बंगाल बचाओ यात्रा: अब तक की प्रगति

भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) [सीपीआई(एम)] द्वारा पश्चिम बंगाल में आयोजित ‘बंगाल बचाओ यात्रा’ एक महत्वाकांक्षी जनसंपर्क अभियान है, जो राज्य की राजनीतिक और सामाजिक चुनौतियों को उजागर करने के उद्देश्य से शुरू किया गया है। यह यात्रा 29 नवंबर 2025 को कूचबिहार जिले के तूफानगंज से प्रारंभ हुई और 17 दिसंबर 2025 को उत्तर 24 परगना जिले के कमरहट्टी में समाप्त होगी। लगभग 1,000 किलोमीटर लंबी यह यात्रा 11 जिलों से गुजरती हुई दक्षिण बंगाल पहुंचेगी। यह अभियान 2026 के विधानसभा चुनावों से पूर्व सीपीआई(एम) की राजनीतिक पुनरुत्थान रणनीति का हिस्सा है।
यात्रा उत्तर बंगाल से दक्षिण की ओर प्रगति कर रही है, जिसमें मुख्य जिले शामिल हैं: कूच बिहार, अलिपुरद्वार, जलपाईगुड़ी, दार्जिलिंग, उत्तर दिनाजपुर, दक्षिण दिनाजपुर,मालदा, नदिया, पूर्वी बर्दवान, हुगली, हावड़ा और उत्तर 24 परगना। छोटी-छोटी सहायक यात्राओं का संगम मुख्य मार्ग से होगा, जिसमें युवा नेता, जैसे मिनाक्षी मुखर्जी और अन्य भाग लेंगे। कुल 19 दिनों की यह यात्रा दैनिक रैलियों, सभाओं और जनसंपर्क पर केंद्रित है।
यात्रा का मुख्य लक्ष्य तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सरकार द्वारा कथित अन्याय, लूट और लोकतांत्रिक क्षरण को उजागर करना है, साथ ही भाजपा-नीत केंद्र सरकार की ‘जनविरोधी नीतियों’ का विरोध करना है। पार्टी नेताओं के अनुसार, यह यात्रा ग्रामीण संकट, बेरोजगारी, शिक्षा, स्वास्थ्य और नदी कटाव जैसी समस्याओं पर जनता से संवाद स्थापित करने का माध्यम बनेगी। राज्य सचिव मोहम्मद सलीम ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर राज्य में आरएसएस-भाजपा के प्रवेश को सक्षम बनाने का आरोप लगाया है।
यात्रा के 12वें दिन तक यह उत्तर बंगाल से होकर नदिया जिले में प्रवेश कर चुकी है। प्रारंभिक चरण में कूचबिहार, जलपाईगुड़ी और मालदा में मजबूत जनसमर्थन मिला, जहां नदी कटाव प्रभावित परिवारों के साथ संवाद प्रमुख रहा। 9 दिसंबर को मुर्शिदाबाद में तीन प्रमुख रैलियां और छह छोटी सभाएं आयोजित हुईं, जिनमें 1,00,000 से अधिक लोगों ने भाग लिया। जलंगी, डोमकोल और इस्लामपुर जैसे क्षेत्रों में विशाल जनसमूह देखा गया, जहां स्लोगन ‘लड़ाई लड़ाई लड़ाई-चाई’ गूंजा। यात्रा में हजारों कार्यकर्ता और आमजन शामिल हो रहे हैं।
बंगाल बचाओ यात्रा: मुख्य पड़ाव
1. 29 नवंबर 2025: उद्घाटन रैली, तुफानगंज (कूच बिहार) – यात्रा का आरंभ एक विशाल रैली से हुआ, जिसमें हजारों कार्यकर्ता एवं आमजन शामिल हुए। राज्य सचिव मोहम्मद सलीम ने ‘मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर आरएसएस-भाजपा के राज्य में प्रवेश’ को सक्षम बनाने का आरोप लगाया। रैली में एसआईआर प्रक्रिया को वोटर अधिकारों पर हमला बताते हुए इसका विरोध किया गया। प्रारंभिक दिन में ग्रामीण संकट, नदी कटाव तथा बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर जनसंपर्क स्थापित किया गया। यह घटना यात्रा की राजनीतिक दिशा निर्धारित करने वाली साबित हुई।
2. 30 नवंबर – 5 दिसंबर 2025: उत्तर बंगाल के जिले (अलिपुरद्वार, जलपाईगुड़ी, दार्जिलिंग) – यात्रा ने अलिपुरद्वार एवं जलपाईगुड़ी में प्रवेश किया, जहां ग्रामीण मुद्दों पर केंद्रित सभाएं आयोजित हुईं। एसआईआर फॉर्म भरने में सहायता प्रदान की गई तथा बूथ-स्तरीय एजेंटों (बीएलए) की भूमिका पर चर्चा हुई। दार्जिलिंग में हिल क्षेत्रों की सुरक्षा तथा चाय बागान मजदूरों के अधिकारों पर फोकस रहा। इन दिनों में छोटी-छोटी पदयात्राएं एवं रैलियां हुईं, जिनमें स्थानीय असंतोष को उजागर किया गया। कुल मिलाकर, प्रारंभिक चरण में उत्तर बंगाल के ग्रामीण इलाकों में मजबूत जनसमर्थन प्राप्त हुआ।
3. 6-8 दिसंबर 2025: उत्तर दिनाजपुर, मालदा एवं मुर्शिदाबाद में प्रवेश – उत्तर दिनाजपुर एवं मालदा जिलों में नदी कटाव प्रभावित परिवारों के साथ संवाद प्रमुख रहा। मालदा में रोटी, रोजगार एवं स्वास्थ्य सेवाओं पर सभाएं आयोजित हुईं। 8 दिसंबर को मुर्शिदाबाद में प्रारंभिक सभाओं के माध्यम से यात्रा ने दक्षिण की ओर गति पकड़ी। इन दिनों युवा नेताओं जैसे मिनाक्षी मुखर्जी की सक्रियता उल्लेखनीय रही, जिन्होंने महिलाओं एवं युवाओं के मुद्दों को उठाया।
4. 9 दिसंबर 2025: मुर्शिदाबाद जिले में प्रमुख रैलियां – यात्रा का यह दिन नई ऊंचाई पर पहुंचा, जब जिले में तीन प्रमुख रैलियां (जलंगी, डोमकोल एवं इस्लामपुर) तथा छह छोटी सभाएं आयोजित हुईं। इनमें 1,00,000 से अधिक लोगों ने भाग लिया। मोहम्मद सलीम, मिनाक्षी मुखर्जी एवं शत्रुघ्न मुखर्जी जैसे नेताओं के नेतृत्व में ‘लड़ाई लड़ाई लड़ाई चाई’ जैसे नारे गूंजे। डोमकोल में जनसमूह विशाल था, जहां टीएमसी सरकार पर लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करने का आरोप लगाया गया। मोहम्मद सलीम की अगुआई में शाम की बैठकों में गांव-स्तरीय चर्चाएं हुईं, जो यात्रा की जनसंपर्क क्षमता और गंभीरता को दर्शाती हैं।
5. 10 दिसंबर 2025: मुर्शिदाबाद से नदिया की ओर प्रगति (हरीहरपाड़ा एवं अन्य क्षेत्र) – 12वें दिन यात्रा ने मुर्शिदाबाद के हरीहरपाड़ा, सरुप्पुर एवं काशीपुर  क्षेत्रों में प्रवेश किया। यहां मशाल जुलूस, पदयात्राएं एवं सभाएं आयोजित हुईं, जिसमें सैकड़ों श्रमिक एवं किसान शामिल हुए। मिनाक्षी मुखर्जी ने हरीहरपाड़ा में विशाल जन सभा को संबोधित किया, जहां बंगाल को बचाने की शपथ दिलाई गई। यात्रा 8 जिलों को पार कर नदिया जिले में प्रवेश करने वाली है, जहां 15 किलोमीटर लंबी पदयात्रा होनी है। पुरुलिया में भी सहायक कार्यक्रम चले, जो मुख्य यात्रा से जुड़ रहे हैं।
13 दिसंबर 2025 को चंदननगर (हुगली) के बागबाजार में सभा होगी, जहां मिनाक्षी मुखर्जी मुख्य वक्ता रहेंगी।
यात्रा का समापन 17 दिसंबर को कामारहाटी में विशाल रैली से होगा।
इस यात्रा ने सीपीआई(एम) को जनता से पुनः जोड़ा है, जो 2011 के बाद कमजोर हो रही थी। लाखों की भागीदारी से संकेत मिलता है कि ग्रामीण असंतोष अभियान को गति दे रहा है। सोशल मीडिया पर #BanglaBachaoYatra ट्रेंड कर रहा है, जो यात्रा के प्रभाव को दर्शाता है।
आज 10 दिसंबर 2025 तक, बंगाल बचाओ यात्रा सफलतापूर्वक प्रगति कर रही है और 17 दिसंबर तक- समापन तक- मजबूत गति बनाए रखने की अपेक्षा है। यह अभियान न केवल राजनीतिक मुद्दों को उजागर कर रहा है, बल्कि राज्य सचिव मोहम्मद सलीम के नेतृत्व में पश्चिम बंगाल की सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों पर व्यापक बहस को भी प्रेरित कर रहा है। लोकतंत्र के लिए यह महत्वपूर्ण है। युवा सीपीआई(एम) के लिए यह 2026 चुनावों की तैयारी का महत्वपूर्ण चरण सिद्ध हो रहा है।
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