बाल विवाह मुक्त भारत के ‘100 दिवसीय अभियान’ को सफल बनाने में आर.एम.के.एम. आगे आया

बाल विवाह रोकथाम व जागरूकता पेम्पलेट का विमोचन
भारत को 2030 तक बाल विवाह मुक्त बनाने के लिए केंद्र सरकार के दृढ़ निश्चय और बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के एक साल पूरे होने के मौके पर राजस्थान महिला कल्याण मण्डल ने अजमेर जिले से बाल विवाह के खात्मे के लिए शुरू हुए ‘100 दिवसीय गहन जागरूकता अभियान’ की सफलता सुनिश्चित करने के लिए सभी सरकारी विभागों व एजेंसियों के साथ करीबी समन्वय से काम करने का संकल्प दोहराया। आर.एम.के.एम. एक्सेस टू जस्टिस फाॅर चिल्ड्रन परियोजना के माध्यम से जिले में अर्से से बाल विवाह के खात्मे के लिए जमीन पर काम कर रहा है। केंद्रीय महिला और बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने ‘बाल विवाह मुक्त भारत’ अभियान के एक साल पूरा होने के अवसर पर नई दिल्ली में इस ‘100 दिवसीय गहन जागरूकता’ अभियान की शुरुआत की। इस अभियान का उद्देश्य उस पूरे परिवेश को ध्वस्त करना है जो बाल विवाह के फलने-फूलने में मदद करता हैं। इन प्रयासों में मिली सफलता को रेखांकित करते हुए हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कहा कि स्पष्ट नीतियों, लगातार की जा रही कार्रवाईयों और गांव-गांव तक पहुंच रहे प्रयासों की बदौलत भारत बाल विवाह को पूरी तरह खत्म करने की ओर तेजी से बढ़ रहा है।
जिले में बाल विवाह रोकने के और जागरूकता के लिए राजस्थान महिला कल्याण मण्डल के द्वारा सामान्य भाषा एवं रोचक चित्रों के साथ पेम्पलेट एवं स्टीकर बनाए गए जिनका विमोचन संस्था परिसर चाचियावास में आयोजित कार्यक्रम के दौरान संभागीय आयुक्त शक्तिसिंह राठौड़, सामाजिक न्याय व अधिकारिता विभाग के संयुक्त निदेशक जय प्रकाश, शिक्षाविद् राकेश कटारा, टाटा पाॅवर के सी.एफ.ओ. जितेन्द्र भाया, संस्था निदेशक राकेश कुमार कौशिक, सचिव तथा मुख्यकार्यकारी क्षमा आर कौशिक एवं उपनिदेशक नानूलाल प्रजापति के द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। पेम्पलेट और स्टीकर डिजाईन करने में बुकलेट पीडीया नई दिल्ली के पियुष पौद्दार का विशेष सहयोग रहा।
संस्था के जिला समन्वयक दीपक कुमार जोरम ने कहा कि जिला प्रशासन एवं अन्य स्टेक होल्डर्स के साथ समन्वयन स्थापित करके यह अभियान 8 मार्च 2026 तक विभिन्न चरणों में चलाया जाएगा। पहले चरण में स्कूलों, कॉलेजों और अन्य शिक्षण संस्थानों में जागरूकता के प्रसार पर जोर रहेगा। वहीं दूसरे चरण में मंदिर, मस्जिद, चर्च और गुरुद्वारे जैसे धार्मिक स्थलों पर जहां विवाह संपन्न कराए जाते हैं व बैंक्वेट हाल और बैंड वालों, हलवाई जैसे विवाह में सेवाएं देने वालों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जाएगा। तीसरे और आखिरी चरण बाल विवाह की रोकथाम के लिए ग्राम पंचायतों, नगरपालिका के वार्डों और समुदाय स्तरीय भागीदारी और जिम्मेदारी को मजबूत किया जाएगा। केंद्र ने अधिसूचना जारी कर सभी राज्य सरकारों से कहा है कि वे इस ‘100 दिवसीय गहन जागरूकता अभियान’ को सफल बनाने के लिए हरसंभव प्रयास करें ताकि बाल विवाह मुक्त भारत के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में जनसमुदाय में चैतरफा और स्पष्ट बदलाव देखने को मिले। अधिसूचना के बाद राज्य सरकार ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, पंचायती राज मंत्रालय, ग्रामीण विकास मंत्रालय, स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग और उच्च शिक्षा विभाग को इस अभियान में सक्रिय भागीदारी करने के निर्देश दिए हैं ताकि लक्षित उद्देश्यों को हासिल किया जा सके।
                                                      राकेश कुमार कौशिक
                                                            निदेशक
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