अजमेर, 28 मई। शहर में गणेश नगर स्थित टेकरेश्वर धाम में आयोजित श्रीमदभागवत कथा के पांचवे दिन नंद उत्सव मनाया गया। कथावाचक पंडित रविशंकर शास्त्री ने कहा कि जो आनंद दे वो नंद है और जो दूसरों को यश दे वही यशोदा है। प्रतिदिन सूर्योदय से पूर्व भोर में आनंद के साथ कीर्तन करना ही नंद उत्सव है।
शास्त्री ने कहा कि भगवान का नाम कीर्तन करने के लिए विद्वान होना जरूरी नहीं, भाव चाहिए। भगवान विद्वानों को मिले ना मिले मगर भक्त को अवश्य मिलते हैं। उन्होंने माखन चोरी व बाल लीलाएं सुनाते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की लीलाएं आनंद देने वाली है। प्रभु कथा श्रवण करने वाला मनुष्य तनाव मुक्त हो जाता है। जो मनुष्य परमात्मा की पूजा करता है उस भक्त का प्रभु ध्यान रखते हैं। जीवन को आनंदित बनाने के लिए सत्संग करें। जितना आनंद व सुख राधाकृष्ण की सेवा में है उतना किसी और सांसारिक वस्तु में नहीं। सच्चा भक्त बनने के लिए भक्ति को पुष्ट करना होगा। नंदजी के अंगना में बाजे आज बधाई.., छोटे से नंदजी के लाल आज मेरे घर आ गए.. जैसे बधाई गीतों पर भक्त झूम उठे। सुमित सारस्वत ने बताया कि सोमवार को कृष्ण लीलाओं व गिरीराज धरण प्रसंग के मौके पर छप्पन भोग की झांकी सजाई गई। मंगलवार को श्रीकृष्ण-रुकमणी विवाह उत्सव मनाया जाएगा। कथा में फूलचंद प्रजापति, महेश जोशी, ओमप्रकाश जायसवाल, ज्योतिस्वरूप शर्मा, केदार सिंह, सुभाष चौहान, रविंद्र राठौड़, विनोद जैन, अनुराग सिंह, पुष्पा जायसवाल, संगीता प्रजापति, अलका प्रजापति, बीना दाधीच सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।
सुमित सारस्वत
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