भागवत कथा में गोवर्धन पर्व पर झूमे श्रद्धालु

केकडी 8 दिसम्बर(पवन राठी)
परम पूज्य संत श्री घनश्याम दास महाराज के पावन सानिध्य एवं उत्तम व्यवस्था में ” सर्वजन हिताय सर्वजन सुखाय ” ” सर्वे भवन्तु सुखिनः ” समस्त भक्तों के स्नेह और सहयोग से श्रीमद् भागवत सप्ताह ज्ञानयज्ञ कथा के पंचम दिवस पर-राष्ट्रीय संत दिव्य मोरारी बापू ने कहा कि श्रीकृष्ण की बाललीला एवं गोवर्धन पूजा की कथा का गान किया गया और उन्होंने कहा कि जैसी दृष्टि वैसी सृष्टि। आप भला तो जग भला। दूसरा तो दर्पण होता है। दूसरे को जब हम बुरा कहते हैं,तब वह आईना बन जाता है। इस आईने के अंदर हमें हमारा ही प्रतिबिंब देखने को मिलेगा। किसी को जब हम बुरा कहते हैं, तब सोचना चाहिए कि हम अपने प्रतिबिम्ब को तो देख नहीं रहे हैं न? इसमें हमारी बुराइयां ही प्रतिबिम्बित दिखाई देंती हैं।
बुरा जो देखन मैं चला, बुरा मिला नहि कोई।
अंतर खोजा आपना, मुझसे बुरा न कोई।।
स्वदोष दर्शन करना चाहिए। दूसरों के छिद्रों का अन्वेषण कभी नहीं करना चाहिये। जीवन विकास की यह पहली शर्त है। भागवत की कथा दर्पण है। उसमें हमें अपने स्वदोष दर्शन होंगे। इस त्रुटि को दूर करने के प्रयत्न करेंगे तो निर्दोष बनेंगे,निर्मल बनेंगे और भगवान को प्रिय होंगे।
कथा में गोवर्धन पर्व पर भक्ति संगीत पर श्रद्धालुओ ने जमकर नरिय किया व उपस्थित सैकड़ों भक्तों ने श्रद्धालुओं ने पूजा आरती का लाभ प्राप्त किया।

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