इंडिया एक्ज़िम बैंक का आकलनः अफ्रीका में 5 भारतीय अस्पताल और क्षेत्रीय हेल्थकेयर हब बनाने की तत्काल आवश्यकता

कोविड-19 वैश्विक महामारी के कारण पूरे विश्व की स्वास्थ्य सेवा प्रणाली गंभीर दबाव में है। अफ्रीका में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति महामारी से पहले भी नाज़ुक ही थी। इसके अलावा एचआईवी, मलेरिया, मधुमेह, उच्च रक्तचाप और कुपोषण जैसी अन्य बीमारियों के मामले बड़ी संख्या में पहले से मौजूद हैं।
देशों की स्वास्थ्य सेवा प्रणाली की क्षमताओं का मूल्यांकन करने वाले वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा सूचकांक के अनुसार, 54 में से 33 अफ्रीकी देशों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रभावित करने वाली किसी भी महामारी को झेल पाने की क्षमता सबसे कम है।
आकलन के अनुसार, अफ्रीका के स्वास्थ्य क्षेत्र में कम से कम 66 बिलियन यूएस डॉलर प्रति वर्ष की कमी है। यह दर्शाता है कि इस कमी को पूरा करने के लिए सरकारी सहायता और डोनर फंडिंग जैसे परंपरागत उपाय अपर्याप्त हैं। इस क्षेत्र में बीमारियों से भारी संख्या में जनहानि को रोकने के लिए एक समग्र दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है।
स्वास्थ्य सेवाओं तक लोगों की पहुंच बढ़ाने के लिए विभिन्न क्षेत्रों से सहयोग लेने की आवश्यकता है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रणालियों को सशक्त करने के लिए सरकार और निजी क्षेत्र सहित अंतरराष्ट्रीय समुदाय और क्षेत्रीय विकास संस्थानों का सहयोग और भागीदारी जरूरी है।
आधुनिक और पारंपरिक दवाओं के क्षेत्र में भारत की विशेषज्ञता है और विशेष रूप से अफ्रीका में स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र पर भारत का फोकस रहा है। वस्तुतः भारत में अफ्रीका से इलाज के लिए बड़ी संख्या में लोग आते हैं। इससे भारतीय स्वास्थ्य सेवाओं की ब्रांड छवि का संकेत मिलता है।
हर साल लगभग 50,000 लोग अफ्रीका से इलाज के लिए भारत आते हैं। हाल ही में हवाई यात्रा पर लगे प्रतिबंधों के कारण इलाज के लिए आने वाले लोगों की मुश्किलें लगातार बढ़ रही हैं। भारतीय स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र के निवेशकों द्वारा किए गए निवेश से भारत आकर इलाज कराने वाले लोगों के साथ-साथ अफ्रीका की बाकी आबादी की स्वास्थ्य सेवा जरूरतें भी पूरी की जा सकती हैं।
एक्ज़िम बैंक के प्रारंभिक शोध के अनुसार, मौजूदा परिस्थितियों में 100-100 बेड की क्षमता वाले पांच अस्पतालों में निवेश किया जाए तो भारतीय स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र काफी लाभान्वित हो सकता है। ये अस्पताल इस महाद्वीप के पांच क्षेत्रों यानी उत्तर, पूर्व, मध्य, पश्चिम और दक्षिणी अफ्रीका में खोले जा सकते हैं।
भारत को अफ्रीका के साथ अपनी विदेश नीति को इस तरह की उभरती जरूरतों के अनुरूप बनाने की आवश्यकता है, जिसके जरिए अफ्रीका के स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में सुविधाओं के विकास में निवेश के अवसरों की संभावनाएं तलाशी जा सकें और अफ्रीकी अर्थव्यवस्थाओं को उनके सतत विकास लक्ष्यों, मुख्य रूप से यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज तथा अफ्रीका के एजेंडा 2063 को प्राप्त करने में मदद मिले।
ये सुधार सरकारी भागीदारी, सार्वजनिक-निजी भागीदारी, संयुक्त उपक्रम और विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (एफडीआई) जैसे उपायों के जरिए किए जा सकते हैं।
“भारत-अफ्रीका संवादः स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में संभावनाएं” विषय पर आयोजित आज के वेबिनार में इन सुझावों पर चर्चा की गई। वेबिनार में मॉरीशस के स्वास्थ्य एवं कल्याण मंत्रालय के स्थायी उप सचिव श्री गुलशन रामरेखा सहित कई गणमान्य हस्तियां शामिल रहीं। श्री रामरेखा ने मॉरीशस के माननीय स्वास्थ्य एवं कल्याण मंत्री डॉ. कैलाश कुमार जगतपाल का संदेश पढ़ा। भारत के विदेश मंत्रालय में सचिव (ईआर) श्री राहुल छाबड़ा इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। अफ्रीका में क्षेत्रीय केंद्रों पर केंद्रित सत्र में भारत में मोरक्को के माननीय राजदूत श्री मोहम्मद मलिकी; बोत्सवाना गणराज्य के माननीय उच्चायुक्त श्री गिलबर्ट शिमेन मंगोल; सेनेगल (वर्तमान में गाम्बिया, गिनी बिसाऊ और काबो वेर्दे सहित) में भारतीय राजदूत श्री जी.वी. श्रीनिवास; और युगांडा (वर्तमान में बुरुंडी सहित) के लिए भारतीय उच्चायुक्त श्री ए. अजय कुमार शामिल रहे।
वेबिनार के दौरान, एक सत्र भारत की विकासात्मक भूमिका को आकार देने में अहम, भारतीय निजी क्षेत्र के प्रतिनिधियों द्वारा अनुभव साझा करने का भी रखा गया। इस सत्र में नारायण हेल्थ के चेयरमैन डॉ. देवी प्रसाद शेट्टी; एचएलएल लाइफकेयर लिमिटेड के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक श्री के बी जॉर्ज; अपोलो हॉस्पिटल्स के अस्पताल प्रभाग के अध्यक्ष डॉ. के. हरि प्रसाद; और एलएंडटी कंस्ट्रक्शन, लार्सन एंड टूब्रो लिमिटेड के वाइस प्रेसीडेंट और हेड, श्री वी. सुकुमार हेब्बर शामिल रहे।
वेबिनार में स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र के तीन प्रमुख पहलुओं को कवर किया गयाः स्वास्थ्य सेवा इन्फ्रास्ट्रक्चर, स्वास्थ्य सेवा सुविधाएं और प्रशिक्षण एवं क्षमता विकास। वेबिनार के दौरान, मूलभूत स्वास्थ्य सेवा इन्फ्रास्ट्रक्चर के विकास में सहयोग बढ़ाने के लिए त्रिस्तरीय रणनीति की जरूरत को रेखांकित किया गया। इनमें अफ्रीकी देशों को भारत सरकार समर्थित ऋण व्यवस्थाओं और सार्वजनिक-निजी भागीदारी के जरिए सहयोग; चिकित्सा कर्मियों के क्षमता विकास और प्रशिक्षण में सहयोग; तृतीयक और चतुर्थक देखभाल सेवाएं प्रदान करने के लिए पूरे अफ्रीका में क्षेत्रीय केंद्र स्थापित करना शामिल हैं।
अधिक जानकारी के लिए कृपया संपर्क करें:
श्री डेविड सिनाटे, मुख्य महाप्रबंधक,
भारतीय निर्यात-आयात बैंक,
केंद्र एक भवन, 21वीं मंज़िल,
विश्व व्यापार केंद्र संकुल,
कफ़ परेड, मुंबई 400 005.
फोनः +91-22- 2217 2701;
ईमेलः [email protected]

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