युग प्रवर्तक युवा सम्राट स्वामी विवेकानंद part 5

j k garg
एक दिन शारदा मां ने स्वामी विवेकानंद से कहा पुत्र मुझे चाकू लाकर दो। स्वामी विवेकानंद चाक़ू लेकर आए और उसकी धार को अपनी तरफ़ रखा और पकड़ने वाले हिस्से को माँ की तरफ़ किया। उनकी माताजी उनसे काफ़ी प्रसन्न हुई और बोली कि अब तुम समाज के उत्थान के लिए काम कर सकते हो। उन्होंने माँ शारदा से उनके इस सोच का कारण पूछा, तो उन्होंने कहा: जिस तरह से तुमने मुझे छूरी पकड़ाई, तुमने धार को अपनी तरफ़ रखा ताकि मुझे चोट न पहुंचे और तुमने हत्थे को मेरी ओर किया, यह तुम्हारी दयालुता और कृपालुता का प्रमाण है। वर्ष 1921 में महात्मा गाँधी बेलूर मठ की यात्रा पर आये थे और उन्होंने स्वामी विवेकानंद की पुण्यतिथि के उपलक्ष में कहा था: “मैंने काफ़ी गंभीरता से स्वामीजी के काम को देखा है और वो देख कर मेरे मन में मेरे देश के लिये मेरा प्रेम पहले से हज़ार गुणा अधिक बढ़ गया है। मैं यहाँ आये नौजवानों से निवेदन करता हूँ कि वे स्वामी विवेकानंद जी के जीवन से कुछ हासिल किये बिना न जाएँ |

error: Content is protected !!