केयर्न ऑयल एंड गैस ने जियोथर्मल एनर्जी के उत्‍पादन में सहायता के लिये बेकर ह्यूजेस के साथ अनुबंध किया

नई दिल्‍ली, 24 जून, 2022: तेल और गैस की खोज एवं उत्‍पादन करने वाली भारत की सबसे बड़ी कंपनी केयर्न ऑयल एंड गैस ने एनर्जी टेक्‍नोलॉजी कंपनी बेकर ह्यूजेस के साथ एक अनुबंध पर हस्‍ताक्षर किये हैं। इस अनुबंध के तहत कंपनी के तेल और गैस के रिपर्पज्‍ड कुओं से जियोथर्मल एनर्जी को काम में लिया जाएगा। इस अनुबंध का सफल निष्‍पादन होने पर केयर्न ऑयल एंड गैस तेल और गैस के साथ 2.4 मेगावाट तक बिजली का सह-उत्‍पादन करेगी, जिससे हर साल 17,000 टन ग्रीनहाउस गैस से छुटकारा मिलेगा। यह अनुबंध केयर्न ऑयल एंड गैस द्वारा हाल ही में घोषित ईएसजी के रोडमैप के बाद हुआ है, जिसमें उसने 2050 तक शून्‍य-उत्‍सर्जक कंपनी बनने का वचन दिया था।
इस मामले के बारे में केयर्न ऑयल एंड गैस के डिप्‍टी सीईओ प्रचुर साह ने कहा, “केयर्न में हम भारत में घरेलू ऊर्जा की मांग को पूरा करने और क्रियाकलापों में स्‍थायित्‍व को प्रोत्‍साहित करने के लिये भी मजबूती से प्रतिबद्ध हैं। बेकर ह्यूजेस के साथ हमारे जुड़ने से सर्वश्रेष्‍ठ प्रौद्योगिकी का भारत की हरित ऊर्जा में योगदान मिलेगा। पूरी दुनिया में तेल के सूखते कुओं से जियोथर्मल एनर्जी के उत्‍पादन को बढ़ावा देने के लिये अभियान चल रहा है। केयर्न में हम भारत में सर्वश्रेष्‍ठ वैश्विक पद्धतियाँ लाने और ऊर्जा आत्‍मनिर्भरता की दिशा में देश के सफर में सहयोग देने के लिये प्रतिबद्ध हैं।”
बेकर ह्यूजेस में भारत और बांग्‍लादेश के कंट्री डायरेक्‍टर नीरज सेठी ने कहा, “केयर्न वेदांता का बेकर ह्यूजेस के साथ मजबूत रिश्‍ता होने के कारण हम 2050 तक शून्‍य-उत्‍सर्जक बनने की केयर्न की यात्रा में उनके साथ काम करने को लेकर उत्‍साहित हैं। हम उच्‍च तापमान में खोदे गये तेल और गैस के मौजूदा कुओं की रिपर्पजिंग के लिये व्‍यावहारिकता का संयुक्‍त अध्‍ययन करेंगे, ताकि जियोथर्मल एनर्जी पैदा हो सके। भारत को ऊर्जा के प्रदूषण-रहित और ज्‍यादा संवहनीय स्रोतों की तलाश है, इसलिये हमें विश्‍वास है कि बेकर हघेस की टेक्‍नोलॉजी ऊर्जा का एक ज्‍यादा स्‍थायित्‍वपूर्ण भविष्‍य लाने में केयर्न ऑयल एंड गैस को सहयोग देने में एक महत्‍वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।”
प्रारंभिक अध्‍ययनों के आधार पर रागेश्‍वरी डीप गैस फील्‍ड (बाड़मेर बेसिन, राजस्‍थान) के भीतर और आस-पास के हाइड्रोकार्बन कुओं को जियोथर्मल एनर्जी के उत्‍पादन के लिये चुना गया है। केयर्न ऑयल एंड गैस और बेकर ह्यूजेस के बीच हुए अनुबंध का निष्‍पादन चरणों में किया जाएगा, जैसे उत्‍पादन या खोज के योग्‍य हाइड्रोकार्बन (तेल और गैस) कुओं की रिपर्पजिंग द्वारा जियोथर्मल एनर्जी पैदा करने की व्‍यावहारिकता और क्षमता का अध्‍ययन, परियोजना की परिकल्‍पना तैयार करना, परिकल्‍पना को परखने के लिये एक पायलट प्रोजेक्‍ट और फिर पूरी परियोजना का निष्‍पादन। परियोजना की व्‍यावहारिकता के अध्‍ययन का पहला चरण परियोजना शुरू होने के बाद चार महीनों में पूरा होगा। व्‍यावहा‍रिकता अध्‍ययन के चरण में जियोसाइंस डाटा का एकीकरण और उसकी व्‍याख्‍या, क्षेत्र की जियोथर्मल क्षमता का अध्‍ययन, सतही सुविधाओं को समझने के लिये क्षेत्र का दौरा, समीक्षा की एक संपूर्ण रिपोर्ट बनाना, आदि शामिल होंगे।
बेकर ह्यूजेस के साथ जियोथर्मल एनर्जी की खोज के लिये यह अनुबंध इस साल फरवरी में केयर्न ऑइल एंड गैस द्वारा घोषित ईएसजी रोडमैप के बाद हुआ है। कंपनी के ईएसजी उद्देश्‍य उसके परिचालन क्षेत्रों में लोगों का जीवन बेहतर बनाने पर केन्द्रित हैं। इसमें 1 मिलियन लोगों के लिये स्‍थायी आजीविका के अवसर, डिजिटल शिक्षा कार्यक्रमों द्वारा 2030 तक लगभग 9 मिलियन विद्यार्थियों की शिक्षा और स्‍वास्‍थ्‍यरक्षा, शिक्षा, पोषण एवं कल्‍याण के माध्‍यम से 20 मिलियन महिलाओं और बच्‍चों का उत्‍थान शामिल है। कंपनी इस परियोजना के पूरे जीवनचक्र में नेट वाटर पॉजिटिविटी और नवीकरण योग्‍य ऊर्जा के उपयोग को बनाये रखकर और 2030 तक 2 मिलियन पेड़ लगाकर तथा जैवविविधता के संरक्षण और बढ़त द्वारा हमारे ग्रह को ज्‍यादा स्‍वस्‍थ बनाने के लिये नवाचार कर रही है। केयर्न ऑयल एंड गैस ने हाल ही में अपनी मंगला पाइपलाइन को पूरी तरह सौर ऊर्जा से चलने वाली पाइपलाइन में बदलने की प्रक्रिया को शुरू करने की घोषणा भी की थी। यह नवाचार और अन्‍य पहलें नवीकरण योग्‍य ऊर्जा के क्षेत्र में गहराई तक उतरने और देश के शून्‍य-उत्‍सर्जन लक्ष्‍यों के लिये प्रतिबद्ध रहने में कंपनी की सहायता कर रही हैं।

error: Content is protected !!