कांग्रेस शिक्षा के साथ राजनीति ना करे: देवनानी

प्रो. वासुदेव देवनानी
अजमेर, 4 सितम्बर। पूर्व शिक्षा राज्य मंत्री वासुदेव देवनानी ने प्रदेश के शिक्षा राज्य मंत्री व उच्च शिक्षा मंत्री द्वारा नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति को बिना चर्चा के लागू करना बताये जाने को उनकी पूर्वाग्रही सोच व नासमझी बताया। देवनानी ने कहा कि कांग्रेस सरकार के शिक्षा मंत्री बिना सोचे समझे केवल केन्द्र सरकार के हर कदम का विरोध करने की आड़ में नई शिक्षा नीति के सम्बंध में इस प्रकार की असत्य व भ्रामक बाते कर राजनीति कर रहे है जो उन्हें शोभा नहीं देती।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने जो नई शिक्षा नीति घोषित की है वह एतिहासिक व अद्वितीय है। इस पर विगत 4-5 वर्षो तक देश के प्रत्येक ब्लाॅकस्तर से लेकर राज्यस्तर तक चर्चा की गई। देश के जनसामान्य से लेकर शिक्षाविदों से लगभग 2.50 लाख से अधिक सुझाव संकलित हुए। राज्य सरकारों ने भी अपने सुझाव भेजे। देवनानी ने कहा कि तत्कालीन राजस्थान सरकार ने भी अपने प्रस्ताव दिये थे परन्तु अब प्रदेश के शिक्षा मंत्रियों द्वारा यह कहना कि बिना चर्चा के शिक्षा नीति बना दी, बेहद हास्यास्पद स्थिति लगती है। जबकि नीति घोषित होते ही वर्तमान शिक्षा राज्य मंत्री ने एक बार इसका समर्थन करते हुए इसमें राज्य सरकार के सुझावों को शामिल करने की बात कही थी। परन्तु अब अपने आलाकमान को खुश करने के लिए आलोचना करना शुरू कर दिया है।
देवनानी ने कहा कि यह नीति देश को ज्ञान के क्षेत्र में विश्व का सिरमोर बनाने वाली है। केवल राजनीति करते हुए इसे दोषपूर्ण व जनहित का नहीं बताना अनुचित है। इस नीति का विरोध वामपंथी, अंग्रेजी परस्त व मैकाले के भक्त ही कर रहे है। देश के शिक्षाविद, चिन्तक, विद्वान तो इसकी सराहना कर रहे है।
देवनानी ने कहा कि इस नीति में मातृभाषा में प्रारम्भिक शिक्षा देने , 6ठीं कक्षा से व्यवसायिक शिक्षा, आंगनबाड़ी को प्राथमिक शिक्षा से जोड़ना, छात्र को किसी भी स्तर पर प्रवेश व निकास का विकल्प देना, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, संकायों के बंधन से मुक्त कर रूचि अनुसार विषय चयन की छूट, स्वायतत्ता देने, अनुसंधान पर जोर देने जैसी बातें उल्लेखनीय हे। इसके साथ ही 1962 से चले आ रहे वादे जिसमें शिक्षा पर जीडीपी का 6 प्रतिशत व्यय करने की बात थी जिसे कांग्रेस द्वारा पूरा नहीं कर पाने की विफलता को पूरा करने का लक्ष्य भी रखा गया है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान शिक्षा नीति जो 21वीं शताब्दी की चुनौतियों का सामना करने में पूर्णतः अक्षम है उसके स्थान पर नई शिक्षा नीति में विद्यार्थी को अतीत से आधुनिकता तक जोड़ने, जड़ से आकाश तक ले जाने तथा इस वैश्विक प्रतियोगी युग में भारत की युवा प्रतिभा को तैयार करने की पूरी रूपरेखा है। वर्तमान में उच्च शिक्षा तक 26.4 प्रतिशत विद्यार्थी ही पहुंच पाते है इसे बढाकर 50 प्रतिशत तक ले जाकर 3.50 करोड नये स्थान उपलब्ध कराये गये है।
मुहं की खानी पड़ी-सुप्रीम कोर्ट द्वारा फटकार :
पूर्व शिक्षा राज्य मंत्री वासुदेव देवनानी ने कहा कि अपने आलाकमान को खुश करने के लिए राज्य सरकार द्वारा नीट व जेईई परीक्षा को लेकर अपनाई गई दोहरी राजनीति को लेकर सुप्रीम कोर्ट में मुहं की खानी पड़ी जब कोर्ट ने परीक्षा रोकने की अर्जी खारिज कर दी। सुप्रीम कोर्ट के निर्णय से लाखों बच्चों का भविष्य बर्बाद होने से बच गया। देवनानी ने कहा कि एक ओर राज्य सरकार अपने स्तर पर सभी परीक्षाएं करवा रही थी जबकि अखिल भारतीय परीक्षाओं का विरोध कर रही थी।
इसी प्रकार यूजीसी के निर्देशों के खिलाफ राज्य सरकार बिना परीक्षा कराये उत्तीर्ण करने को लेकर भी न्यायालय गई। इस मामले में भी न्यायालय ने शिक्षा की गुणवत्ता बनाये रखने हेतु इस अपील को भी रद्द कर दिया।
देवनानी ने कहा कि इस प्रकार राज्य सरकार द्वारा शिक्षा की गुणवत्ता के प्रति गंभीरता ना बरतते हुए युवा पीढ़ी के भविष्य के साथ खिलवाड़ के किये गये प्रयासों से न्यायालय ने रक्षा की है।

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