
हर आदमी के मन में एक सवाल हलचल मचाए हुये हैः- *आगे क्या होगा?*
*मेरे मन में भी बहुत से सवाल उठ खड़े हुए हैः- *
क्या हमें समझदारी से काम नहीं लेना चाहिए?
क्या हमें देश के लिए साथ खड़ा नहीं होना चाहिए?
क्या हमें नकारात्मक सोच को छोड़ साकारात्मक व्यवहार नहीं अपनाना चाहिए?
टांग खिचाई का समय नहीं है दोस्तों परिवार पर जब संकट आता है तो प्रत्येक सदस्य को अपना सहयोग देना होता है। नहीं तो परविार टूट के बिखर जाते हैं।
एक घर में अगर दस लोग रहते है और चार ही बाथरूम है ओर एक समय ऐसा आए जब दसो को दस्त हो जाए तो क्या चार बाथरूम में काम चल जायेगा मुश्किल होगी लेकिन संयम रखना होगा। परेशानी का समाधान सब को मिलकर ही ढूढना होगा।
भविष्य में कभी ऐसी घटना होगी ये सोचकर दस बाथरूम तो घर में बनाए नहीं जा सकते।
ऐसे ही हमारा देश 136 करोड़ की आबादी वाला देश हैं मानते है संकट *यमराज * के रूप में आया है बहुत भयानक है |
लेकिन क्या हम अपना फर्ज निभा रहे है?
क्या नियमों का पालन ईमानदारी से कर रहे है ?
क्या हम मास्क सही तरीके से लगा रहे है ?सोशल डिस्टेसिंग की पालना कर रहे है ?
क्या सरकार की दी हुई गाइडलाइन के अनुरूप हम विवाह में कम लोगों को बुला रहे है ?
नहीं बिल्कुल नहीं अगर सबकी पालना की होती तो आज हम घबरा नहीं रहे होते बल्कि गर्व से खड़े होते अपनी कोरोना पर विजय को मना रहे होते।
*कोरोना तो बाहर से आया घर में मौजूद दानवों का क्या करेंः-*
इतनी विषम परिस्थितियों में भी लोग ब्लैक में इंजेक्शन, नकली दवाई, प्लाज्मा, और मेडिकल उपकरण बेच रहे है। इन्सानियत के नाम पर धब्बा है एसे लोग जो लोगो की जान के साथ खेल रहे है।
*राशन – सब्जी के बढ़ते दाम:-*
दो दिन लाक्डाउन होता है राशन की दुकानों में राशन मंहगा हो जाता है जैसे तो अकाल पड़ने वाला है। कैसे कोई ऐसी परिस्थितियों में दाम बढ़ाने का सोच सकता है। पहले ही तो आम इन्सान रोजगार को लेकर परेशान है और फिर मंहगाई कहां चली जाती है मानवता जब ठेले पर रखे टमाटर, आलू भी अपना रोब दिखाने लगते है।
*प्रार्थना ऐसे महान लोगों से:-*
दोस्तों आज लड़ने का समय है कुछ करने का समय है अपने ही लोगों की तकलीफ पर अपना महल खड़ा करके क्या कर लोगे। जिन्दगी रही तो पैसा बहुत कमा लेगे। अभी थोड़ा आशीर्वाद और दुआ कमा लो।
हर समय एक छोटे बच्चे की तरह शिकायत करने से कुछ नहीं होगा। एक समझदार देशवासी बन साथ देना होगा। माँ भी एक समय तक ही मुँह में कंवा खिलाती है बड़े होने पर स्वयं कोशिश करनी पड़ती है अपनी भूख को खत्म करने के लिए हम अपने प्रयासों में कमी ना छोड़े। नियमों की पालना करे। सरकार, डाॅक्टर, पुलिसकर्मियों का सम्मान करें।
*‘‘यही है देश की पुकार’’*
लेखन अम्बिका हेडा