लघुकथा का भविष्य उज्ज्वल

zबीकानेर 05 अक्टूबर 2017। विद्यादात्री देवी सरस्वती का मंदिर नेहरू शारदा पीठ में चार अक्टूबर की रौशन संध्या साहित्य-विधा लघुकथा के लिए अनन्त शुभेच्छाएं प्रेषित कर गई। पीठ में जुटे देशभर के 60 से अधिक साहित्य-साधकों ने लघुकथा को आकार में छोटी किन्तु भाव और संदेश सम्प्रेषण में वृहदाकार करार दिया। ऐसा तब हुआ जब सृजन-नगरी बीकानेर में 14वें अन्तर्राष्ट्रीय हिन्दी सम्मेलन की यात्रा के तहत द्वितीय लघुकथा सम्मेलन के पहले ही सत्र में डॉ. नीरज दइया एवं राजेन्द्र जोशी द्वारा संपादित पुस्तक आधुनिक लघुकथाएं का लोकार्पण ख्यातनाम लघुकथाकारों के सान्निध्य में हुअा। सम्मेलन का आयोजन मुक्ति, नेहरू शारदा पीठ (पी.जी.) महाविद्यालय एवं सृजनगाथा डॉट कॉम ने नेेहरू शारदा पीठ में किया। समारोहाध्यक्ष महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय के कुलपति भागीरथ बिजारणिया, मुख्य अतिथि बीकानेर (पश्चिम) विधायक डॉ. गोपाल जोशी सहित साहित्यकार डॉ आईदान सिंह भाटी, डॉ. सतीशराज पुष्करणा; देवकिशन राजपुरोहित, सरजीत सिंह ने लघुकथा विधा की विशिष्टताएं बताई व कहा कि संदेश देने वाली रचना की ही अहमियत होती है। सम्मेलन के संयोजक जय प्रकाश मानस ने लघुकथा को साहित्य की केंद्रीय विधा इंगित करते कहा कि आने वाला समय लघुकथा का ही है। डॉ. प्रशान्त बिस्सा, डॉ. अशोक प्रसाद एवं डॉ. शिखा कौशिक ने अपने उद्बोधन में हिन्दी लघुकथा का भविष्य उज्ज्वल बताया। द्वितीय सत्र अंतर्राष्ट्रीय लघुकथा पाठ लक्ष्मीनारायण रंगा की अध्यक्षता में हुआ। महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय के कुल सचिव मनोज शर्मा मुख्य अतिथि तथा डॉ. उमाकांत गुप्त, डॉ. रंजना अरगडे, डॉ सुधाकर अदीब, प्रो. राजेश्वर आनदेव विशिष्ट अतिथी थे। इसमें डॉ.मीनाक्षी जोशी भंडारा, राकेश अचल ग्वालियर, डॉ मंजुला दास दिल्ली, चेतन भारती रायपुर, अशफाक कादरी, रवि पुरोहित, हेमन्त चावडा रायगढ, रूपेश तिवाड़ी, हेमचंद सकलानी, चंद्रशेखर जोशी, गौरीशंकर प्रजापत, राजाराम सर्वणकार, मोहन थानवी, सुधा आचार्य आदि ने भाग लिया। इस अवसर पर सृजनगाथा एवं अतंर्राष्ट्रीय हिन्दी सम्मेलन द्वारा नवनीत पांडे, बुलाकी शर्मा, मधु आचार्य आशावादी, हरीश बी. शर्मा, राजेन्द्र जोशी, मदन सैनी, डॉ. उमाकांत, डॉ. नीरज दइया, डॉ. प्रशान्त बिस्सा, डॉ. रेणुका व्यास, स्नेहलता पांडिया, गौरीशंकर सोनी, कल्पना शर्मा, राजभारती शर्मा, राजकुमारी मारू काे उल्लेखनीय अवदान हेतु स्मृति चिह्न व प्रशस्ति पत्र से सम्मानित किया गया। इसके उपरांत देर रात तक चला अंतिम सत्र संगीत यामिनी का आयोजन होटल राजभोग रिसोर्ट में हुआ। डॉ. मुरारी शर्मा की अध्यक्षता तथा महाविद्यालय के अध्यक्ष पुरूषोतम भादाणी के मुख्य एवं डॉ वत्सला पांडे के विशिष्ट आतिथ्य में संपन्न हुए इस सत्र के अंत में आभार किरण बाला जीनगर ने प्रकट किया।
– मोहन थानवी

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