संबंध

Dinesh Garg
हमारे जीवन में बहुत सी घटनायें समय और स्थान के अनुरूप घटित होती रहती है या यूं कहे प्रत्येक घटना स्थायी नहीं रहतीं और उनकी स्मृति भी चिरकालिक नहीं रहती। मानव सम्बन्धों की भी यही कहानी है। एक ही व्यक्ति से स्थान और समय विशेष में बने घनिष्ठ संबंध भी कालांतर में विरल हो जाते हैं। उनमें पहले जैसा स्नेह व विश्वास व उत्साह नहीं बना रहता। कारण की तह तक जाएंगे तो पाएंगे संसार की प्रत्येक वस्तु व संबंध परिवर्तनीय है। वस्तुत: देखा जाएं तो जन्म के पश्चात ही संबंध तय होते है और उन संबंधो को एक नाम मिलता है। वह भविष्य में सदैव बने रहेगे ऐसा होना आवश्यक नहीं है।
जीवन में कई बार ऐसा भी होता है कि जीवन भर हम जिन खुन के रिश्तो के प्रति समर्पित रहते है वे समय के साथ बदल जाते है और कुछ अनाम रिश्ते जीवन में ऐसे बन जाते है जो जीवन भर आपके साथ हमसफर बन जाते है। ऐसे में हमें हमेशा परिवर्तनो को स्वीकार करना सीख लेना चाहिए। कही बार ऐसा भी हो सकता है कि जिनसे कल घनिष्ठता थी आज संभव हैं वे पास रहकर दूर बहुत दूर हो गये हों। जीवन ऐसे ही चलता आया है। इसे सहज भाव से स्वीकार कर बिना कोई अपेक्षा किये आगे बढ़ जाना ही श्रेयस्कर है। जीवन में सहज रूप से जो स्वयंमेव मिल जाएं उन्हें जैसा है स्वीकार कर लेना ही चाहिए। यहा मेरा कहने का अभिप्राय मात्र इतना सा है कि जीवन में जो भी अच्छे मित्र मिले, उन्हें ताउम्र संभाल कर रखना चाहिए। उनसे अपेक्षा करने के स्थान पर उन्हें सम्मान देकर अपना बना लेना चाहिए। कभी समय मिले जो बचपन के उन मित्रों को भी तलाश लेना चाहिए जिनसे साथ अपने बाल्यकाल की स्मृतियां संजोई थी। उनकी स्मृतियां आपको वर्तमान समय में उत्साह से जीवंत कर देगी। उन अनाम रिश्तो को सहेजने संवारने की जिम्मेदारी आपकी स्वयं की है। स्वार्थ की संकीर्णता से बाहर निकलकर उनको भी संभालने का दायित्व आपको वर्तमान समय में निभाना होगा। क्या आप ऐसा कुछ करने के लिए तैयार हो सकेगे। आपके जबाब का इंतजार रहेगा।

DINESH K.GARG (OLD STUDENT OF ST PAUL’S,AJMER)
9414004630
dineshkgarg.blogpspot.com

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