निर्यात के मोर्चे पर सरकार की उम्मीदें टूटती जा रही हैं। लगातार पांचवे महीने सितंबर में निर्यात में तेज गिरावट दर्ज की गई है। इसके मुकाबले आयात में हो रही वृद्धि सरकार की चिंताएं बढ़ा रही है। निर्यात और आयात के इस असंतुलन के चलते बीते माह विदेश व्यापार का घाटा 18 अरब डॉलर के खतरनाक स्तर को पार कर गया है। अगली छमाही में हालात नहीं सुधरे तो इसका चालू खाते के घाटे पर गंभीर असर होगा। इससे महंगाई पर रोक लगाने की सरकार की कोशिश को भी पलीता लग सकता है।
सरकार के विदेश व्यापार आंकड़ों के मुताबिक सितंबर, 2012 में देश से केवल 23.6 अरब डॉलर का ही निर्यात हो पाया। यह सितंबर, 2011 के 26.5 अरब डॉलर के मुकाबले 10.78 प्रतिशत कम है। इसके मुकाबले बीते माह आयात 5.09 प्रतिशत बढ़कर 41.7 अरब डॉलर हो गया। इस असंतुलन की वजह से विदेश व्यापार घाटा 18.08 अरब डॉलर तक पहुंच गया है।
चालू वित्त वर्ष 2012-13 की पहली छमाही में अप्रैल को छोड़ दें तो बाकी के पांच महीनों में निर्यात की रफ्तार लगातार घट रही है। निर्यात में सबसे ज्यादा कमी जुलाई में आई थी। वाणिज्य मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक किसी भी महीने में व्यापार घाटा 15 अरब डॉलर से अधिक रहना चालू खाते के घाटे पर दबाव बढ़ा देता है। मौजूदा वित्त वर्ष की पहली छमाही में व्यापार घाटा 90 अरब डॉलर के करीब पहुंच चुका है। इस रफ्तार से तो यह साल खत्म होते-होते पिछले वित्त वर्ष के 180 अरब डॉलर के स्तर तक पहुंच सकता है। बीते वित्त वर्ष में जब व्यापार घाटा इस स्तर पर था तो निर्यात 305 अरब डॉलर तक पहुंचा था। अंतरराष्ट्रीय बाजारों की वर्तमान स्थिति को देखते हुए इस साल 300 अरब डॉलर का निर्यात लक्ष्य पाना भी मुश्किल दिखाई देता है। इसीलिए व्यापार घाटे को लेकर सरकार इस बार बेहद चिंतित है। यदि इसकी रफ्तार यही बनी रही तो सरकार के लिए चालू खाते के घाटे को सकल घरेलू उत्पाद [जीडीपी] के चार प्रतिशत से नीचे रोकना मुश्किल हो जाएगा।
चालू खाते के घाटे की यह स्थिति वित्त मंत्री के लिए राजकोषीय संतुलन बनाने में दिक्कत पैदा करेगी। साथ ही राजकोषीय घाटे में वृद्धि की आशंका बढ़ाएगी। यह घाटा रुपये की कीमत को कम करेगा, जो महंगाई रोकने की सरकार की कोशिशों पर असर डालेगा। वित्त मंत्रालय का मानना है कि अगर राजकोषीय घाटे को जीडीपी के 5.1 फीसद के बजट अनुमान पर रोकना है तो किसी भी सूरत में चालू खाते का घाटा तीन प्रतिशत से ऊपर नहीं जाना चाहिए।
घटता निर्यात:
अप्रैल – 3.3
मई – 4.16
जून – 5.45
जुलाई – 14.80
अगस्त – 9.74
सितंबर – 10.78
[सभी आंकड़े प्रतिशत में]
निर्यात में कमी का असर
– आयात बढ़ा तो विदेश व्यापार घाटे में होगा और इजाफा
– इससे चालू खाते का घाटा बढ़ने की आशंका
– डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत पर दबाव बढ़ेगा
– रुपया कमजोर हुआ तो महंगाई घटने की संभावना कम होगी
– राजकोषीय घाटे को बजट अनुमान पर रोकना होगा मुश्किल
क्या है व्यापार घाटा:
किसी देश से वस्तुओं व सेवाओं का कुल आयात कुल निर्यात की इन्हीं मदों से अधिक होता तो इसे व्यापार घाटा कहा जाता है। अगर व्यापार घाटे के साथ ही देश से पूंजी का हस्तांतरण विदेशी पूंजी की आवक से ज्यादा होता है तो इसे चालू खाते का घाटा कहते हैं।
