निशक्त जन आस्थावान श्रद्धालु एक मात्र श्री ब्रह्मा गायत्री जी के दर्शन से वंचित क्यों?

ऐसी घोर अनदेखी, उपेक्षा और लापरवाही का दोषी कौन?
महामहिम राज्यपाल महोदय के निर्देशों की अवहेलना का जिम्मेदार कौन?

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग द्वारा लिफ्ट लगाने की स्वीकृति के छह वर्ष गुजर जाने के बाद भी निशक्त जनों को लिफ्ट सुविधा से वंचित रखा जाना उनकी श्री ब्रह्मा जी के प्रति आस्था व श्रद्धा को आघात और आहत करने जैसा कृत्य?
💐श्री ब्रह्मा मंदिर में निशक्त जनों की सुविधा के लिए लिफ्ट लगवाने हेतु तत्कालीन स्व0 महंत स्वामी सोमपुरी जी ने महामहिम राज्यपाल श्री कल्याण सिंह जी महोदय के जिला प्रशासन को दिए गए निर्देशानुसार ( क्यों कि महामहिम पैरों में तकलीफ के कारण मंदिर की सीढ़ियां चढ़कर ब्रह्मा जी के दर्शन नहीं कर सके थे) मंदिर ट्रस्ट के माध्यम से मंदिर राष्ट्रीय स्मारक के रूप में संरक्षित होने से ,मंदिर परिसर में लिफ्ट लगवाने की स्वीकृति के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के अधीक्षण पुरातत्वविद् जोधपुर को अपने पत्रांक ब्रह्मा मंदिर/2016/02/7 दिनांक 11. 10.2016 को पत्र लिखा जिस पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग, जोधपुर ने लिफ्ट लगाने की स्वीकृति के क्रम में अपने पत्रोत्तर दिनांक 21. 10.2016 द्वारा मंदिर ट्रस्ट को यह जवाब भेजा। जो कि यह है।
इस संदर्भ में आपको सूचित करवाना चाहूंगा कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा राजस्थान में स्थित केंद्रीय संरक्षित स्मारकों की अभीगम समपरीक्षा (acess audit) करवाई जा रही है। जिसके अंतर्गत निशक्त जनों को सुविधा प्रदान करने हेतु स्मारकों पर रैंप,लिफ्ट आदि लगवाए जाने हेतु स्थान सुनिश्चित करने के पश्चात कार्य करवाया जाएगा। निर्माण मंदिर की सुंदरता व निशक्त जनों की सुविधा को ध्यान में रखकर अति आधुनिक तरीके से करवाया जाएगा। इस संदर्भ में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा करवाई जाने वाली अभीगम परीक्षा में श्री ब्रह्मा जी मंदिर को भी सम्मिलित किया गया है।
अतः आपको सूचित करना चाहूंगा कि उक्त समपरीक्षा के समाप्त होने के पश्चात ब्रह्मा मंदिर में लिफ्ट लगवाने का कार्य भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा करवा दिया जाएगा ।
सादर पी एस श्रीरामन अधीक्षण पुरातत्वविद जोधपुर।
लेकिन चिंता और दुर्भाग्य का विषय है कि 11.01.2017 को मंदिर महंत की दुर्घटना में मृत्यु के बाद,गुजरे गत छह सालों में न तो जिला प्रशासन ने ना ही मंदिर की खाली पड़ी गद्दी पर आसीन जिला कलक्टर की अध्यक्षता में गठित अस्थाई प्रबंध कमेटी ने ना ही भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग द्वारा भी निशक्त जनों की इस अति महत्पूर्ण जन सुविधा को कभी भी गंभीरता से नही लिया गया।केवल मात्र जब जब भी बड़े वी वी आई पी दर्शन को आते है और जब वे दर्शन के लिए मंदिर की सीढ़ियां नही चढ़ पाते है तब तब इस समस्या को लेकर हाय तौबा मचाई जाती है। वी आई पी गया और फिर समस्या जस की तस बनी मुंह बाएं खड़ी की खड़ी नजर आती है। तो क्या निशक्त जनों में केवल वी आई पी ही आते है तब ही ढिंढोरा पीटा जाना चाहिए या क्यों नही आम तीर्थ यात्रियों जो कि निशक्त होने के कारण मंदिर दर्शन लाभ नहीं ले पाते है, उनकी पीड़ा के लिए कोई आवाज नहीं उठाई जाती।
निशक्त जनों के प्रति राज्य सरकार, जिला प्रशासन, स्थानीय प्रशासन, मंदिर प्रबंधन के द्वारा इस कदर अनदेखी किया जाना गंभीर एवम सोचनीय विषय ही नही है बल्कि दुर्भाग्य पूर्ण है कि विश्व विख्यात पुष्कर तीर्थ में एक मात्र श्री ब्रह्मा मंदिर में निशक्त जन श्रद्धालुओं के लिए आवश्यक सेवा के रूप में एक मात्र लिफ्ट की सुविधा भी प्रदान नहीं करवाई जा रही है।
देखने में आया कि फिर कल केंद्रीय मंत्री माननीय राम दास अठावले पैरों में तकलीफ के कारण, लिफ्ट के अभाव में श्री ब्रह्मा जी के दर्शन से वंचित होकर लौटे है।
देखने का विषय यह है कि क्या अब भी गहरी नींद में सोया राज्य, जिला,मंदिर प्रशासन निशक्त जन श्रद्धालुओं की श्री ब्रह्मा गायत्री जी के प्रति दर्शन की भावनात्मक आस्था, श्रद्धा रूपी पीड़ा को क्या गभीरता से महसूस कर लिफ्ट जैसी आवश्यक सुविधा उपलब्ध करवाएं जाने की अविलंब कार्यवाही करेगा?
निशक्त जनों के प्रति हो रही अनदेखी और उपेक्षा के अति शीघ्र समाधान की गुहार में अरूण पाराशर सामाजिक कार्यकर्ता, पुष्कर तीर्थ।

error: Content is protected !!