राजस्थान का साहित्यिक आंदोलन प्रदेश की साहित्यिक चेतना का नया मानक है” — कुलपति

भीलवाड़ा। संगम यूनिवर्सिटी ने 10 दिसंबर 2025 को एक महत्वपूर्ण प्रशंसापत्र जारी करते हुए अनिल सक्सेना ‘ललकार’ द्वारा संचालित “21वीं सदी का राजस्थान साहित्यिक आंदोलन” को राजस्थान में साहित्य, भाषा, संस्कृति और रचनात्मकता के प्रसार का ऐतिहासिक, प्रभावी और जन-आधारित अभियान बताया है।

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) करुणेश सक्सेना ने अपने आधिकारिक पत्र में कहा कि
“अनिल सक्सेना ‘ललकार’ का राजस्थान का साहित्यिक आंदोलन प्रदेश में साहित्यिक जागरूकता और सांस्कृतिक पहचान का नया मानक स्थापित कर रहा है।”

पत्र में उल्लेख है कि यह आंदोलन वर्ष 2010 से जिले से लेकर पंचायत स्तर तक भाषा-संवर्धन, साहित्यिक जागरूकता, लेखन-प्रशिक्षण, सांस्कृतिक संवाद और युवा रचनाकारों को प्रोत्साहन देने का उल्लेखनीय कार्य कर रहा है।

कुलपति ने इस अभियान को “युवा पीढ़ी को साहित्य और भारतीय ज्ञान-परंपरा से जोड़ने वाला असाधारण प्रयास” बताते हुए कहा कि आंदोलन ने विद्यार्थियों को अध्ययन, शोध और संवाद का व्यापक मंच दिया है, जिससे राजस्थान की लोक-भाषा, लोक-कलाओं और रचनात्मक चेतना को नई ऊर्जा मिली है।

राजस्थान के साहित्यिक आंदोलन के अंतर्गत संगम यूनिवर्सिटी में आयोजित “भारतीय संस्कृति, साहित्य और ज्ञान परंपरा” कार्यक्रम में भी अनिल सक्सेना ‘ललकार’ के योगदान को विशेष महत्व देते हुए कहा गया कि उनका साहित्यिक मिशन आगे भी समाज और शैक्षणिक संस्थानों के लिए प्रेरणास्रोत बना रहेगा।

विश्वविद्यालय ने अंत में अनिल सक्सेना ‘ललकार’ के उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएँ प्रेषित की हैं।

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