ध्वजा के दर्शन से जन्म जन्मान्तरों के पापों से मिलती है मुक्ति

केकड़ी 5 फरवरी(पवन राठी)कस्बे में सब्जीमंडी स्थित चन्द्रप्रभु मंदिर में प्रतिष्ठा की वर्ष गांठ( बसंत पंचमी)के अवसर पर ध्वजारोहण कार्यक्रम साध्वी सुदरशना समकित प्रभा व स्वस्ति प्रभा की प्रेरणा से आयोजित किया गया।मध्यप्रदेश से आये प्रवीण भाई चोरडिया के निर्देशन में सत्तर भेदी पूजा चढ़ाई गए। भजन गायकों द्वारा भजनों की रस गंगा बहाई। ध्वजा के लाभार्थी परिवार समाज के लोगो ने ॐ पुण्याहम ॐ पुण्याहम व भगवान चन्द्रप्रभु के जयकारों के साथ मंदिर के शिखर पर ध्वजा चढ़ा कर खुशहाली की कामना की। इसके बाद महाआरती सम्पन्न हुई।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रवीण भाई चोरडिया ने कहा कि वस्तु एवम पदार्थ जितने पुराने होते है उसका मूल्य उतना ही बढ़ जाता है परंतु प्रभु की प्रतिमा जितनी पुरानी होती है वह उतनी ही ज्यादा चमत्कारी होती है प्रभु की सेवा अर्चना से ही मुक्तिपद को प्राप्त किया जा सकता है।जिस प्रकार मनुष्य के शरीर में मुह का विशेष महत्व होता है उसी प्रकार जिन मंदिर में शिखर एवम ध्वजा का विशिष्ठ महत्व एवम स्थान होता है। ध्वजा मंदिर के प्रभावना को विकसित करती है।इससे आसपास के क्षेत्र में सकारात्मक ऊर्जा का संचरण होता है।ध्वजा के दर्शन मात्र से ही जन्म जन्मान्तरों के पापों से मुक्ति मिल जाती है।
इस अवसर पर उदयसिंह धामानी गौतम रूपावत जितेंद्र सिंघवी पुखराज ताथेड़ गौतम चंद बग्गानी राजेन्द्र धूपिया पारस मल सोनी निहाल चंद मेडतवाल उमराव मल मेडतवाल अमित धूपिया सुरेंद्र धूपिया रिखब धम्मानी छोटूसिंह पालडेचा खेम चंद ताथेड़ विनित चोरडिया शांतिलाल ताथेड़ सहित समाज के अनेक श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित थे। कार्यक्रम के अंत मे दादाबाड़ी में स्वामी वात्सल्य का आयोजन किया गया।

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