फटाखो पर प्रतिबंध रहा बेअसर-खुल कर चले खतरनाक फटाखे

केकड़ी 16 नवंबर(नि सं)गोवरर्धन पूजा के दिन दोपहर होते होते शहर में उद्दंडियो ने खतरनाक फटाखे एक दूसरे पर फेकने का जो सिलसिला प्रारम्भ किया वह देर रात्री तक जारी रहा।मुख्य बाजार की अपेक्षा भेरूगेट-जगदीशपुरा कल्याण कॉलोनी जयपुर रोड आदि क्षेत्रो में उद्दंडियो ने फटाखे एक दूसरे पर फेंकर तांडव जारी रखा।मुख्य बाजार में पुलिस की सकती के चलते उद्दंडियो के त्योहारों पर सामाजिक शोहाद्र को बिगाड़ने के मंसूबे पूरे नही हो सके।पुलिस द्वारा उप अधीक्षक राजेश वर्मा और वृत्त निरीक्षक ब्रजेश मीणा ने सख्त रुख अपनाते हुए लगभग 17 लोगो को पकड़ा गया था।दो पहिया वाहनों तक कि तलाशी की जाकर खतरनाक फटाखो को जप्त भी किया गया।इससे अजमेरी गेट से घंटाघर देवगांव गेट खिड़की गेट जूनिया गेट आदि क्षेत्रों में माहौल को नियंत्रित करने में पुलिस पूरी तरह से सफल रही।रात्री में घास भेरू की सवारी जबरन निकालने का प्रयास कर रहे उद्दंडियो को पुलिस द्वारा समझाने की कोशिश की गई और उन्हें बताया गया कि COVID गाइड लाइन के तहत प्रशासन द्वारा पूर्व में ही घास भेरू की सवारी निकालने पर प्रतिबंध लगाया जा चुका है फिर भी उद्दंडी सवारी निकालने पर अड़े रहे इस पर प्रशासन द्वारा समाजसेवियों को बुलाकर उद्दंडियो को समझाने की कोशिश की जिसके असफल रहने पर पुलिस को लाठियां भांजनी पड़ी।पुलिस द्वारा लाठियां भांजे जाने पर उद्दंडियो की भीड़ भाग कर सब्जी मंडी की और चली गई जंहा उद्दंडियो द्वारा पुलिस पर पत्थर बरसाए गए।उद्दंडी यंहा से देवगांव गेट की और भागे उनके पीछे पीछे पुलिस थी यंहा पर भी सिरफिरे उद्दंडियो द्वारा पुलिस पर पत्थर फेंके गए।पुलिस ने संयम और सूझबूझ का परिचय देते हुए सख्ती बरती और उद्दंडियो को खदेड़ा।
शहर में प्राचीन काल से घास भेरू की सवारी निकालने की परंपरा चली आ रही है जिस पर इस वर्ष कोरोना के कारण प्रशासन ने प्रतिबंध लगा दिया था।इस सवारी को रात्री में निकालने की परंपरा रही है।इसका बेजा फायदा कुछ सिरफिरे उठाते है और दोपहर होते होते शहर का माहौल बिगाड़ देते है जिसके कारण शहर वासियों को जिनमे महिलाएं बच्चे और वृद्धों को घर से बाहर निकलने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।कब जाकर इस दूषित परंपरा से शहरवासियों को निजात मिल पाएगी फिलहाल इसका उत्तर भविष्य के गर्भ में दफन है।उद्दंडियो द्वारा त्योहार के मौके पर एक दूसरे पर खतरनाक फटाखे फेंक कर सामाजिक शोहाद्र को बिगाड़ने का प्रयास किया जाता है।
धड़ल्ले से बिके लाखो के फटाखे
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राज्य सरकार द्वारा फटाखो की बिक्री और उपयोग पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद भी लाखों रुपयों के फटाखे खुले आम धड़ल्ले से बिके जो प्रशासनिक मिली भगत के बिना संभव नही लगता।खुले आम फटाखो की बिक्री ने प्रशासनिक संवेदन शीलता को संदेह के दायरे में खड़ा कर दिया है।आलम यह था कि इस और पुलिस और पूरा प्रशासन मूकदर्शक बना रहा।

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