बीकानेर, 26 दिसम्बर। स्वामी केशवानन्द राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय के मानव संसाधन विकास निदेशालय में चल रहे नव-नियुक्त सहायक आचार्यों के ओरियेंटेषन प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत बुधवार को ‘भारतीय कृषि वर्तमान परिप्रेक्ष्य, चुनौतियां और अवसर’ विषय पर व्याख्यान आयोजित हुआ।
इस अवसर पर बोलते हुए केन्द्रीय रूक्ष अनुसंधान संस्थान के निदेशक डाॅ. ओ. पी. यादव ने कहा कि नवीनतम कृषि तकनीकों के उपयोग से देश कृषि के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बन पाया है। उन्होंने कहा कि आजादी के समय देश खाद्यान्न की कमी से जूझ रहा था। हमें खाद्यान्न के लिए दूसरे देशों पर निर्भर रहना पड़ता था लेकिन वैज्ञानिकों व किसानों के प्रयास से देश आत्मनिर्भर बन पाया है।
केन्द्रीय रूक्ष अनुसंधान संस्थान केे वरिष्ठ वैज्ञानिक डाॅ. धर्मवीर सिंह ने बदलते जलवायु के प्रभाव पर प्रकाश डालते हुए वैज्ञानिकों को आह वानन किया कि वे अपने अनुसंधान में सूखा सहन करने वाली, अधिक तापमान को सहन करने वाली तकनीकों का विकास करें, जिससे किसानों को लाभ मिल सके।
निदेशक, लेण्ड स्केपिंग डाॅ. सुभाष चन्द्र ने कृषि विश्वविद्यालयों के प्रसार तंत्र पर प्रकाश डालते हुए कृषि विकास में कृषि विज्ञान केन्द्रों की भूमिका को अहम बताया। उन्होंने कहा कि आज कृषि विज्ञान केन्द्रों के माध्यम से नवीनतम कृषि तकनीकी का अंगीकरण बढ़ रहा है, जिससे किसान लाभान्वित हो रहे है।
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