*खरवा से मसूदा तक सेंकड़ों मकानों में दरारें!*

*अरावली पर्वतमाला में खनन का असर तो नहीं?*
हीरालाल नाहर

ब्यावर जिले के खरवा क्षेत्र में  करीब दो दशकों से अरावली पर्वतमाला में में बेरोकटोक खनन कार्य जारी है। इस क्षेत्र में भूगर्भ से निकलने वाले क्वार्टर्ज,फेल्सफार आदि का ब्यावर पीपलाज रानी सागर रीकों में फेक्ट्रियो में  पीसकर पाउडर बनाकर गुजरात भेजा जाता है वहां इसका उपयोग फेक्ट्रियो में सिरेमिक टाइलें आदि बनाने में किया जाता है।

दो दशकों से यह खनन कार्य क्षेत्र के खरवा , गोपाल सागर, लहरी, सूरजपुरा,सारणिया, काशीपुरा,लीडी आदि के जंगलों में किया जा रहा है। वहीं जिले में स्थापित सीमेंट फेक्ट्रियों के लिए भी चूना पत्थर की पूर्ति इसी क्षेत्र में खनन द्वारा भी की जा रही है । दशकों से चल रहे खनन उद्योग से क्षेत्र में अनेक पहाड़ियां समाप्त हो गईं तथा भूगर्भ खोखला हो गया।
 अक्सर बरसात की कमी का सामना करने वाले ब्यावर अजमेर क्षेत्र में गत वर्ष आई रिकार्ड बरसात अनेक जगह जलाशय लबालब होकर चादरें चल पड़ी थी। वर्षों बाद आई भरपूर बरसात से हर कोई खुश था ।लेकिन दूसरा पहलू यह रहा कि , भूगर्भीय हलचल से खरवा से लेकर मसूदा तक सेंकड़ों में मकानों की नींव हिल गई और मकानों में दरारें आ गई।
शुरुआत में लोग इसे समझ नहीं पाए तथा अपने मकान में आईं दरार और मरम्मत तक ही सीमित रहें। लेकिन आपसी चर्चाओं के बाद पता चला कि किसी एक- दो नहीं बल्कि अकेले खरवा में सेंकड़ों मकानों की नींव हिली तथा मकानों में दरारें आई।लोग इसे भूगर्भीय हलचल ही मान रहे हैं तथा अंदेशा जता रहे हैं कि लगातार हो रहे खनन से धरती खोखली हो गई तथा रात्रि में किसी हल्के भूकम्प 10-15 किलोमीटर क्षेत्र में मकानों में दरारें आ गई।
यही नहीं प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी यही हालत है। भरतपुर क्षेत्र में खनन के चलते भरतपुर सीकर जयपुर तक पिछले वर्षों में धरती हिली है।
क्षेत्र के लोगों को अंदेशा है कि राज्य और केंद्र सरकार ने हाल ही में अरावली पर्वतमाला में खनन नियमों में ढील दी उसका खामियाजा भविष्य में बड़ी भूगर्भीय हलचल से आम जनता को भुगतना पड़ेगा। तथा अरावली पर्वतमाला बचाने के लिए आम जनता चिंतित हैं।उसका आक्रोश कभी भी फट सकता है। सरकार को,  जनभावनाओं को गंभीरता से लेना चाहिए।
हीरालाल नाहर पत्रकार 
9929686902
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