इंडिया एनर्जी वीक 2026 में उद्योगपतियों ने गैस को संतुलित ऊर्जा परिवर्तन के लिए आवश्यक बताया

नई दिल्लीजनवरी, 2026-इंडिया एनर्जी वीक 2026 में उद्योग के विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि भारत का ऊर्जा परिवर्तन अलग थलग प्रौद्योगिकियों के बजाय सभी क्षेत्रों और नीति भागीदारों के बीच समन्वित कार्रवाई से परिभाषित होगा। जैसा कि ऊर्जा की मांग निरंतर बढ़ रही है, आधारभूत ढांचे का विकास करने वालों, आपूर्तिकर्ताओं और प्रौद्योगिकी प्रदाताओं के बीच गठबंधन को एक लचीली ऊर्जा प्रणाली के लिए आवश्यकता के तौर पर देखा जाता है।

इस परिचर्चा से यह बात रेखांकित हुई कि भारत के ऊर्जा परिदृश्य में विश्वसनीयता और किफायतीपन उतना ही महत्वपूर्ण है जितना उत्सर्जन में कमी लाना। प्राकृतिक गैस और एलएनजी को व्यवहारिक परिवर्तन वाले ईंधन के तौर पर स्थापित किया जा रहा है जो अक्षय ऊर्जा की पूरक बनते हुए औद्योगिक वृद्धि और स्वच्छ परिवहन में सहायक है।

एसएंडपी ग्लोबल एनर्जी के वैश्विक निदेशक (एलएनजी प्राइस रिपोर्टिंग) केनेथ फू के मुताबिक, “वैश्विक एलएनजी आपूर्ति की वृद्धि बढ़ने के साथ भारत तेजी से एक बेंचमार्क संचालित त्वरित खरीदार बन रहा है और डब्लूआईएम बनाम हेनरी हब बनाम ब्रेंट लिंक्ड प्राइसिंग के बीच डिसलोकेशंस के दौरान स्पॉट या अल्पकालीन बाजारों में कदम रख रहा है। भारत ने 2025 में महज 26 एमटीपीए एलएनजी का आयात किया। एक अतिरिक्त 3.5-4 एमटीपीए दीर्घकालीन अनुबंधित मात्रा की डिलीवरी 2026 से शुरू होने को तैयार है।”

विशेषज्ञों ने पाया कि नेशनल गैस ग्रिड और सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (सीजीडी) नेटवर्कों का विस्तार परिवहन एवं घरेलू क्षेत्रों के कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने में महत्वपूर्ण घटक हैं।

थिंक गैस के प्रबंध निदेशक और सीईओ अभिलेश गुप्ता ने कहा कि वृद्धि के अगले चरण को पृथक प्रयासों के बजाय समन्वय से गति मिलेगी।

उन्होंने कहा, “प्राकृतिक गैस भारत को आर्थिक गतिविधि को बगैर धीमा किए उत्सर्जन घटाने के एक वास्तविक मार्ग की पेशकश करती है। इसकी पूर्ण संभावना का दोहन करने के लिए अपस्ट्रीम आपूर्तिकर्ताओं, सीजीडी कंपनियों, नीति निर्माताओं और प्रौद्योगिकी प्रदाताओं को सामंजस्य के साथ काम करने की जरूरत है। जब स्थायी नीति के अनुकूल ढांचागत विस्तार और ग्राहक केंद्रित क्रियान्वयन होता है तो उद्योग, मोबिलिटी और परिवारों को व्यापक स्तर पर गैस का सपोर्ट मिलता सकता है।”

परिचर्चा में टेक्नोलॉजी और डेटा की भूमिका भी पूरे गैस नेटवर्कों में बिलिंग पारदर्शिता, मांग प्रबंधन और प्रणाली की विश्वसनीयता सुधारने में एक महत्वपूर्ण प्रवर्तक के तौर पर रेखांकित की गई।

पोलारिस स्मार्ट मीटरिगं में गैस कारोबार के सीईओ गौरव सेमवाल ने पाया कि भारत के ऊर्जा परिवर्तन में गैस कैसे फिट होता है, इसे डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर तेजी से आकार देगा।

उन्होंने कहा, “जैसा कि प्राकृतिक गैस की खपत बढ़ रही है, कंपनियों को इस पूरे नेटवर्क पर बेहतर दृश्यता और नियंत्रण की जरूरत पड़ेगी। स्मार्ट मीटरिंग और डेटा आधारित परिचालन घाटे में कमी लाने, ग्राहकों का विश्वास बढ़ाने और गैस प्रणालियों को अधिक कुशल बनाने में मदद कर सकते हैं। यदि भारत के स्वच्छ ऊर्जा मिश्रण में गैस को एक दीर्घकालीन भूमिका निभानी है तो यह आवश्यक है।”

एसएंडपी ग्लोबल एनर्जी में इंडिया कंटेंट प्रमुख पुलकित अग्रवाल के मुताबिक, “पिछले कुछ वर्षों में सिटी गैस ढांचे के विस्तार से व्यापक वृद्धि के परिणाम आने के साथ गैस के बाजारों की वृद्धि के लिए भारत का सिटी गैस क्षेत्र स्पष्ट वृद्धि कारक बना हुआ है। सीजीडी की खपत निरंतर 8.8 प्रतिशत तक की दर से बढ़ रही है भले ही कुल गैस मांग में सीजीडी की हिस्सेदारी पिछले वर्ष के 20 प्रतिशत से मामूली रूप से बढ़कर 23 प्रतिशत पहुंची है। इस देश ने पिछले पांच वर्षों में ऑटोमोटिव सीएनजी स्टेशनों की संख्या लगभग तीन गुनी और घरेलू गैस (पीएनजी) कनेक्शन की संख्या दोगुनी कर ली है।”

वर्ष 2030 तक गैस की हिस्सेदारी 15 प्रतिशत करने के सरकार के लक्ष्य के साथ अब ध्यान रणनीतिक संवाद से हटकर पाइपलाइन ढांचे और सिटी गैस नेटवर्कों के तेज क्रियान्वयन पर है जिससे यह सुनिश्चित होगा कि नेट जीरो की ओर जाने का भारत का मार्ग आर्थिक रूप से व्यवहारिक और सामाजिक रूप से समावेशी हो।

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