dr. j k gargकिसी को रोटी की चिंता है तो कोई महामारी लॉकडाउन की वजह अपने रोजगार एवं अपने व्यापार के प्रति चिंतित है तो कोई परिवार के स्वास्थ्य और सुरक्षा और जीवन की आशंका के कारण । सभी चिंता के साये में अपना जीवनयापन कर रहे हैं।निसंदेह चिंता आज विश्व के हर मानव के साथ चिपकी हुई है। स्वामी विवेकानंद ने कहा था कि “चिंता और चिता में सिर्फ एक बिंदु का फर्क होता है “,अन्यथा दोनों समान हैं।चिंता वह आग है जो चिन्तन को जला डालती है | चिंता ही चिता बन जाती है | देखा जाए तो चिंता भय से कुछ अलग है,भय किसी ज्ञात खतरे के कारण उत्पन्न होता है वहीं चिंता अनुभव किये गये अनियंत्रित या अपरिहार्य खतरों का परिणाम है | रवींद्रनाथ टैगोर ने कहा था कि यदि आप खुद को मानसिक और शारीरिक रूप से किसी काम में व्यस्त रहते हैं,तो आपके पास चिंता के लिए फालतू समय नहीं बचेगा।