क्या गणतन्त्र और प्रजातंत्र एक ही है या उनमें अंतर है ? यदि अंतर है तो गणतन्त्र और प्रजातंत्र में अंतर और क्या अंतर है ? वास्तविकता में जहाँ गणतंत्र में संविधान सर्वोच्च होता है वहीं प्रजातंत्र में जनता सर्वोच्च होती है । गणतंत्र में विधि का विधान यानि कानून काराज्य होता है तो प्रजातंत्र में बहुमत का। प्रजातंत्रमें जिसके पास बहुमत होता है वही शासक होता है । बहुमतका शासन बहुसंख्यक के शासन में न बदल जाये इसलिए हमारे संविधान निर्माताओं ने भारत में प्रजातंत्र के थोड़े पर कतरे हैं जिसके फलस्वरूप और हमारे देश मेंबहुमत को नहीं अपितु संविधान को सर्वोपरि बनाया गया। गणतंत्र में बहुसंख्यक, केवल बहुमत के आधार पर किसीव्यक्ति, समाज या अल्पसंख्यक समुदाय केमूलभूत अधिकारों के साथ छेड़छाड़ नहीं कर सकते। गणतन्त्र में राष्ट्रप्रमुख को आनुवांशिकआधार पर नियुक्त नहीं किया जाता है । लोकतंत्र एक राजनीतिक पद्धति है जबकि गणतंत्र एक स्पष्ट राजनीतिक घोषणा है | प्रजातंत्र में बहुमत निरंकुश और सर्वशक्तिमान होता है। भारत संसदीय प्रणाली वाला एक प्रभुत्व संपन्न, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक गणराज्य है। रूस और चीन जैसे देशों में संविधान तो सर्वोपरि है किन्तु वे एकल पार्टी द्वारा शासित राज्य हैं अतः रूस चीन गणतंत्र तो हैं किन्तु प्रजातंत्र नहीं। गणतंत्र में निर्वाचित सरकार के अधिकार हमारे संविधान की सीमाओं में बंधे होते हैं। नागरिकों की स्वीकृति से संविधान को अपनाया जाता है और इसे केवल जनता के प्रतिनिधियों द्वारा विभिन्न नियमों के तहत संशोधित किया जा सकता है। संविधान के तीन प्रमुख अंग कार्यपालिका, न्यायपालिका और विधायिका होती है उन्हें शक्ति संविधान देता है। ये तीनों यानी कार्यपालिका, न्यायपालिका और विधायिका एक दूसरे से स्वतंत्र होते हैं तथा एक दूसरे के कार्यों या शक्तियों में हस्तक्षेप नहीं करते।
बहुमत का शासन बहुसंख्यक के शासन मेंन बदल जाये इसलिए हमारे संविधान निर्माताओं ने भारत में प्रजातंत्र के थोड़े पर कतरे हैं जिसके फलस्वरूप और हमारे देश मेंबहुमत को नहीं अपितु संविधान को सर्वोपरि बनाया गया। गणतंत्र में बहुसंख्यक, केवल बहुमत के आधारपर किसी व्यक्ति, समाज या अल्पसंख्यक समुदाय के मूलभूत अधिकारों के साथ छेड़छाड़ नहींकर सकते। प्रजातंत्र में बहुमत निरंकुश और सर्वशक्तिमान होता है। बहुमत के विरुद्ध अल्पमत को कोई संरक्षण नहीं होता। इसी आशंका के चलते हमारे संविधान में मूलभूत अधिकारों को शामिल किया गया है और इन मूलभूत अधिकारों की सीमा के बाहर से प्रजातंत्र की शुरुआत होती है।हमारे संविधान की जो दूसरी महत्वपूर्ण विशेषता है वह है धर्म निरपेक्षता। हमारे संविधान की एक और विशेषता हैऔर वह है समाजवाद। समाजवाद में संपत्ति और बड़े उद्योगों के सहकारी या सरकारीस्वामित्व को बढ़ावा दिया जाता है और निजी भागीदारी को कम। अंतिम विशेषता है सम्प्रभुता जहाँ हमारा संविधान हमारे राष्ट्र को एक स्वतंत्र और असीमित शक्तियोंवाला राष्ट्र घोषित करता धन्य हैं हमारे संविधान निर्माता जिन्होंने ऐसे व्यापक औरसर्वश्रेष्ठ संविधान को अपनाया । गणतंत्र दिवस यही तथ्य समझने और समझाने का है कि हमारे देश में संविधान सर्वोपरि है न कि कोई व्यक्ति, वंश, समाज या समुदाय। हमें कानून का राज्य चाहिए नेताओं का नहीं। नेताओं की जय करने से पहले स्वयं की और संविधान की जय करना सीखना होगा। नेता हमारे निर्वाचित प्रतिनिधि हैं, शासक नहीं। नेताओं का भविष्य जनता के हाथ में है, जनता का भविष्य नेताओं के हाथ में नहीं।
पाकिस्तान भी अपने आपको गणतंत्र कहता है किन्तु वह इस्लामिक गणतंत्र है। उसी तरह ईरान भी इस्लामिक गणतंत्र हैं। ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, जापान आदि देश केवल लोकतान्त्रिक हैं किन्तु वहां गणतंत्र नहीं हैं वहीं दूसरी तरफ भारत, अमेरिका आदि देश लोकतांत्रिक भी हैं और गणतंत्र भी। इंग्लैंड की उच्चतम व्यवस्था राजशाही है, जहां राजा प्रमुख है इसलिए लोकतांत्रिक होते हुए भी वह एक गणतांत्रिक देश नहीं है क्योंकि राजा किसी ने या समूह से नही चुना जाता । हमारे संविधान की प्रस्तावना में स्पष्ट केसाथ लिखा गया है कि हम भारत के लोग, भारत को एक संपूर्ण प्रभुत्व संपन्न, समाजवादी ,पंथनिरपेक्ष , लोकतंत्रात्मक गणराज्य बनाने के लिए, तथा उसके समस्त नागरिकों को:सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय,विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता,प्रतिष्ठा और अवसर की समता, प्राप्त करने के लिए,तथा उन सबमें,व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता और अखण्डता सुनिश्चित करनेवाली, बंधुता बढ़ाने के लिए,दृढ़ संकल्पित होकर अपनी संविधानसभा में आज तारीख 26 नवम्बर 1949 ईस्वी(मिति मार्गशीर्ष शुक्ल सप्तमी, संवत दो हजार छह विक्रमी) को एतद्द्वारा इस संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित करते हैं।हमारे संविधान निर्माताओं कास्पष्ट मत था कि न्याय पालिका, कार्यपालिकाऔर विधायकी अपने आप में पूर्णतया स्वतंत्र रूप में कार्य करें कोई भी एक दुसरे केकार्य को प्रभावित करने की कोशिश नहीं करें | पिछले अनेकों सालों से ऐसा लगता है कि सामर्थ्य व्यक्ति या संस्थाइस मूल भावना के विपरीत काम कर रही है वे एक दूसरे के कामों में अप्रत्यक्ष रूप सेहस्तक्षेप करते हैं | वर्तमान में समाज और देश के हालात को देख कर ऐसा लगने लगाहै कि हम सभी अत्यंत निष्क्रिय इन्सान बन गये हैं और हम सभी ने अपने आप को उनके यानि राजनेताओं के भरोसे छोड़ दिया है और हम कभी उनसे सवाल नहीं करते हैं |हम अपनी तुच्छताओं के अंदर विभाजित हो गये है | हम को कभी जाति प्रभावित करती है तो कभी धर्म , कभी मन्दिर तो कभी मसिज्द तो कभी गिरजाघर तो कभी गुरुदुवारे तो कभी श्मसान तो कभी कब्रिस्तान |हम राज नेताओं के आने पर उनकी ही दी हुई फूलमालाओं और गुलदस्तों सेउनका स्वागत करते हैं, उनके साथ फोटो खिचवा के नाचते हैं औरयह गलत फहमी पाल कर कि अब उनकी क्रपा से हम लोगों के अच्छे दिन आने वाले हैं |किसी बुद्दीजीवी और समझदार व्यक्ति ने बिलकुल सही कहा कि हमें वैसी ही सरकारें और मार्गदर्शन करने वाले मिलते हैं जिसके हम पात्र होते है | जब हम बदलेगें और हमारी सोच बदलेगीतभी उनकी सोच बदलेगी और सरकारों की सोच एवं कार्यशेली भी बदलेगी |