अजमेर। महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय (MDSU), अजमेर के प्रशासन द्वारा हाल ही में जारी किया गया आदेश, जिसमें विश्वविद्यालय परिसर में धरना, प्रदर्शन एवं आंदोलन पर रोक लगाने की बात कही गई है, पूरी तरह अलोकतांत्रिक, असंवैधानिक और तानाशाही मानसिकता को दर्शाने वाला है।NSUI जिलाध्यक्ष अंकित घारू ने इस आदेश की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए कहा कि यह फैसला भारत के संविधान द्वारा प्रदत्त अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, लोकतांत्रिक अधिकारों और छात्र हितों के विरुद्ध है। विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रों की आवाज़ दबाने का प्रयास कर रहा है, जिसे NSUI किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करेगी।
अंकित घारू ने कहा कि “विश्वविद्यालय किसी जागीर की तरह नहीं चलाया जा सकता। छात्र कोई अपराधी नहीं हैं, बल्कि वे अपने भविष्य और अधिकारों की बात लोकतांत्रिक तरीके से रखते हैं। जब विश्वविद्यालय प्रशासन खुद परीक्षा व्यवस्था, उत्तर पुस्तिकाओं की जांच और परिणामों में गंभीर लापरवाही करता है, तब छात्रों का शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना पूरी तरह जायज़ है।”
उन्होंने आगे कहा कि हाल ही में सामने आए उत्तर पुस्तिका जांच घोटाले और रिजल्ट गड़बड़ियों के बाद छात्रों में भारी आक्रोश है। प्रशासन अपनी विफलताओं पर जवाब देने के बजाय आंदोलन दबाने के आदेश जारी कर रहा है, जो दुर्भाग्यपूर्ण है। NSUI स्पष्ट करती है कि छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों पर किसी भी प्रकार का प्रतिबंध स्वीकार नहीं किया जाएगा।
तानाशाही आदेशों को वापस लिया जाए। छात्र समस्याओं पर संवाद की नीति अपनाई जाए, न कि दमन की। यदि विश्वविद्यालय प्रशासन इस आदेश को वापस नहीं लेता है, तो NSUI छात्र हित में लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण आंदोलन को और तेज़ करेगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी विश्वविद्यालय प्रशासन की होगी।
— अंकित घारू
जिलाध्यक्ष, NSUI अजमेर