-कांग्रेस को अब परिवारवाद से उबर कर किसी ऐसे नेता को कमान सौंपनी चाहिए, जो सर्वमान्य हो और पार्टी को उबार सके
-राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ही लगा सकते हैं कांग्रेस की नैया पार
✍️प्रेम आनन्दकर, अजमेर।
👉जब-जब विधानसभा चुनाव होते हैं, तो कांग्रेस का सफाया हो जाता है। मौजूदा स्थिति को देखें, तो कांग्रेस का वजूद अब केवल राजस्थान और छत्तीसगढ़ में रह गया है। इन दोनों राज्यों को छोड़कर कांग्रेस अब कमोबेश सभी राज्यों में निपट गई है। हाल ही पांच राज्य उत्तरप्रदेश, मणिपुर, गोवा, पंजाब और उत्तराखंड में हुए विधानसभा चुनाव के नतीजे कांग्रेस के लिए बहुत बड़ी खतरे की घंटी साबित हुए हैं। यदि अब भी कांग्रेस ने अपना नेतृत्व नहीं बदला और परिवारवाद से नहीं उबरी, तो वह दिन दूर नहीं, जब पूरे देश में कांग्रेस केवल नाम के लिए एक पार्टी रह जाएगी। यह कितना ज्यादा दुर्भाग्यपूर्ण है कि देश की बड़ी पार्टी कांग्रेस अब सिमटी कर केवल दो राज्यों में रह गई है। यदि इतनी बदतर स्थिति होने के बाद भी कांग्रेस कुछ सोचे नहीं, अपने नेतृत्व में बदलाव नहीं करे और किसी अन्य वरिष्ठ नेता को कमान नहीं सौंपे, तो फिर यह कहा जा सकता है कि उसका रखवाला केवल भगवान ही है। कांग्रेस को अपनी मुख्य प्रतिद्वंद्वी पार्टी भाजपा से सीख लेनी चाहिए, जो दो-तीन साल या चार-पांच साल में अपना अध्यक्ष बदल देती है। यदि पार्टी अध्यक्ष किसी लाभ के पद पर नियुक्त हो जाते हैं, जैसे मंत्री बन जाते हैं, तो वह अध्यक्ष पद छोड़ देते हैं। मंत्री बनें या नहीं, फिर भी भाजपा में निश्चित समय पर बदलाव हो जाता है और नए नेता को काम करने का मौका दिया जाता है। कांग्रेस भी ऐसा ही कर अपने मिटते वजूद को बचा सकती है। अब सवाल यह है कि कांग्रेस की कमान किसे सौंपी जानी चाहिए, तो यह बात भी सामने आती है कि अब कांग्रेस के पास सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के बाद राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ही एकमात्र ऐसे नेता हैं, जो सर्वमान्य हो सकते हैं और वे कांग्रेस की डूबती नैया को बचा सकते हैं।
