“महर्षि दयानंद सरस्वती चेयर समाप्त नहीं, मीडिया में प्रकाशित खबरें भ्रामक : कुलसचिव”

महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय, अजमेर ने मीडिया में प्रकाशित उन खबरों को भ्रामक और तथ्यहीन बताया है, जिनमें यह दावा किया गया था कि विश्वविद्यालय में स्थापित महर्षि दयानंद सरस्वती चेयर को समाप्त कर दिया गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि चेयर को बंद नहीं किया गया है, बल्कि पूर्व चेयर प्रोफेसर का कार्यकाल पूर्ण होने के कारण उन्हें नियमानुसार कार्यमुक्त किया गया था।

कुलसचिव कैलाश चन्द्र शर्मा की ओर से सचिव माननीय राज्यपाल, राजस्थान को प्रेषित पत्र में बताया गया है कि महर्षि दयानंद सरस्वती चेयर के अंतर्गत कार्यरत प्रोफेसर श्री नरेश कुमार धीमान का निर्धारित कार्यकाल पूरा हो चुका था। इसके पश्चात विश्वविद्यालय द्वारा उन्हें कार्यमुक्त किया गया, लेकिन चेयर की समाप्ति का कोई निर्णय नहीं लिया गया है।

पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि चेयर प्रोफेसर की निरंतरता बनाए रखने के लिए विश्वविद्यालय स्तर से राज्य सरकार, उच्च शिक्षा मंत्री, विधानसभा अध्यक्ष, केन्द्रीय शिक्षा मंत्री, प्रधानमंत्री तथा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग सहित सक्षम प्राधिकारियों को कई बार पत्राचार किया गया, किंतु अभी तक किसी भी स्तर से आवश्यक स्वीकृति प्राप्त नहीं हुई है।

विश्वविद्यालय प्रशासन ने यह स्पष्ट किया है कि किसी भी प्रकार की नई नियुक्ति करने का अधिकार विश्वविद्यालय को स्वयं नहीं है, इसके लिए राज्य सरकार अथवा यूजीसी जैसी सक्षम संस्थाओं की स्वीकृति अनिवार्य होती है। जैसे ही सक्षम स्तर से अनुमति प्राप्त होगी, चेयर प्रोफेसर के चयन की प्रक्रिया तत्काल प्रारंभ कर दी जाएगी।

इस पूरे प्रकरण में परोपकारिणी सभा, अजमेर द्वारा विश्वविद्यालय परिसर में किए गए प्रदर्शन और धरने को भी विश्वविद्यालय ने अनुचित बताया है। प्रशासन का कहना है कि किसी व्यक्ति विशेष के कथनों के आधार पर ऐसा आंदोलन करना तर्कसंगत नहीं है, क्योंकि वास्तविक स्थिति इससे भिन्न है और चेयर को समाप्त करने जैसा कोई निर्णय नहीं लिया गया है।

विश्वविद्यालय प्रशासन ने मीडिया से अपील की है कि तथ्यों की पुष्टि के बिना इस प्रकार की खबरें प्रकाशित न की जाएं, जिससे अनावश्यक भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो और शैक्षणिक वातावरण प्रभावित हो।

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