संघनायक गुरुदेव श्री प्रियदर्शन मुनि जी महारासा ने फरमाया की गुरुदेव श्री पन्नालाल जी महाराज हमारे प्रेरक है ,और हमें उनके जीवन से प्रेरणा लेनी है। गुरुदेव की भावना थी कि लोगों के जीवन के अंदर अज्ञान का अंधकार दूर होना चाहिए।
पुराने समय में एक महान वैज्ञानिक बेंजामिन नाम के व्यक्ति ने घर के बाहर एक दीपक जलाकर लोगों को लगने वाली ठोकरों को दूर करने का प्रयास किया ,उसको देखकर दूसरे लोग भी अपने घर के बाहर दीपक जलने लगे।
ऐसा ही वाक्य गुरुदेव श्री पन्नालाल जी महारासा के साथ हुआ। उन्होंने देखा कि लोगों के जीवन में अज्ञान रूपी अंधकार का गहरा अंधेरा है ,तब सोचा कि बाहर का प्रकाश का लाभ भी व्यक्ति को लगने वाली ठोकरों से बचा देता है ,तो जब व्यक्ति में भीतर का प्रकाश जागृत हो जाएगा तो कितना लाभप्रद होगा ।इस सोच को क्रियान्वित करते हुए प्रथम स्वाध्याय के रूप में श्री सोहनलाल जी छाजेड और श्री रतनलाल जी चौधरी को मसूदा पर्युषण पर्व के दौरान सेवा देने भेजा। इन आठ दिनों में बहुत अच्छा धर्म ध्यान हुआ, और गुरुदेव का प्रथम प्रयोग सफल रहा। फिर विक्रम संवत 2007 के चातुर्मास में विजयनगर गुलाबपुरा में श्री जैन श्वेतांबर स्वाध्याय संघ की विधिवत स्थापना हुई ।इस वर्ष 14 जगह पर स्वाध्याय बंधुओ ने जाकर सेवाएं दी ।फिर तो यह संख्या 100_ 125 तक पहुंच गई। पहले पहले इस कार्य का विरोध भी हुआ कि श्रावक क्या पाट पर बैठकर संतों की तरह प्रवचन देंगे। मगर दीर्घदर्शी गुरुदेव की इस सोच को लगभग लगभग आज सभी संघों ने स्वीकार कर लिया है। गुरुदेव ने इस प्रकार समूचे भारतवर्ष में स्वाध्याय की अलख जगाही एवं लोगों के अज्ञान रूपी अंधकार को दूर किया ।
इसी के साथ गुरुदेव कन्या शिक्षा के भी पक्षधर थे, उस समय में जब कन्याओं को ज्यादा नहीं पढ़ाया जाता तब गुरुदेव श्री जी ने कन्या शालाएं खुलवाई और कन्याओं को पढ़ने का मौका प्रदान किया ।क्योंकि कन्या दो घरों को रोशन करने वाली होती है।
पुराने जमाने की शिक्षा पद्धति गुरुकुल पद्धति पर आधारित थी। लेकिन आज की शिक्षा पद्धति बालकों को पैसा कमाने और महत्वाकांक्षी बनाने का जुनून पैदा करने का काम कर रही है।
मगर हम उस प्राज्ञ गुरुदेव की सोच के अनुसार संस्कार निर्माण करने वाली नैतिक, धार्मिक एवं सर्वांगीण विकास करने वाली शिक्षाओं को ग्रहण कर पाए ,और गुरुदेव के गुणों को जीवन में उतार पाए तो सर्वत्र आनंद ही आनंद होगा।
प्राज्ञ गुरु जन्म जयंती कार्यक्रम में आज प्राज्ञ बहु बालिका मंडल द्वारा गुरुदेव के जीवन पर एक सुंदर प्रस्तुति की गई एवं 1008 बार प्राज्ञ चालीसा का पाठ कार्यक्रम हुआ। महिला शिविर में आज परीक्षा का आयोजन हुआ। श्रीमती दीप्ति जी मेहता एवं श्रीमती शिल्पा जी खटोड़ ने गुरुदेव के मुखारविंद से छह उपवास की तपस्या के प्रत्याखान ग्रहण किया।
धर्म सभा का संचालन बलवीर पीपाडा ने किया।
पदमचंद जैन