dr. j k gargप्रकृतिकी अनुकम्पा से हमारे भारत में हीनियमित रूप से छः ऋतुएँ होतीहै | योगीराजक्रष्ण ने कहा था में ऋतुओं मे वसंत ऋतु हूँ मुझे वसंत ऋतु सबसे अधिक प्रिय है | इसीलिए इन छः ऋतुओं में वसंत ऋतु को ऋतुओं का राजा कहा जाता है। इसे ऋतुराज यामधुमास भी कहते हैं। “वसंतपंचमी” प्रकृति के अद्भुत सौन्दर्य, श्रृंगारऔर संगीत की मनमोहक ऋतु यानी ऋतुराज के आगमन की सन्देश वाहक है। वसंत पंचमी के दिनसे शरद ऋतु की विदाई के साथ पेड़-पौधों और प्राणियों में नवजीवन का संचार होने लगताहै। प्रकृति भी नवयौवना की भांति श्रृंगारकरके इठलाने लगती है। पेड़ों पर नई कोपलें, रंग-बिरंगेफूलों से भरी बागों की क्यारियों से निकलती भीनी सुगंध, पक्षियोंके कलरव और पुष्पों पर भंवरों की गुंजार से वातावरण में मादकता छाने लगती है। कोयलकूक-कूक के बावरी होने लगती हैं। बसंतका वर्णन मेरी स्वजन कविता अग्रवाल ने इस प्रकार किया है :- उर्वी ने किया अनुपमश्रृंगार फैली हरीतिमा दिग दिगंत | पुष्पोंसे सजे तोरण द्वार कोयलिया गाए राग मल्हार | शिशिर का अब हुआ अंत देखो आएऋतुराज बसंत ।ओढ़ चुनरिया पीली पीली महक रही वो भीनी भीनी | खुशियाँ छाई चहुँ ओर अनंत देखोआए ऋतुराज बसंत। बसंत के अंदर श्रृंगारअपने यौवन पर पहुंच जाता है | इस वर्ष बसंत पंचमी का पर्व भारत में और संसार मेंजहां जहां सनातन धर्मी रहते हैं वहां 5 फरवरी 2022 को हर्षोल्लास के साथ मनायाजाएगा | डा. जे. के. गर्ग
पूर्व संयुक्त निदेशक कालेज शिक्षा जयपुर