सारी ज़िन्दगी अपने-आप को स्वस्थ वही है पाता,
आनंदित प्रफुल्लित होकर योगाभ्यास जो करता।
मानसिक शारीरिक आध्यात्मिक ऊर्जा वो बढ़ाता,
जीवन को सार्थक बनाता जो रोज़ इसको करता।।
ऋषि-मुनि और महर्षियों की सत्य हुई यें कहावत,
योगाभ्यास ही है जरिया जो रोगों से करें बगावत।
रोगमुक्त जीवन जीना ऐसी सबकी होती है चाहत,
जिसके लिए छोड़ना पड़ता ये रोज़ाना की दावत।।
जिस-जिसने भी किया योग का रोज़ाना अभ्यास,
प्रतिरोधक क्षमता बढ़ा एवं हुआ उसका विकास।
स्वस्थ स्वास्थ्य बनकर इससे होता ऊर्जा आभास,
इससे होता श्वास की तक़लिफो मे फ़ायदा ख़ास।।
प्रथम-सुख यही है भाया कि निरोगी रहें ये काया,
संपूर्ण जगत को उदाहरण देकर सबको जगाया।
आत्मा को परमात्मा से मिलाप-करना समझाया,
21 जून की ख़ास पहचान योगदिवस से बनाया।।
बच्चें बुड्ढे नौजवान सब रखे अनुशासन का ध्यान,
ज़िन्दगी लगने लगेगी भैया फ़िर सबको आसान।
छोड़-बिस्तर आलस त्यागकर बनाएं जा पहचान,
अपने तन और मन को रखना निरोगी हर इंसान।
रचनाकार ✍️
गणपत लाल उदय, अरांई अजमेर राजस्थान
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