे महावीर इंटरनेशनल के पूर्व अध्यक्ष और इंटरनेशनल गवर्निंग कौंसिल में भी रहे। लायंस चेरिटेबल ट्रस्ट के भी अध्यक्ष रहे।

 

   • #ajmer#elevatedroad/एलिवेटेड रोड की नसियां…      • #ajmer/जानी मानी शख्सियत श्री धर्मेश जैन न…      • काश तब धर्मेश जैन की हुंकार सुन ली गई होती  

Leave a Comment

This site is protected by reCAPTCHA and the Google Privacy Policy and Terms of Service apply.

error: Content is protected !!