सोशल मीडिया है या नुमाइश का मंच

-जिन महिला-पुरुषों की एक घर में रहते हुए अच्छे से बात नहीं होती, वे पराए महिला-पुरुषों से अपनी तारीफ सुनने के लिए उतावले रहते हैं
-जय श्री राम, जय श्री कृष्ण, गुड मॉर्निंग जैसी पोस्ट में भगवान की जगह अपनी फोटो चिपकाने का तुक समझ से परे
-आए दिन FB, इंस्टाग्राम, ट्विटर, वाट्सअप आदि पर फोटो चिपकाने वालों को क्या यह भी पता है या नहीं कि उनकी फोटोज, वीडियोज का दुरुपयोग हो रहा है या नहीं

✍️प्रेम आनन्दकर, अजमेर।
👉जी हां, जिन बातों का उल्लेख ऊपर बिंदुओं में किया है, उन पर एक बार जरूर मंथन या विचार कीजिए। कितनी जल्दी और आसानी से हम सोशल मीडिया पर, जो मन में आया, अपनी खुद की, पत्नी और बच्चों की फोटोज व वीडियोज आए दिन बिना सोचे समझे पोस्ट कर देते हैं। घर-परिवार में कोई मांगलिक कार्यक्रम पर नाच-गाने के भी फोटोज व वीडियोज डाल देते हैं। यह बात अभी तक समझ में नहीं आई कि जो प्रोग्राम निहायत पारिवारिक हैं, उनको सार्वजनिक मंच पर प्रदर्शित करने की आखिर क्या जरूरत है। एक सवाल जरूर मन में आता है कि इस तरह की पोस्ट करने वाले लोगों में से कितने ऐसे हैं या हो सकते हैं, जिन्होंने दुर्भाग्यवश अपने परिवार में आई दुखद स्थिति में किसी के रोने, चीखने, चिल्लाने की फोटोज या वीडियोज पोस्ट की है या पोस्ट करने का साहस रखते हैं। अरे भई, जो प्रोग्राम पूरी तरह पारिवारिक है और हमारी बहन-बेटियां इनमें खुलकर चहकती हैं, गाती हैं और नाचती हैं, तो उन्हें सार्वजनिक मंच पर पोस्ट करने की गलती या भूल क्यों करते हो। हमारे कई दोस्त अक्सर यह पोस्ट करते हैं कि उनकी FB किसी हैकर ने हैक कर दी है और फर्जी फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजकर ठगी की जा सकती है।

प्रेम आनंदकर
ठगी और जालसाजी को समझने के लिए यही काफी है। अब आप अंदाजा लगा सकते हैं कि सोशल मीडिया के किसी भी प्लेटफॉर्म पर पोस्ट की गई फोटोज व वीडियोज से भी ना केवल छेड़छाड़ की जा सकती है, बल्कि उनका दुरुपयोग भी हो सकता है। हां, अगर आपको यह सब शेयर करना ही है तो अपने परिवार, निकट के नाते-रिश्तेदार को उनके वाट्सअप पर भेज सकते हैं लेकिन फेसबुक पर शेयर करने का तुक आज तक समझ में नहीं आया। इसी तरह कुछ महिलाएं कभी कभी आनंद के पलों में घर में नाच-गा लेती हैं। वहां तक तो ठीक है लेकिन उनके वीडियो बनाकर फेसबुक और इंस्टाग्राम व अन्य साइट्स पर अपलोड कर देती हैं। यही नहीं, अनेक महिला-पुरूष रोजाना या आए दिन अभिवादन की पोस्ट डालते हैं, जिसमें जय श्री राम, जय श्री कृष्ण, गुड मॉर्निंग आदि लिखते तो हैं लेकिन भगवान की जगह खुद की फोटो चिपका देते हैं। अब यह भी समझ में नहीं आता कि सुप्रभात भगवान के नाम से किया जा रहा है या खुद के नाम से। ऐसे लोगों का केवल एक ही मकसद होता है कि रोज सोशल मीडिया पर उनकी फोटोज शेयर हों, तभी उनकी रोटी हजम होती है। दरअसल सोशल मीडिया अच्छे कार्यों व सदुपयोग के लिए बना था, लेकिन यह मौजूदा दौर में केवल नुमाइश का मंच बनकर रह गया है। यह कहने में कोई गुरेज नहीं है कि देश व समाज में जब भी कोई बुराई पैदा होती है तो उसके जनक हम ही होते हैं और जब बुराई विकराल रूप धारण कर लेती है तो ठीकरा दूसरों के माथे पर फोड़ते हैं। हो सकता है कि मेरा यह ब्लॉग अनेक लोगों को नागवार गुजरेगा। लेकिन सच्चाई से आखिर हम कब तक मुंह मोड़ते रहेंगे।

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