
गुरदासपुर के उपचुनाव को देश का मिजाज नहीं माना जा सकता । लेकिन किसी भी सरकार के लिए उपचुनाव कुछ संकेत जरूर देते हैं और फिर इस सीट पर तो भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार विनोद खन्ना के निधन के कारण ही चुनाव हुआ था। राजस्थान में भी अजमेर व अलवर मे लोकसभा तथा मांडलगढ़ विधानसभा के लिए जल्द ही उपचुनाव होने वाले हैं । इससे भी बड़ा अवसर गुजरात व हिमाचल प्रदेश के चुनाव हैं । जिस तरह मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे राजस्थान मे उप चुनाव के लिए भागादौड़ी कर रही है । उससे यह तो जाहिर है कि भाजपा को अपनी प्रतिष्ठा बचाए रखने के लिए यह चुनाव जीतने जरूरी हैं, क्योंकि तीनों सीटों पर भाजपा का कब्जा था । अगर कांग्रेस के हाथ एक भी सीट लगी तो अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए मतदाताओं में गलत संदेश जाएगा । क्या भारतीय जनता पार्टी इस हार के बाद कुछ मंथन करेगी या उसकी सोच यही रहेगी कि नोटबंदी और जीएसटी उसके तुरुप के पत्ते थे । महंगाई ,बेरोजगारीं,घटता औद्योगिक उत्पादन जैसे सभी मुद्दे अब लोगों को उद्वेलित करने लगे हैं।
यूं आज ही वित्त मंत्री अरुण जेटली ने ये कहकर कि गुजरात चुनाव के नतीजे तय करेंगे कि नोटबंदी और जीएसटी का लोगों पर क्या असर पडा। इसलिए अभी थोड़ा इंतज़ार करना होगा। लेकिन कभी भाजपा मे रहे नवजोत सिंह सिद्धू ने ये कहकर कि गुरदासपुर मे भाजपा को पडे थप्पड़ की गूंज पूरे देश मे सुनाई देगी,भाजपा के जले पर नमक जरूर छिडका है।
ओम माथुर। 9351415379