हास्य और व्यंग्य का अनूठा संगम: अजमेर नाट्य महोत्सव में ‘सैयां भये कोतवाल’ ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया

अजमेर, 27  दिसंबर, 2025 अजमेर थिएटर फेस्टिवल के आखरी दिन प्रसिद्ध नाटक ‘सैयां भये कोतवाल’ का शानदार मंचन किया गया। निरंजन कुमार के निर्देशन में सजी इस प्रस्तुति ने अपनी ऊर्जा, हास्य और तीखे सामाजिक कटाक्ष से दर्शकों का दिल जीत लिया।
बसंत सबनीस के लिखे इस नाटक में संगीत, नृत्य और संवादों के माध्यम से सत्ता की विसंगतियों पर प्रहार किया जाता है।

नाटक की कहानी एक विवेकहीन राजा और उसके भ्रष्ट प्रधान के इर्द-गिर्द घूमती है। जब राज्य में ‘कोतवाल’  पद रिक्त होता है, तो प्रधान अपने साले को उस पद पर नियुक्त करने की साजिश रचता है। हालांकि, चतुर हवलदार और सुंदर नर्तकी मैनावती अपनी बुद्धिमानी से इस पूरी व्यवस्था को चुनौती देती है  और सिपाही के साथ मिलकर हवलदार को कोतवाल बनाने के लिए सत्ता की बिसात बिछाती है।
ह नाटक दिखाता है कि जब राजा अपने कर्तव्यों से विमुख होकर मौज-मस्ती में डूब जाता है, तब शासन के कारिंदे नियम-कानूनों को ताक पर रखकर अपने रिश्तेदारों और चहेतों को लाभ पहुँचाते हैं, तब आम आदमी भी बुद्धि और साहस के बल पर सत्ता के दुरुपयोग को बेनकाब कर सकता है।
‘सैंया भऐ कोतवाल’ अंततः हमें यह चेतावनी देता है कि सत्ता की लापरवाही और जनता की चुप्पी मिलकर भ्रष्ट तंत्र को जन्म देती है। यह नाटक दर्शकों को हँसी के साथ-साथ यह सवाल भी सौंपता है। क्या हम केवल तमाशबीन बने रहेंगे, या व्यवस्था को बदलने की जिम्मेदारी भी उठाएँगे?
यह नाटक केवल मनोरंजन के लिए नहीं है, बल्कि यह उस नौकरशाही और शक्ति के दुरुपयोग पर एक आईना है जो आज भी हमारे समाज में मौजूद है। लोक कला के माध्यम से हम गंभीर संदेश को भी बड़ी सरलता और हंसी के साथ जनता तक पहुँचाया।
कलाकारों ने अपने प्रदर्शन से समां बांध दिया। निरंजन, योबी, राजेंद्र, बरखा, संदीप, संजय और जुम्मा खान के अभिनय ने दर्शकों को अपनी कुर्सियों पर बांध कर रखा. कलाकारों ने अपनी कॉमिक टाइमिंग और संवाद अदायगी से सत्ता की निरंकुशता और मूर्खता को बेहद प्रभावशाली ढंग से पर्दे पर उतारा।
पूरा सभागार दर्शकों से खचाखच भरा था और नाटक के दौरान लगातार बजती तालियों और ठहाकों ने माहौल को जीवंत बनाए रखा।

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