-केंद्र की भाजपानीत एनडीए सरकार ने विधानसभा चुनाव और लोकसभा चुनाव को देखते हुए खेले जातीय समीकरण के कार्ड
-राष्ट्रपति पद के लिए पहली दलित व आदिवासी महिला और उपराष्ट्रपति पद के लिए जाट को उतारा चुनाव मैदान में
-दलित व आदिवासी महिला के राष्ट्रपति बनने से बाबा साहब अंबेडकर का सपना हो जाएगा साकार🙋♀️
*✍️प्रेम आनन्दकर, अजमेर।*
👉केंद्र की भाजपानीत एनडीए सरकार ने राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति पद के लिए हो रहे चुनाव में दो तीर से कई निशाने साध लिए हैं। राष्ट्रपति पद के लिए पहली दलित व आदिवासी महिला नेत्री द्रोपदी मुर्मू और उपराष्ट्रपति के लिए जाट नेता जगदीप धनखड़ को चुनाव मैदान में उतारा है। राष्ट्रपति पद के लिए 18 जुलाई और उपराष्ट्रपति पद के लिए 6 अगस्त को चुनाव होगा। श्रीमती मुर्मू उड़ीसा की हैं और झारखंड की राज्यपाल रह चुकी हैं। जबकि धनखड़ राजस्थान में झुंझुनूं से सांसद रह चुके हैं। उन्होंने अजमेर से लोकसभा का चुनाव लड़ा था, लेकिन हार गए थे। इसके बाद अजमेर जिले की किशनगढ़ विधानसभा सीट से चुनाव जीतकर विधायक बने। धनखड़ पहले जनता दल में थे। वहां से कांग्रेस में आए थे। इसके बाद भाजपा में शामिल हो गए थे। वे केंद्रीय मंत्री भी रहे। सुप्रीम कोर्ट के वकील रह चुके धनखड़ वर्तमान में पश्चिम बंगाल के राज्यपाल हैं। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से लोहा लेने का इनाम धनखड़ को मिला है। देखा जाए, तो केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने इस साल गुजरात सहित कुछ राज्यों, अगले साल 2023 में राजस्थान सहित कुछ राज्यों में होने वाले विधानसभा चनुाव और वर्ष 2024 में होने वाले लोकसभा चुनावों को देखते हुए जातीय समीकरण के पत्ते फेंटे हैं। संभवतः देश में पहली बार दलित व आदिवासी महिला के राष्ट्रपति बनने से भाजपा को अगले चुनावों में दलित और आदिवासी वोट बैंक में अच्छी खासी सेंध लगने की उम्मीद रहेगी। राजनीति के जानकारों का मानना है कि दलित और आदिवासी शुरू से लेकर अभी तक कांग्रेस के वोट बैंक रहे हैं।
