उदयपुर। राजस्थान साहित्य अकादमी उदयपुर एवं शहीद सी एस राठौड़ फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में ‘युवा कहानी में स्त्री स्वर’ विषयक एक दिवसीय कहानी संगोष्ठी विज्ञान समिति, उदयपुर आयोजित की गई।
शहीद सी एस राठौड़ फाउंडेशन के संस्थापक निदेशक डॉ. अनुश्री राठौड़ ने अपने उद्बोधन में बताया कि स्त्री एक ऐसा चरित्र जो हमेशा ही साहित्य में विमर्श का विषय रहा है। चाहे कवि हो, कहानीकार हो या विचारक उसकी रचनात्मकता में कहीं न कहीं स्त्री जरूर होती है।
लेकिन एक स्त्री स्वयं क्या सोचती है अपने बारे में, वह अपने को समाज में कहां खड़ा देखती है? खासकर स्त्रियों की आज की युवा पीढ़ी । यह भी विचार-विमर्श का विषय है और इसी प्राकल्पना पर केंद्रित है ‘युवा कहानी में स्त्री स्वर’ संगोष्ठी।
कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार डा.विद्या पालीवाल ने की। मुख्य अतिथि डा.निर्मल गर्ग एवं विशिष्ट अतिथि डा.तराना परवीन थीं। अनुश्री राठौड़ के स्वागत उद्बोधन के बाद वरिष्ठ साहित्यकार डा. विमला भंडारी ने बीज वक्तव्य देते हुए कहा कि आज ऐसी कहानियां होनी चाहिए जो अपने समय के सच को रेखांकित करे। तराना परवीन ने कहा कि कहानी सदैव युवा होती है। निर्मल गर्ग ने बताया कि नारी आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ती रहनी चाहिए। अध्यक्षीय उद्बोधन में डा.विद्या पालीवाल ने कहा कि जो नारी मन में खटकता है उसे उभारने की आवश्यकता है। इस अवसर पर सूक्ष्म चित्रण के चितेरे चंद्र प्रकाश चित्तौड़ा की लघु पुस्तिका का विमोचन भी किया गया। संचालन निर्मला शर्मा ने किया।
इसके बाद तकनीकी सत्र की अध्यक्षता डा. मंजू चतुर्वेदी ने की और मुख्य अतिथि चेतना भाटी थी। पुलिस उप अधीक्षक चेतना भाटी ने आह्वान किया कि वर्तमान परिवेश में स्त्री को अपनी ताकत को पहचानना होगा। मंजू चतुर्वेदी ने कहा कि यह सुखद है कि आज स्त्री का समय बदला है और इसमें समाज का सहयोग प्राप्त होता रहा है। उज्मा कलाम, शकुंतला पालीवाल एवं डा.प्रियंका भट्ट ने युवा कहानियों में नारी स्वर पर अपने विचार व्यक्त किए। डा. वीणा चूंडावत ने “परिपक्वता में पगे नये स्वर” विषय पर पत्र वाचन किया। समाहार डा. मधु अग्रवाल ने प्रस्तुत किया। इस सत्र का संचालन नम्रता चौधरी ने किया।
समापन सत्र की अध्यक्षता डा.रश्मि बोहरा ने की। इस अवसर पर मुख्य अतिथि डा.प्रीता भार्गव एवं विशिष्ट अतिथि रेणु देवपुरा थीं। अपने उद्बोधन में प्रीता भार्गव ने कहा कि स्त्री समानता के लिए प्रोत्साहन मिलना नितांत आवश्यक है। रश्मि बोहरा ने कहा कि स्त्री विमर्श पर इस तरह के आयोजन सार्थक कहे जा सकते हैं। इस सत्र का संचालन सुनीता निमिष ने किया और धन्यवाद आशा पांडे ओझा ने ज्ञापित किया। साथ ही फाउंडेशन के सह निदेशक अनुविंद सिंह राठौड़ ने शहीद सी एस राठौड़ फाउंडेशन के प्रमुख उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर डा.ज्योतिपुंज, अशोक मंथन, तरुण कुमार दाधीच, पुष्कर गुप्तेश्वर, आशा पांडेय ओझा, ब्रजराज सिंह जगावत, बिलाल पठान, राजेंद्र पानेरी, डा.कुंदन माली, महेंद्र साहू, सनत जोशी, श्रीरत्न मोहता, जगदीश भंडारी, डा.मनोहर श्रीमाली, बालकृष्ण त्रिपाठी, राजेश मेहता, सुनील टांक, गोविंद सिंह राठौड़, रेखा शर्मा आदि गणमान्य साहित्यकार उपस्थित रहे। अंत में फाउंडेशन की निदेशक डॉ अनुश्री राठौड़ ने सभी अतिथियों एवं श्रोताओं के साथ ही राजस्थान साहित्य अकादमी और अकादमी अध्यक्ष दुलाराम सहारण का आभार जताया।