
भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व शिक्षा मंत्री वासुदेव देवनानी ने अमित शाह पर सरकार गिराने के आरोप का खंडन करते हुए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर पलटवार किया। देवनानी ने कहा कि राज्य सरकार पहले दिन से ही अस्थिर है। यह प्रारंभ से ही प्रलोभन, झूठे आश्वासनों व सरकारी मशीनरी के दुरूपयोग की कमजोर शिला पर टिकी है। कांग्रेस पार्टी की अंदरूनी कलह पर नियंत्रण कर पाने में विफल गहलोत बार-बार पूरे झूठे आरोप बीजेपी पर मंढ रहे हैं।
देवनानी ने कहा कि बाडेबंदी व किलेबंदी में दिये आश्वासनों को पांच माह में पूरे न कर पाने से कांग्रेस विधायकों व समर्थकोंमें काफी गुस्सा है जो अब फूटने को तैयार है। इसको लेकर गहलोत में बौखलाहट है और सत्ता बचाने के लिए वे बेबुनियाद आरोप विपक्ष पर लगा रहे हैं। वैसे भाजपा ने गहलोत की सरकार को बचाने का ठेका नहीं लिया है। अपने आंतरिक कलह से कांग्रेस व उसके सहयोगियों में बढते असंतोष को नियंत्रण न कर पाने से कभी भी सरकार गिर सकती है।
देवनानी ने यह भी कहा कि जनता का प्रदेश सरकार के खिलाफ आक्रोश परवान पर है। राजस्थान में पडोसी राज्यों की तुलना में अधिकतम 25 प्रति.वेट के कारण आसमान छूते पेट्रोल और डीजल के भावों से जनता त्रस्त है। प्रदेश में पेट्रोल और डीजल महंगा होने के पीछे भी गहलोत सरकार द्वारा राज्य में भारी वेट लगाना कारण जिम्मेदार है। जनता के समर्थन का दावा करने वाले गहलोत एक बार इस्तीफा देकर मध्यावधि चुनाव कराए तो असलियत सबके सामने आ ही जाएगी। कुशासन व भ्रष्टाचार में आकंठ तक डूबी सरकार को उखाड फेंकने का मन अब जनता बना चुकी है।
अप्रेल से सत्र प्रारंभ करने और एक साल में दो कक्षा संचालित करने पर विचार करें सरकार-देवनानी
जयपुर, 6 दिसम्बर।
कोरोना में परेशान प्रदेश के विद्यार्थियों एवं अभिभावकों को राहत देने की मांग करते हुए पूर्व शिक्षा मंत्री एवं अजमेर उत्तर विधायक वासुदेव देवनानी ने कहा कि राज्य सरकार नित नए नए कागजी आदेश निकालने के बजाए विद्यार्थियों और अभिभावकों को राहत हेतु स्थाई समाधान खोजने की तरफ अपना ध्यान केन्द्रीत करें। 1 से 8वीं तक की कक्षा 31 मार्च तक नहीं लगाकर अप्रेल माह से सत्र प्रारंभ करने के साथ इस व आगामी दोनों कक्षाओं की पढाई एक ही सत्र में पूरा कराने के विकल्प पर गहनता से विचार करें।
देवनानी ने कहा कि पिछले 9 माह से पढाई को लेकर प्रदेश में अनिश्चितता की स्थिति है, उपर से सरकार रोज अलग अलग कागजी आदेश निकाल ’कोढ में खाज’ देने का काम कर रही हैं। मध्यप्रदेश में भाजपा सरकार ने बच्चों के हित में फैसला लेते हुए 31 मार्च तक 1 से 8वीं तक कक्षा नहीं लगाने का निर्णय किया है। प्रदेश सरकार को भी मध्यप्रदेश से सीख लेते हुए कक्षा 1 से 8वीं तक की कक्षा अप्रेल माह से ही लगाने के तुरंत आदेश देने चाहिए। इस सत्र में जिन कक्षाओं की पढाई नहीं हो पाई उसका पाठ्यक्रम अप्रेल माह प्रांरभ से आधा सत्रावधि तक और अगली कक्षा का पाठ्यक्रम शेष सत्रावधि में पूरा कराने की योजना बनाना सबके हित में रहेगा। ऐसा करने से विद्यार्थियों का साल खराब होने से बचेगा साथ ही मानसिक तनाव झेल रहे बच्चों व अभिभावकों को भी राहत मिलेगी। उन्होंने कहा कि 10वीं व 12वीं बोर्ड कक्षा को लेकर भी कोई व्यवहारिक निर्णय करने की तत्काल आवश्यकता है। शिक्षा कलण्डर के अनुसार केवल तीन माह बोर्ड परीक्षा के बचे हैं। इतनी कम अवधि में 60 प्रतिशत पाठयक्रम भी पूरा करना बच्चों के लिए असंभव है। ऐसे में इस बिन्दु पर भी समग्र विचार करने की जरूरत है।
फीस भुगताने के मामले पर बोलते हुए देवनानी ने कहा कि निजी स्कूल संचालक और अभिभावकों में भी फीस को लेकर काफी असमंजस्य की स्थित है। वैसे मामला न्यायालय में विचाराधीन है। न्यायालय की गाइडलाइन को ध्यान में रखते हुए सरकार को अभिभावक और स्कूल संचालकों को बैठाकर बीच का रास्ता निकालना चाहिए।