केकड़ी 7 सितंबर (पवन राठी)पर्युषण पर्व के अंतर्गत चल रहे कार्यक्रमो की श्रृंखला में घटाघर स्थित आदिनाथ मंदिर में धर्म सभा को संबोधित करते हुए रेशु दीदी ने
कहा किअप्राप्त भोगों की इच्छा न करना तथा प्राप्त भोगो से विमुख हो जाना त्याग है ।जो जीव सम्पूर्ण द्रव्यों से मोह छोड़कर संसार देह और भोगों से उदासीन रूप परिणाम रखता है उससे त्याग धर्म होता हे। दान में परोपकार एवं त्याग आत्महित का भाव रहता है। आत्म कल्याण के इच्छुक मानव उत्तम त्याग धर्म को अवश्य ही जीवन में लाएँ। घंटाघर स्थित श्री आदिनाथ मंदिर में रेशु दीदी ने शास्त्र सभा के दौरान अपने प्रवचन में कहे । प्रातः जिनभिषेक ओर शांतिधारा द्वारा, नित्यपूजन सहित पंडित अंकित शास्त्री दीपा दीदी ओर रेशु दीदी के निर्देशन में सुमधुर संगीत के साथ मनोरथ पूर्णकारी त्रेलोक़य महामंडल विधान के श्रीफल सहित अर्घ चढ़ाए गए। शाम को आरती भक्ति संगीत प्रश्नोत्तरी सहित श्री आदिनाथ बहुमंडल द्वारा “जैन धर्म का महत्व “नाटक की प्रस्तुति दी गई ।
*नेमिनाथ मंदिर*
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बोहरा कॉलोनी स्थित नेमिनाथ जैन मंदिर में प्रातः जिन अभिषेक, शांतिधारा, नित्य पूजन सहित पंडित कमल शास्त्री सांगानेर के निर्देशन में सुमधुर संगीत के साथ दशलक्षण महामंडल विधान एवं तीस चौबीसी महामंडल विधान का आयोजन किया गया एवं दान, त्याग धर्म की महत्वता को बताया गया ।
प्रवक्ता रमेश बंसल व पारस जैन ने बताया कि नेमिनाथ मंदिर में शाम को आरती , शास्त्र सभा के बाद से सांस्कृतिक कार्यक्रम के अंतर्गत दीप प्रज्जवलन अशोक कुमार ज्ञान चंद सिंहल द्वारा किया गया । शांतिनाथ बहुमंडल द्वारा सुंदर नाटिका “अणुव्रत का संस्कार,गुणों का श्रृंगार” प्रस्तुत किया गया । पारितोषिक प्रेम चंद घनश्याम जैन धुँधरी वालों द्वारा वितरित किये गए । नाटिका का संचालन विद्या जैन, अलका जैन सदारा ने किया ।