साहित्य जब अपने दायरे से निकलकर समाज की चेतना का स्वर बनता है, तब उसका मंच केवल काग़ज़ नहीं रहता—वह राष्ट्रीय संवाद का हिस्सा बन जाता है। ऐसी ही एक गौरवपूर्ण उपलब्धि का साक्षी बन रहा है हिंदी साहित्य, जब जानी-मानी साहित्यकार *डॉ. मधु खंडेलवाल* का विशेष साक्षात्कार *राष्ट्रीय चैनल डीडी दूरदर्शन* पर *18 जनवरी 2026* को प्रसारित होने जा रहा है।
डॉ. मधु खंडेलवाल का यह साक्षात्कार केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि समकालीन हिंदी साहित्य की वैचारिक शक्ति और सामाजिक प्रतिबद्धता का प्रतिनिधि क्षण है। ‘*साहित्य-संवाद*’ जैसे गरिमामय कार्यक्रम में उनकी उपस्थिति इस बात का प्रमाण है कि साहित्य आज भी समाज को दिशा देने की सामर्थ्य रखता है।
इस संवाद में डॉ. खंडेलवाल ने साहित्य की सामाजिक भूमिका, उसकी दिशा, रचनात्मक यात्रा और समकालीन चुनौतियों पर गहन विचार साझा किए। विशेष रूप से डिजिटल युग में अभिव्यक्ति के नए माध्यमों, सोशल मीडिया के प्रभाव, और साहित्य की गरिमा को बनाए रखने की आवश्यकता पर उनके विचार अत्यंत सारगर्भित रहे। उन्होंने स्पष्ट किया कि साहित्य का उद्देश्य मात्र मनोरंजन नहीं, बल्कि *सामाजिक जागरूकता और सकारात्मक परिवर्तन* की चेतना को जाग्रत करना है।
डीडी दूरदर्शन जैसे राष्ट्रीय मंच पर उनका यह साक्षात्कार यह भी दर्शाता है कि साहित्यकार की आवाज़ आज भी सार्वजनिक विमर्श में महत्वपूर्ण स्थान रखती है। कार्यक्रम के माध्यम से दर्शकों को उनके रचनात्मक अनुभवों, साहित्यिक उपलब्धियों और विचार-दृष्टि से रूबरू होने का अवसर मिलेगा।
अजमेर से राष्ट्रीय पटल तक की यह साहित्यिक यात्रा अनेक लेखकों, पाठकों और विशेषकर युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत है। यह उपलब्धि इस सत्य को रेखांकित करती है कि सतत साधना, वैचारिक स्पष्टता और सामाजिक सरोकार साहित्य को सीमाओं से मुक्त कर राष्ट्रीय चेतना का हिस्सा बना सकते हैं।
*18 जनवरी 2026* को प्रसारित होने वाला यह साक्षात्कार निश्चय ही हिंदी साहित्य प्रेमियों के लिए एक स्मरणीय प्रसंग होगा—जहाँ शब्द, विचार और संवेदना राष्ट्रीय संवाद में एक साथ उपस्थित होंगे।