अजमेर की नब्ज के जानकार डॉ. सुरेश गर्ग हमारे बीच नहीं रहे। उनका नाम परिचय का मोहताज नहीं। शहर का शायद ही कोई ऐसा जागरूक व्यक्ति होगा, जो उनको न जानता हो, या जिसने इस हरदिल अजीज शख्सियत का नाम न सुना हो। असल में इसकी एक मात्र वजह ये थी कि एक तो वे आम जनता से जुड़ी नगर पालिका सेवा में रहे, दूसरा ये कि उन्होंने केवल नौकरी ही नहीं की, बल्कि सदैव अजमेर से जुड़े हर राजनीतिक, सामाजिक व सांस्कृतिक मुद्दे से हर वक्त जुड़े रहे। सेवानिवृत्ति के बाद तो वे पूरी तरह अजमेर के लिए समर्पित हो गए और अजमेर के हित से जुड़े हर मुद्दे पर अपना किरदार निभाने की कोशिश करते रहे। वे आयुर्वेद व होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति की गहन जानकारी की वजह से भी लोकप्रिय थे। सेवाभाव के चलते लागत मूल्य पर ही आयुर्वेद की दवाई दे देते थे। यदि कोई निर्धन आ जाए तो उसे मुफ्त में ही दवा दे कर स्वयं को भाग्यवान समझते थे। इस कार्य में उनकी पत्नी श्रीमती इन्द्रप्रभा गर्ग भी हाथ बंटाती थीं।
स्वर्गीय श्री किशन स्वरूप जी गर्ग के घर 13 फरवरी 1948 को जन्मे डॉ. गर्ग ने एमए व एलएलबी तक अध्ययन किया है और बायोकेमिस्ट व आयुर्वेद रत्न की शिक्षा भी अर्जित की। उन्होंने 14 साल तक जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग में सेवाएं दीं और उसके बाद 28 साल तक राजस्थान नगरपालिका सेवा में रहे और अधिशाषी अधिकारी के पद से सेवानिवृत्त हुए। सरकारी सेवा के दौरान कर्मचारी संगठनों की गतिविधियों से जुड़े रहे। सन् 1966 से 77 तक राष्ट्रीय जलदाय कर्मचारी संगठन (इंटक) के अध्यक्ष और 1977 से 80 तक राष्ट्रीय जलदाय कर्मचारी संगठन (इंटक) के महामंत्री रहे। सहकारी क्षेत्र में भागीदारी निभाते हुए दी अजमेर जलदाय कर्मचारी बचत व साख सहकारी समिति के निदेशक रहे।
समाजसेवा के क्षेत्र में भी आपकी सक्रियता रही और 1970 से 78 तक स्वयंसेवी संस्था इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ वूमन आर्गेनाइजेशन में निदेशक रहे। सेवारत अग्रवाल कल्याण परिषद के आजीवन संरक्षक, अग्रवंशज संस्थान के निदेशक, अग्रवाल वैवाहिक परिचय एवं सामूहिक सम्मेलन में उपाध्यक्ष व संयोजक और अग्रबंधु निर्देशिका के संपादक रहे। उन्होंने संत श्री मोरारी बापू की नौ दिवसीय कथा के आयोजन के संयोजन का जिम्मा निभाया। वे लंबे समय तक फाल्गुन समारोह की आयोजन समिति के कोषाध्यक्ष रहे।
उन्होंने नगर पालिका कानून की पांच पुस्तकें, व्यंग्य व स्वास्थ्य पर पुस्तकें लिखीं। उन्होंने स्थानीय निकाय के बढ़ते कदम पत्रिका का संपादन किया और अनेक स्मारिकाओं का प्रकाशन करवाया। आंखन देखी पाक्षिक व रिमझिम साप्ताहिक में भी संपादन का कार्य किया। वे सन् 2001 से 2005 तक अजयमेरू प्रेस क्लब में निदेशक थे। सन् 1970 से 1980 तक सामाजिक संस्था प्रगतिशील युवक संघ में उसके अध्यक्ष रहे। राजनीतिक से उनका शुरू से जुड़ाव रहा। लोकसभा व विधानसभा चुनाव में कांग्रेसी प्रत्याशियों के खुल कर काम करने की वजह से भाजपा शासनकालों में अजमेर से स्थानांतरित हो कर बाहर रहना पड़ा। वे स्वर्गीय श्री केसरी चंद चौधरी के शिष्य माने जाते थे। केन्द्रीय संचार राज्य मंत्री श्री सचिन पायलट से नजदीकी की बदौलत शहर कांग्रेस के उपाध्यक्ष के पद पर आसीन रहे। उनकी पत्नी श्रीमती इन्द्रप्रभा गर्ग सन् 1982 से 90 तक शहर महिला कांग्रेस की महामंत्री रही हैं। अजमेर के इतिहास, वर्तमान व भविष्य पर लिखित पुस्तक अजमेर एट ए ग्लांस के प्रकाशन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। इस पुस्तक का प्रकाशन रिमझिम प्रकाशन ने किया। गर्ग परिवार के लिए उनका निधन वज्राघात सा है। कुछ दिन पूर्व उनके लघुभ्राता वरिष्ठ पत्रकार श्री निर्मल गर्ग का निधन हुआ था। उनके बडे भ्राता श्री कमल गर्ग वरिष्ठ पत्रकार कर्मचारी नेता रहे हैं और वर्तमान में समाजसेवा के कार्यों में व्यस्त रहते हैं।
अजमेरनामा न्यूज पोर्टल स्वर्गीय श्री सुरेश गर्ग के निधन पर गहरी श्रद्धांजलि अर्पित करता है।