केकड़ी 8 सितंबर (पवन राठी)
बोरा कॉलोनी स्थित नेमिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में पर्यूषण पर्व के नौवें दिन उत्तम आंकिचन दिवस पर प्रातः नित्य पूजन, दसलक्षण महामंडल विधान वह तीस चोबीसी महामंडल विधान का आयोजन पंडित कमल शास्त्री सांगानेर व पंडित रतनलाल जैन नासिरदा के सानिध्य में विनोद जैन हिंगोनिया के सुमधुर संगीत के साथ आयोजित हुआ । मीडिया प्रभारी रमेश बंसल व पारस जैन ने बताया कि शाम को शास्त्र सभा के दौरान पंडित कमल शास्त्री ने बताया कि दुख का मूल ममता है और सुख का मूल समता है ।समता भाव को प्राप्त करने के लिए अपरिग्रह की आवश्यकता है, परिग्रह पिशाच है दुखी का बीज है । सांस्कृतिक कार्यक्रम की संयोजिका चंद्रकला जैन ने बताया कि शाम को राजुल महिला मंडल द्वारा सामूहिक नृत्य प्रतियोगिता आयोजित की गई जिसमें सुंदर नृत्य प्रस्तुत किए गए । विजेताओं को अरुणा बंसल ने पुरुस्कार वितरित किये ।
*आदिनाथ मंदिर*
ज्ञानानंद स्वभाव निज आत्मा को छोड़कर अन्य कुछ भी मेरा नहीं है ,ऐसा जानना, मानना और उनसे विरक्त रहना उत्तम आँकीचन धर्म है । किंचित मात्र भी परिग्रह का न होना उत्तम आंकिचन है । घंटाघर स्थित श्री आदिनाथ मंदिर में पर्युषण पर्व पर शास्त्र सभा में अपने प्रवचन के दौरान धर्म सभा में रेशु दीदी ने कहे । शाम को अहिंसा यात्रा संघ के तत्वाधान में श्री निर्वाण लड्डू सजाओ प्रतियोगिता का आयोजन किया गया ।