’26वां श्रावक संस्कार शिविर शुरू, किशनगढ़ में चहुंओर जैन धर्म की लहर

kishangarhमदनगंज-किशनगढ़। मुनि पुंगव सुधासागर जी महाराज ससंघ के सानिध्य में आयोजित 26वां श्रावक संस्कार शिविर का आज दशलक्षण पर्व के साथ आगाज हो गया। देशभर से 3000 से अधिक शिविरार्थियों के आने से व जिनेन्द्रदेव के अभिषेक व पूजा पाठ के लिए केसरिया धोती दुप्पटें पहने जैन धर्मावलम्बियों से किशनगढ़ शहर तीर्थ नगरी से कम नहीं लग रहा है। वहीं शिविरार्थियों के जैन समाज के घरों में मौन धारण किए आहार लेने के लिए जब श्वेत धोती दुप्पटे पहने आर.के. कम्यूनिटी सेन्टर से निकले तो मानो शहर चहुंओर जैन धर्म के रंग में रंग गया।
शिविरार्थी प्रात: 3.50 बजे मंगलध्वनि (टंकार) के साथ उठने के साथ, प्रात: 4 बजे सामूहिक प्रार्थना हुई। प्रात: 6 बजे अभिषेक एवं सामूहिक संगीतमय पूजन किया। प्रात: 7 बजे तत्वार्थसूत्र वाचना एवं अर्घ समपर्ण किया। मध्यान्ह 1 बजे सामूहिक सामयिक अध्ययन पठन पाठन, मध्यान्ह 2.15 बजे जिज्ञासु प्रश्रोत्तर (मुनिश्री से), मध्यान्ह 3 बजे मुनिश्री द्वारा कक्षा पाठ्यक्रमानुसार, मध्यान्ह 4.30 बजे अल्पाहार एवं सांय 5.30 बजे सामूहिक श्रावक प्रतिक्रमण कार्यक्रम हुआ। सायं 6.15 बजे आचार्य भक्ति व सामूहिक आरती की गई। सांय 7 बजे ग्रुप अनुसार अध्ययन कक्षाएं लगी। साथ ही अन्य कार्यक्रम विधिवत रूप से सम्पन्न हुए।
दुनिया की दृष्टि में भले ही पापी बने रहना किन्तु अपनी दृष्टि में धर्मात्मा बन जाना तो तुम्हारा बेड़ा पार हो जाएगा-सुधासागर महाराज
इससे पूर्व मुनि पुंगव सुधासागर महाराज ने अपने प्रवचन में कहा कि हर व्यक्ति के मन में एक भाव रहता है कि मैं बहुत अच्छा इंसान बनू, मेरी समाज में इज्जत हो, सभी लोग मुझे धर्मात्मा माने भले ही वह धर्मात्मा न हो, किन्तु वह दुनिया की नजर में पापी नहीं बनना चाहता है। मुनि श्री ने कहा कि जितना हम दुनिया की नजरों में इज्जत चाहते है जितना हम दुनिया की दृष्टि में धर्मात्मा बनना चाहते है क्या आप उतनी दृष्टि में अपने आप में धर्मात्मा है ? क्या आपकी अपनी दृष्टि में इतनी इज्जत है ? क्या कभी ये आपने सोचा ? दक्षलक्षण पर्व बस यही नियत दिखाने के लिए आते है कि दुनिया की दृष्टि में भले ही पापी बने रहना किन्तु अपनी दृष्टि में धर्मात्मा बन जाना तो तुम्हारा बेड़ा पार हो जाएगा। मुनिश्री ने कहा कि आज उत्तम क्षमा का धर्म दिन है। उत्तम क्षमा का अर्थ है सहिष्णु हो जाना। तुम इतने सहिष्णु हो जाना इतने सहिष्णु हो जाना कि एक दिन जो निमित तुम्हारा बिगाडने आये वो तुम्हारा होकर रह जाए। 99.9 प्रतिशत लोग ऐसे है कि एक छोटी सी भूल पे सारे घर को सिर पर उठा लेते है। छोटे छोटे निमित्त हमें प्रभावित कर रहे है और हम प्रभावित हो भी रहे है तो ऐसे में हमारी जिंदगी कभी भी ऊंचाई को नहीं छू सकती है। मुनिश्री ने कहा कि मुनियों को नमोस्तु करने से चमत्कार होगा या नहीं मैं नहीं कहता किन्तु अपने दुश्मनों से जय जिनेन्द्र करने से चमत्कार जरूर होगा।
ये रहे श्रावक श्रेष्ठी
श्री दिगम्बर जैन धर्म प्रभावना समिति के मीडिया प्रभारी विकास छाबड़ा के अनुसार शिविर पुण्यार्जक का सौभाग्य चत्तरदेवी पाटनी (किशनगढ़) को मिला। प्रात: अभिषेक एवं शांतिधारा, चित्र अनावरण, दीप प्रज्जवलन, शास्त्र भेंट, पाद प्रक्षालन, सायंकालीन आरती एवं वात्सल्य भोज पुण्यार्जक का सौभाग्य मुकेशकुमार, राकेशकुमार, दिनेशकुमार पाटनी परिवार (जोबनेर वालों) को मिला। द्रव्य पुण्यार्जक का सौभाग्य कमलादेवी, सुभाष, विमल कुमार, ललित कुमार गदिया परिवार को मिला। अल्पाहार पुण्यार्जक का सौभाग्य नेमिचंद, माणकचंद, नरेन्द्रकुमार गंगवाल परिवार को मिला।

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